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लालू का राहुल से उठा भरोसा, प्रियंका को मैदान में उतारने की वकालत !

लालू को लगता है कि मोदी के सामने एक ऐसे चेहरे को सामने रखा जाए जो मोदी को काफी हद तक टक्कर दे सके

Amitesh Amitesh | Published On: Jul 05, 2017 05:35 PM IST | Updated On: Jul 05, 2017 05:35 PM IST

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लालू का राहुल से उठा भरोसा, प्रियंका को मैदान में उतारने की वकालत !

आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को प्रियंका गांधी के करिश्मे पर ज्यादा भरोसा नजर आ रहा है. लालू को लगता है कि अगर प्रियंका गांधी का करिश्मा चल गया तो फिर अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हवा निकल जाएगी.

मोदी की लोकप्रियता के डर ने लगता है लालू को अंदर से हिला कर रख दिया है. लालू को लगता है कि विपक्षी दलों की एकता भी मोदी को रोक नहीं पाएगी, ऐसे में एक ऐसे चेहरे को सामने रखा जाए जो मोदी को काफी हद तक टक्कर दे सके.

लालू का डर ही अब उनके भीतर की भावना को सामने ला रहा है, वरना इस कदर प्रियंका को मैदान में उतारने की वकालत नहीं करते. क्योंकि प्रियंका के बारे में फैसला तो कांग्रेस को करना है.

आरजेडी के 21वें स्थापना दिवस समारोह के बाद लालू यादव की तरफ से प्रियंका के नाम को उछाल दिया गया है. लालू का कहना है कि अगर अखिलेश, मायावती, केजरीवाल, रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी एक साथ मिल कर चुनाव लड़ें तो 2019 में बीजेपी का सपना महज सपना बनकर ही रह जाएगा.

lalu yadav

लालू के इस बयान में प्रियंका का जिक्र किया गया है. यहां तक कि प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा का भी जिक्र कर दिया. लेकिन, लालू ने विपक्षी नेताओं के इस गठजोड़ में राहुल का नाम तक नहीं लिया. प्रियंका को हां और राहुल को ना कि लालू की कोशिश के बाद राहुल के नेतृत्व की क्षमता को लेकर ही सवाल खड़ा हो गया है.

राहुल गांधी इस वक्त कांग्रेस में नंबर दो की भूमिका में हैं. लेकिन, जल्द ही सोनिया गांधी की जगह उन्हें नंबर वन की भूमिका दी जाने वाली है. ऐसे में कांग्रेस की रणनीति के हिसाब से अगले लोकसभा चुनाव की अगुआई तो राहुल के ही जिम्मे होगी.

लेकिन, अब जबकि कांग्रेस के ही दोस्त लालू की तरफ से राहुल के नेतृत्व करने पर चुप्पी साध दी जाती है तो फिर इस बयान का मामला तो काफी गंभीर लग रहा है.

राष्ट्रपति चुनाव के मौके पर नीतीश और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान ने दोनों के बीच दूरी काफी बढ़ा दी है. चतुर लालू ने इस दूरी का फायदा उठाकर एक बार फिर से कांग्रेस के करीब होने की कोशिश की है. लेकिन, लगता है लालू पुरानी बातों को अभी भूल नहीं पाए हैं.

राहुल गांधी की तरफ से नीतीश की तरफदारी और लालू के उपर नीतीश का राहुल की नजर में भारी पड़ना अभी तक लालू को अखर रहा है. वो राहुल गांधी ही थे जिन्होंने महागठबंधन के वक्त लालू यादव से ज्यादा नीतीश को आगे करने का फैसला किया था.

खैर, माजरा जो भी हो, लालू का प्रियंका को लेकर दिया गया बयान विपक्ष की उलझन को ही और आगे दिखा रहा है. विपक्ष की तरफ से ना कोई एजेंडा बन पा रहा है और ना ही कोई एक सर्वमान्य चेहरा. तो बगैर चेहरे के मोदी के चेहरे के सामने विपक्ष की एजेंडाविहीन एकता कितनी देर टिक पाएगी.

बिहार के भीतर महागठबंधन की खींचतान जारी है. फिर भी, महागठबंधन के बीच की उलझन को दरकिनार कर लालू यूपी में ऐसे ही महागठबंधन की वकालत कर रहे हैं. उन्हें लगता है अखिलेश और मायावती एक हो गए तो बीजेपी के लिए मैच ओवर हो जाएगा.

लेकिन, लालू को ये भी याद रखना होगा कि राजनीति में एक और एक हमेशा ग्यारह नहीं होता.

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