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एमसीडी चुनाव: टिकट बंटवारे पर घमासान खत्म तो बागियों पर माथापच्ची शुरू

अंतिम समय में अपनी उम्मीदवारी से हाथ धोने वाले नेताओं ने पार्टियों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 04, 2017 08:52 PM IST

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एमसीडी चुनाव: टिकट बंटवारे पर घमासान खत्म तो बागियों पर माथापच्ची शुरू

दिल्ली एमसीडी चुनाव में लाख कोशिशों के बावजूद पार्टियों में बगावत थमने का नाम नहीं ले रही है. खासकर बीजेपी और कांग्रेस के कई वर्तमान पार्षदों ने टिकट नहीं मिलने के कारण निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नमांकन दाखिल कर दिया है.

कई वर्तमान पार्षदों ने अपने रिश्तेदारों को भी चुनाव मैदान में उतार कर अपनी-अपनी पार्टियों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. बीजेपी, स्वराज इंडिया पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे दलों ने अपने सभी उम्मीदवारों को पहली बार एमसीडी चुनाव में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने भी अपने दो तिहाई उम्मीदवारों को पहली बार मैदान में उतारा है.

3 अप्रैल को नामांकन का आखिरी दिन था. नामांकन के आखिरी दिन विभिन्न पार्टियों के 3249 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया. दिल्ली नगर निगम चुनाव में लगभग 4 हजार से अधिक नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं.

नए प्रयोगों से पार्टियों की मुसीबत बढ़ा दी है

टिकट नहीं मिलने से नाराज बीजेपी-कांग्रेस पार्टियों के बागी नेताओं ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल किया. कांग्रेस और बीजेपी दोनो पार्टियां ने नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन तक टिकट जारी करने में देरी की.

लिस्ट जारी करने में देरी की वजह यह थी कि अगर किसी उम्मीदवार को टिकट नहीं मिले तो उसको नामांकन भरने के लिए कम से कम वक्त मिले. लेकिन हुआ बिल्कुल उलट कांग्रेस और बीजेपी के कई वर्तमान पार्षदों ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दोनो पार्टियों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है.

दिल्ली के कई इलाके में 3 मार्च को देर रात तक जिलाधीश कार्यालय में पर्चा भरने वालों का तांता लगा रहा. कांग्रेस, बीजेपी और आप के अलावा कई और पार्टियों के बगी नेताओं ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया.

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दिल्ली नगर निगम चुनाव में परिसीमन के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं. इस बार के एमसीडी चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के नए-नए प्रयोगों ने उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ा दी है. सबसे ज्यादा प्रयोग करने वाली बीजेपी से नाराज कार्यकर्ताओं का फायदा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी उठाने की फिराक में हैं.

बीजेपी ने अपने सभी पुराने पार्षदों का टिकट काट कर सबसे ज्यादा मुसीबत मोल ले ली है. जानकार माने रहे हैं कि बीजेपी के कुछ पुराने पार्षदों की नाराजगी पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी के मजबूत दावेदार बाहर हो गए हैं और कमजोर दावेदारों को जगह मिली है.

लोकसभा और विधानसभा चुनाव से अलग हट कर एमसीडी चुनाव में बीजेपी के नियम लागू करने के क्या फायदे और क्या नुकसान होंगे यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा. लेकिन पार्टी के कई मजबूत पार्षदों ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर बीजेपी के लिए समस्या खड़ी कर दी है.

आप ने अंतिम समय में बदल दिया फैसला

पटपड़गंज से मौजूदा बीजेपी पार्षद संध्या वर्मा ने भी पार्टी से बगावत कर निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है. संध्या वर्मा के बारे में कहा जाता है कि वह अपने क्षेत्र में काफी चर्चित हैं.

इसके अलावा बीजेपी के जिन पार्षदों ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है उनमें नारायणा से मालती वर्मा, प्रीत विहार से पूनम कालिया, सुल्तानपुरी के राहुल सांई, तुमकीपुर से अनिता शर्मा, मौजपुर से पुष्पा भट्ट, नवादा से कृष्णा गहलोत और शकरपुर से पुनम शर्मा के नाम शामिल हैं.

NEW DELHI, INDIA - MARCH 25: BJP supporters during the Panch Parmeshwaar Booth Sammelan for the MCD election at Ramlila Ground on March 25, 2017 in New Delhi, India. BJP President Amit Shah set the tone for the upcoming municipal corporation elections in Delhi at a rally in Ramlila Maidan attacking the ruling Aam Aadmi Party in the state. He alleged that no previous government in Delhi has been as corrupt as the incumbent one. (Photo by Vipin Kumar/Hindustan Times via Getty Images)

बीजीपी नेतृत्व नामांकन के आखिरी दिन तक ये तय नहीं कर पाया कि किस रणनीति को अपना कर पार्टी में उभरे मतभेद को दरकिनार किया जा सके. कांग्रेस पार्टी की स्थिति भी कमोबेश बीजेपी जैसी ही दिख रही है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन से नाराज कई नेताओं ने अपने चहेतों को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतार दिया है. माना जा रहा है कि शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे सभी कांग्रेस के नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ खुलेआम बगावत कर दी है.

आम आदमी पार्टी की स्थिति भी कमोबेश यही है. पार्टी के अंदर कार्यकर्ताओं का जबरदस्त विरोध है. आप ने अपने लगभग 20 उम्मीदवारों को अंतिम समय में बदल दिया. अंतिम समय में अपनी उम्मीदवारी से हाथ धोने वाले नेताओं ने भी आप के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है.

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