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आरजेडी के बीजेपी दफ्तर पर हमले से नीतीश की इमेज को धक्का लगेगा

प्रदेश की राजधानी में हुई इस घटना पर 'सुशासन' की बात करने वाले नीतीश कुमार से सवाल जरूर होंगे

Sanjay Singh | Published On: May 18, 2017 12:19 PM IST | Updated On: May 18, 2017 12:19 PM IST

आरजेडी के बीजेपी दफ्तर पर हमले से नीतीश की इमेज को धक्का लगेगा

मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार के 22 ठिकानों पर इनकम टैक्स के छापे पड़े. शेल कंपनियों या दूसरे गलत तरीके से जोड़ी गई संपत्तियों को खंगालने के लिए हुई इस छापेमारी का जवाब एक दिन बाद लालू ने लाठियों और पार्टी के झंडे से लैस अपने लोगों को बीजेपी के स्टेट ऑफिस पर हमला करने के लिए भेजकर दिया. हालांकि, इस घटना से बीजेपी को कम नुकसान होगा और इसका ज्यादा बुरा असर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर पड़ेगा.

आरजेडी के लोग पटना के बीरचंद पटेल पथ पर मौजूद बीजेपी मुख्यालय पर खड़ी कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ करने में सफल रहे हैं. हालांकि, शायद वे बीजेपी वर्कर्स की ताकत को कमतर आंक रहे थे. बीजेपी वर्कर्स ने बाद में आरजेडी के अटैक का जवाब दिया, लेकिन ऐसा तब तक नहीं किया गया जब तक कि आरजेडी की गुंडागर्दी टीवी कैमरों में कैद नहीं हो गई. ज्यादातर हिंदी न्यूज चैनलों पर इसे ब्रेकिंग न्यूज के तौर पर चलाया गया.

लालू जैसा खांटी नेता क्या ऐसा कदम उठा सकता है?

lalu yadav

सवाल यह है कि किसी भी तरह से लालू को इतना नौसिखिया या नासमझ नहीं माना जा सकता कि वह लोकल बीजेपी दफ्तर पर अपने लोगों को लाठियों और पार्टी के झंडों के साथ भेजकर फसाद कराएंगे और नेशनल न्यूज में सुर्खियां बटोरेंगे. लालू एक खांटी नेता हैं जो कि पिछले 25 सालों से राजनीति में बिहार की सबसे दिग्गज शख्सियत बने हुए हैं.

उन्हें पता है कि इस तरह की हरकत बीजेपी की टॉप लीडरशिप को गुस्से से भर देगी. मंगलवार को पड़े इन छापों में अगर बीजेपी नेताओं का कोई हाथ होगा तो इनकम टैक्स, ईडी और इस तरह की अन्य एजेंसियों की उनके खिलाफ कार्रवाई में और तेजी आएगी.

हालांकि, इस तरह के कयास हैं कि लालू को बीजेपी दफ्तर पर अपने पार्टी के लोगों के किए गए हुड़दंग और दंगे का पता नहीं था और यह काम पार्टी के निचले दर्जे के कुछ उत्साहित कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया. लेकिन, एक प्राइवेट लिमिटेड की तरह से सख्त नियंत्रण वाली आरजेडी में इस तरह का कोई कदम तब तक मुमकिन नहीं है जब तक कि इसे लालू यादव-राबड़ी परिवार के कुछ अहम सदस्यों से सहमति न हासिल हो.

सुशासन बाबू की इमेज को लगा धक्का

ऐसा करके लालू या उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य ने चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की इमेज को धक्का पहुंचाया है. नीतीश की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह कानून और व्यवस्था को बनाए हुए हैं.

अब अगर नीतीश आरजेडी के लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं और उन्हें जेल में डालते हैं तो उन्हें लालू के आक्रोश का शिकार होना पड़ेगा. उन पर आरोप लगेगा कि वह बीजेपी के हाथों में खेल रहे हैं.

अगर वह कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो उन पर सत्ता में बने रहने के लिए अपने सहयोगी दल की गुंडागर्दी पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगेगा.

बीजेपी दफ्तर पर हमले से एक घंटे पहले जेडीयू के एक सीनियर लीडर ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया था कि किस तरह से आरजेडी ने पिछले एक दिन (लालू के खिलाफ इनकम टैक्स के छापों की खबर आने के बाद) से कोई कार्रवाई केवल इसलिए नहीं की है क्योंकि राज्य की गद्दी पर नीतीश कुमार बैठे हुए हैं. अगर कोई और मुख्यमंत्री होता तो अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के रुख के हिसाब से राज्य में अब तक भूचाल आ चुका होता. जेडीयू लीडर गलती कर गए. उन्हें आरजेडी के गेमप्लान का अंदाजा ही नहीं था.

लालू-नीतीश में चल रही रस्साकशी

नीतीश और लालू भले ही गठबंधन के सहयोगी हों, लेकिन दोनों पार्टियों के सूत्र बता रहे हैं कि खासतौर पर जेडीयू कई मौकों पर अपने सहयोगी से हो रही दिक्कतों का संकेत दे चुकी है. नीतीश अपनी इमेज से चिंतित हैं और वह लालू का पट्टा गले में डालकर नहीं चलना चाहते हैं.

लालू और उनके लोग यह साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं कि आरजेडी इस महागठबंधन में सबसे बड़ी सहयोगी है. वे यह साबित करते हैं कि यह नीतीश कुमार सरकार नहीं है, बल्कि यह नीतीश-तेजस्वी यादव सरकार है.

पिछले एक पखवाड़े में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं उससे बिहार में सत्ता का समीकरण बदल गया है. इस दौरान 900 करोड़ रुपए के चारा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट का प्रतिकूल आदेश, बिहार, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में लालू परिवार की संपत्तियों का खुलासा करने वाले दस्तावेज जारी होना और शेल कंपनियों के जरिए कथित संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है.

लालू के लिए पहले से ज्यादा जरूरी हुए नीतीश

NITISH-KUMAR

लालू और उनके परिवार के खिलाफ लगे इन सभी आरोपों से ऐसे हालात पैदा हो गए हैं जहां आरजेडी का बिहार में सत्ता में बने रहना बेहद जरूरी हो गया है. लालू की नीतीश पर निर्भरता कई गुना बढ़ गई है. इस मुश्किल वक्त में लालू सत्ता से बाहर रहने का जोखिम नहीं उठा सकते.

लेकिन, लालू नीतीश के आगे सरेंडर करते हुए भी नहीं दिखना चाहते. भविष्य में अगर गठबंधन टूटता भी है तो वह नीतीश को बिना दागदार इमेज के जाने नहीं देना चाहते हैं.

जेडीयू हालात पर गहराई से नजरें बनाए हुए है. नीतीश ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को लालू और उनके परिवार की संपत्तियों और आईटी छापों पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया है.

एक जेडीयू नेता ने कहा, ‘हमें क्या कहना है. हमें कैसे पता कि लालू, उनके बेटों और बेटी ने बिहार और अन्य जगहों पर प्राइम प्रॉपर्टीज कैसे हासिल कीं. हम उनके गलत कृत्यों का बचाव करते हुए नहीं दिखना चाहते. नीतीश जी लालू के लिए अपनी इमेज की बलि नहीं चढ़ा सकते.’

नीतीश का रहस्यमय बयान

मंगलवार के इनकम टैक्स छापों पर नीतीश का मीडिया को दिया गया बयान रहस्यमय था, ‘आप कह रहे हैं कि छापे 22 ठिकानों पर चल रहे हैं, लेकिन आप इन सभी जगहों को क्यों नहीं दिखा रहे हैं.’

फिलहाल नीतीश अपने धैर्य के जरिए अपनी समझबूझ दिखा रहे हैं. वह कोई भी कदम हड़बड़ी में नहीं उठाना चाहते हैं. उनकी पार्टी जेडीयू में यह मान्यता है कि यह पुरानी कहावत कि भ्रष्टाचार के मामलों का ऐसे लीडर्स पर कोई असर नहीं होता जिनके पास मजबूत जातिगत आधार होता है, अब मान्य नहीं रही है. मायावती और मुलायम सिंह-अखिलेश यादव का यूपी में बेअसर हो जाना बदल रहे राजनीतिक नियम की एक मुफीद मिसाल है.

बदल गया भ्रष्टाचार के बावजूद टिके रहने वाला दौर

इस बात के भी तर्क हैं कि जब लालू पर चारा घोटाले के आरोप लगे (उन्हें सजा भी हुई) तो जमीन पर ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे उनकी भ्रष्ट गतिविधियां दिखाई दें. हालिया खुलासे, बन रहे मॉल, आलीशान मकान और दिल्ली में फॉर्म हाउस और इनकम टैक्स के अलग-अलग जगहों पर छापों ने यह तस्वीर बदल दी है.

लालू की छिपी हुई संपत्ति का कम से कम एक हिस्सा अब लोगों के सामने आ गया है और इससे लोगों के दिमाग में उनको लेकर राय बदल सकती है. यहां तक कि उनका कोर वोटर यादव-मुस्लिम भी उनसे छिटक सकता है. पटना में बीजेपी दफ्तर पर किए गए हमले का भी अच्छा परिणाम नहीं होगा. हां यह बात जरूर सच है कि अपने पार्टनर की हरकतों से नीतीश कुमार को तलवार की धार पर चलने जैसा अनुभव हो रहा होगा.

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