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चीनी राजदूत से राहुल की मुलाकात: 'कभी ना, कभी हां' से हुई कांग्रेस की फजीहत

चीनी राजदूत से मुलाकात पर पर्दा डालकर इस पूरे मामले में सस्पेंस बनाने का फैसला किसी को भी रास नहीं आ रहा है

Amitesh Amitesh | Published On: Jul 10, 2017 10:16 PM IST | Updated On: Jul 10, 2017 10:16 PM IST

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चीनी राजदूत से राहुल की मुलाकात: 'कभी ना, कभी हां' से हुई कांग्रेस की फजीहत

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर विवादों में हैं. इस बार विवाद का कारण चीन के राजदूत के साथ उनकी हाल में हुई मुलाकात है. राहुल गांधी ने 8 जुलाई को भारत में चीन के राजदूत लू झाओहुई से मुलाकात की थी.

इस वक्त भारत और चीन के बीच डोकलाम इलाके में गतिरोध बना हुआ है. दोनों देशों के रिश्तों में तनातनी के बीच राहुल की चीनी राजदूत के साथ मुलाकत की खबर सामने आई तो इस पर सियासत शुरू हो गई. चीनी दूतावास की वेबसाइट पर राहुल गांधी के साथ चीनी राजदूत की मुलाकात के बारे में जानकारी दी गई थी.

कांग्रेस ने लिया यू-टर्न 

लेकिन, कांग्रेस की तरफ से पहले इस तरह की किसी भी मुलाकात से इनकार किया गया था. लेकिन, जब बवाल बढ़ा तो कांग्रेस ने इस पर यू-टर्न ले लिया. कांग्रेस ने मान लिया कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मुलाकात भारत में चीनी राजदूत के साथ हुई थी.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला से लेकर मनीष तिवारी तक सब अपने युवराज के बचाव में उतर आए. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा सार्वजनिक जीवन में अपनी कार्यशैली के मुताबिक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी राजनेता, अर्थशास्त्री, कूटनीतिक, राजनयिक, राजदूत से अक्सर मुलाकात करते रहते हैं. अभी हाल ही में उन्होंने भारत में चीनी राजदूत, भूटान के राजदूत, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से मुलाकात की थी.

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कांग्रेस की तरफ से ये दिखाने की कोशिश की गई कि इस मुलाकात में कुछ भी गलत नहीं है और ना ही इस मुलाकात को विवादों के इर्द-गिर्द जोड़कर देखना चाहिए.

Rahul Gandhi

कांग्रेस की तरफ से इस बात का तर्क दिया जा रहा है कि सीमा विवाद के बावजूद चीन के साथ हमारे कूटनीतिक और राजनीतिक रिश्ते रहते हैं. इसके अलावा चीन के साथ व्यापार पर भी ना ही कोई असर पड़ता है. तर्क ये दिया जा रहा है चीन के साथ सीमा विवाद के बावजूद पिछले कुछ हफ्तों में भारत सरकार के तीन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, जे पी नड्डा और महेश शर्मा चीन की यात्रा कर चुके हैं.

आखिर सस्पेंस की जरूरत ही क्या थी?

कांग्रेस का तर्क अपनी जगह जायज हो सकता है. लेकिन, अपने युवराज की चीनी राजदूत से मुलाकात पर पर्दा डालकर इस पूरे मामले में सस्पेंस बनाने का फैसला किसी को भी रास नहीं आ रहा है.

लगता है कांग्रेस ने पहले की गलतियों से सबक नहीं ली है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर सस्पेंस बना रहता है. कई बार उनकी विदेश यात्राओं पर सस्पेंस पर सवाल भी उठे. जिसके बाद कांग्रेस सफाई देती रही.

अब तो अपनी किसी भी विदेश यात्रा से पहले ही राहुल गांधी ट्वीट कर पूरी जानकारी पहले ही दे देते हैं. मकसद सस्पेंस बनने से बचाना है. अभी पिछले महीने राहुल गांधी अपनी नानी के घर से छुट्टी मनाकर लौटे हैं. उन्होंने इस बाबत पहले ही ट्वीट कर जानकारी दे दी थी.

उस वक्त राष्ट्रपति चुनाव की गहमागहमी से वो गायब थे. सियासी गलियारों में राहुल की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठे. लेकिन, जब राहुल स्वेदश लौटे तो चीन के साथ तनावपूर्ण रिश्ते को लेकर मोदी पर निशाना साधा. लेकिन, खुद चीनी राजदूत से मिलने पहुंच गए.

लेकिन, बेहतर होता राहुल गांधी अपनी विदेश यात्राओं की तरह ही चीनी राजदूत से मिलने की खबर को भी खुद सार्वजनिक कर देते. कम-से-कम इतना सस्पेंस तो ना होता. और ना ही इस कदर बवाल मचता.

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