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'एनडीए की प्रतिभा पाटिल' नहीं हैं रामनाथ कोविंद

सोशल मीडिया पर ये बातें चल रही हैं कि रामनाथ कोविंद 'एनडीए के प्रतिभा देवी सिंह पाटिल' हैं

Bhuwan Bhaskar Bhuwan Bhaskar Updated On: Jun 20, 2017 06:22 PM IST

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'एनडीए की प्रतिभा पाटिल' नहीं हैं रामनाथ कोविंद

रामनाथ कोविंद के एनडीए का अगला राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का जो गुबार फूटा, उसका लब्बोलुआब बिना किसी शुबहे के केवल एक था- अब एनडीए ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने हिस्से का 'प्रतिभा पाटिल' चुना है.

आश्चर्यजनक बात यह है कि रामनाथ कोविंद को 'एनडीए का प्रतिभा पाटिल' करार देने वाले ट्वीट और फेसबुक पोस्ट केवल वाम धारा के लोगों के ही नहीं थे, बल्कि दक्षिण धारा के लोगों ने भी कमोबेश ऐसी ही प्रतिक्रियाएं दीं. इतना ही नहीं लिबरल माने जाने वाले कई दिग्गज पत्रकारों तक ने कोविंद को एक गुमनाम शख्सियत करार दिया.

सोशल मीडिया अब किसी भी तरह से फ्रिंज (किनारे पर खड़ा अप्रभावी) माध्यम नहीं माना जा सकता. उल्टा यह कहा जाए कि मुख्यधारा की मीडिया के मुकाबले सोशल मीडिया सामाजिक सच्चाइयों को कहीं ज्यादा बेहतर ढंग से पेश करता है, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी.

सोशल मीडिया में आने वाले विचार लगभग स्वतंत्र होते हैं, उन पर किसी तरह के कारोबारी हितों का कोई दबाव नहीं होता है और वे ज्यादातर मामलों में सीधे जनता के दिल की आवाज होते हैं. उसमें भी अगर किसी राजनीतिक मसले पर वाम और दक्षिण दोनों धाराएं एक आवाज में बोल रही हों, तो यह मानने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि वह समाज में फैली आम धारणा है कि वह एक आम आदमी की आवाज है.

तो सवाल यह है कि रामनाथ कोविंद की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर आम आदमी की यह आवाज क्या वास्तव में हकीकत है? क्या सच में कोविंद 'एनडीए के प्रतिभा पाटिल' हैं?

राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दिनों में लगे थे आरोप

pratibha patil

राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दिनों में प्रतिभा पाटिल पर लगे पुणे में अपना घर बनाने के लिए 2.61 लाख वर्ग फुट जमीन पर कब्जे के आरोप और राष्ट्रपति रहते हुए परिवार के साथ विदेश भ्रमण पर खर्च किए गए आम जनता के 200 करोड़ रुपए को छोड़ दें, तो भी जब वह देश की राष्ट्रपति बनीं, उस समय उनके पति पर किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने और भाई पर एक हत्या में भूमिका होने जैसे संगीन आरोप थे.

उनका अपना लंबा चौड़ा कारोबार था, जिसमें अमरावती, जलगांव, पुणे और मुंबई में कई स्कूल और कॉलेज, नई दिल्ली, पुणे और मुंबई में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और जलगांव में ग्रामीण छात्रों के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज से लेकर मुकतैनगर में एक को-ऑपरेटिव चीनी फैक्ट्री तक शामिल थे.

इसके अलावा उन्होंने एक प्रतिभा सहकारी महिला बैंक भी शुरू किया था, जिसका कामकाज रिजर्व बैंक द्वारा फरवरी 2003 में लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद बंद हो गया. रिजर्व बैंक ने लाइसेंस इसलिए रद्द किया क्योंकि प्रतिभा पाटिल के बैंक ने अपने संबंधियों को अवैध तरीके से कर्ज बांट कर बैंक की शेयर पूंजी बढ़ा ली थी.

बैंक ने उनकी अपनी चीनी फैक्ट्री को भी लोन दिया, जो कभी वापस नहीं किया गया. स्वयं प्रतिभा पाटिल की पार्टी यानी कांग्रेस के अंदर भी आम राय यही थी कि आपातकाल में सोनिया गांधी के बच्चों को पालने और रोटियां सेंकने की योग्यता के कारण ही प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति बना दिया गया.

बेदाग रहा है रामनाथ कोविंद का करियर

New Delhi: File photo of Bihar Governor Ramnath Kovind who was announced as NDA's candidate for the Presidential poll on Monday. PTI Photo (PTI6_19_2017_000040B)

दूसरी ओर रामनाथ कोविंद का पूरा राजनीतिक जीवन बेदाग रहा है. इतना ही नहीं, अपने प्रोफेशनल करियर में भी जब वह उच्चतम न्यायालय में वकील थे, उस समय वह वकीलों के एक ऐसे समूह का हिस्सा बने जो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए मुफ्त में मुकदमे लड़ता था.

हरिद्वार में कुष्ठ रोगियों के लिए काम करने वाले दिव्य प्रेम सेवा मिशन के वह मेंटॉर थे और रोगियों के बच्चों के निवास के लिए हॉस्टल बनाने के उद्देश्य से दी गई 25 लाख रुपए की एकमुश्त सहायता के अलावा संस्था की हर तरह से मदद करते रहे हैं. बौद्धिक योग्यता की बात करें तो कोविंद आईआईएम कोलकाता और डॉक्टर बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के मैनेजमेंट बोर्ड में शामिल रहे.

आरएसएस और बीजेपी में उन्हें एक विनम्र और बिना तड़क-भड़क के चुपचाप काम करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है. इसलिए एक दलित नेता के तौर पर उनकी उम्मीदवारी के राजनीतिक मायने जो भी हों, कम से कम कद और चरित्र के लिहाज से उन्हें किसी भी तरह इस उम्मीदवारी के अयोग्य नहीं माना जा सकता.

तो फिर क्या माना जाए कि सोशल मीडिया पर उभरी आम समाज की आवाज गलत है? यह दरअसल उसी सामाजिक सोच का परिणाम है, जिसमें मार्केटिंग कई बार योग्यता पर भारी पड़ जाती है.

मोदी और संघ का मास्टर स्ट्रोक

Narendra Modi

इस लिहाज से देखा जाए, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह पसंद निश्चित तौर पर एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक मानी जा सकती है, जिसने एक साथ राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का संतुलन तो साधा ही है, लेकिन उसके साथ ही राष्ट्रपति भवन की गरिमा और प्रतिष्ठा को भी बरकरार रखा है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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