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राष्ट्रपति चुनाव 2017: यूपी और उत्तराखंड की जीत से एनडीए का पलड़ा भारी

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए चल रही राजनीति के पर्दे के पीछे की कहानी क्या है

Amitabh Tiwari | Published On: May 06, 2017 02:34 PM IST | Updated On: May 06, 2017 02:34 PM IST

राष्ट्रपति चुनाव 2017: यूपी और उत्तराखंड की जीत से एनडीए का पलड़ा भारी

संपादकीय नोट: तीन कड़ियों की इस श्रृंखला में फ़र्स्टपोस्ट पर पढ़िए कि देश के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है, सीट और वोट के मामले में सियासी पार्टियों की स्थिति क्या है और क्या विपक्ष एकजुट होकर जोर लगाएं तो क्या राष्ट्रपति के चुनाव में वह बीजेपी के उम्मीदवार को हरा सकता है. पहली कड़ी में हमने राष्ट्रपति चुनने की प्रक्रिया के बारे में पढ़ा और यह भी जाना कि कैसे इस प्रक्रिया में केंद्र और राज्यों को बराबरी की अहमियत दी गई है. आइए, इस कड़ी में पढ़ते हैं कि सियासी दलों के किस गुट के पास कितने वोट हैं और किन दलों का राष्ट्रपति चुनाव में पलड़ा भारी रहने वाला है.

राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल के जरिए होता है और इस निर्वाचक मंडल में लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभा के सदस्य शामिल होते हैं. देखते हैं कि इन तीनों वर्गों में किस पार्टी को कितने वोट हासिल हैं.

लोकसभा के सदस्य

लोकसभा में 543 सदस्य हैं. इसमें दो सीट (अनंतनाग और गुरदासपुर) खाली है. बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) के 336 सदस्य हैं और उसे लोकसभा में बहुमत हासिल है. कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यूपीए) के 49 सांसद हैं और बीजेपी-विरोधी पार्टियों के सदस्यों की संख्या 85 है. लोकसभा के 71 सदस्यों को तटस्थ की श्रेणी में रखा जा सकता है. ये पार्टियां हैं एआईएडीएमके, बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्रीय समिति और निर्दलीय उम्मीदवार. ये सभी न तो एनडीए की तरफ हैं, न ही यूपीए की तरफ और अभी नहीं कहा जा सकता कि राष्ट्रपति के चुनाव में ये पार्टियां एनडीए की मुखालफत करेंगी.

इस मुकाम पर ध्यान रखना जरुरी है कि:

एनडीए = बीजेपी + एसएचएस + टीडीपी + एलजेएसपी + एसएडी + आरएलएसपी + एडी + एआईएनआरसी + जेकेडीपी +एनपीएफ + एनपीपी + पीएमके + एसडीएफ + एसडब्ल्यूपी

यूपीए = कांग्रेस + आईयूएमएल +आरएसपी + केसी (एम)

बीजेपी-विरोधी = एआईटीसी + सीपीएम+ वाईएसआरसीपी + एनसीपी + एसपी + बीएसपी + एएपी + आरजेडी + एआईयूडीएफ + आईएनएलडी + जेडीएस +जेडीयू + जेएमएम + एआईएमआईएम + सीपीआई + जेकेएनसी

तटस्थ = एआईएडीएमके + बीजेडी + टीआरएस + निर्दलीय

प्रत्येक सांसद के वोट का मोल 708 है, लिहाजा लोकसभा में वोट के हिसाब से विभिन्न पार्टियों या पार्टी समूहों की स्थिति कुछ इस प्रकार की रह सकती है

खेमावोटों का मोललोकसभा में कुल वोट (प्रतिशत मात्रा में)
एमडीए237,88862.10
यूपीए34,6929.10
बीजेपी-विरोधी60,18015.70
तटस्थ50,26813.10
कुल383,028100.00

स्रोत: Politicalbaba.com

जैसा कि ऊपर की तालिका से जाहिर है एनडीए खेमा वोटों के मामले में सबसे आगे है. इस खेमे के पास 2.38 लाख वोट हैं और लोकसभा के कुल वोटों में इस खेमे को 62 फीसद वोट हासिल हैं. अगर यूपीए और बीजेपी विरोधी पार्टियों के वोटों को एक साथ जोड़ दें तो भी एनडीए खेमे का वोट 2.5 गुना ज्यादा बैठता है.

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राज्यसभा के सदस्य

राज्यसभा में फिलहाल 243 सदस्य हैं. इनमें 12 सदस्य मनोनीत हैं और इस वजह से राष्ट्रपति के चुनाव में उन्हें वोट डालने की अनुमति नहीं है. राज्यसभा के शेष 231 सदस्यों में एनडीए के 70, यूपीए के 65, बीजेपी विरोधी खेमे के 67 सदस्य हैं जबकि तटस्थ सदस्यों की संख्या 29 है. एनडीए राज्यसभा में अल्पमत में है.

अगर हम यह मान भी लें कि सभी तटस्थ सदस्य एनडीए के उम्मीदवार को वोट करेंगे तब भी यूपीए और बीजेपी विरोधी खेमे के सदस्यों की संख्या ज्यादा (31 सदस्य) है. इस साल जुलाई या अगस्त में राज्यसभा के 10 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. इनका कार्यकाल संभवतया राष्ट्रपति के चुनाव के तुरंत बाद खत्म होगा. इस वजह से इनके रिटायर होने के कोई असर राष्ट्रपति पद के चुनाव में नहीं पड़ने वाला.

जहां तक राष्ट्रपति के चुनाव में राज्यसभा के सदस्यों को हासिल वोटों की कीमत का सवाल है, प्रत्येक सांसद को यहां भी लोकसभा की तरह 708 वोट हासिल हैं और वोटों के कुल मोल के हिसाब से राज्यसभा में स्थिति कुछ यों नजर आ रही है.

खेमावोटों का मोललोकसभा में कुल वोट(प्रतिशत मात्रा में)
एनडीए49,56062.10
यूपीए46,0209.10
बीजेपी-विरोधी47,43615.70
तटस्थ20,53213.10
कुल163,548100.00

स्रोत: Politicalbaba.com

एनडीए हालांकि कि 49 हजार या कह लें 30 फीसद वोटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन राज्यसभा में बीजेपी-विरोधी पार्टियां बहुमत हैं. लेकिन इस बात की काट यह है कि लोकसभा के कुल वोट राज्यसभा से 2.35 गुना ज्यादा हैं.

अगर एक साथ जोड़कर देखें तो एनडीए संसद के दोनों सदन(लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचकों के बीच 53 फीसद वोटों के साथ सबसे आगे है.

खेमावोटों का कुल मूल्यलोकसभा के कुल वोट(प्रतिशत मात्रा में)
एनडीए287,44852.6
यूपीए80,71214.8
बीजेपी-विरोधी107,61619.7
तटस्थ70,80013.0
कुल546,576100.00

स्रोत: Politicalbaba.com

विधानसभाओं के सदस्य

जैसा कि लेखमाला की पहली किश्त में बताया जा चुका है, विधायक के वोटों का मोल सांसदों के वोटों के मोल की तरह तयशुदा नहीं होता. अगर दिल्ली और पडुचुरी जैसे संघशासित प्रदेशों को मिलाकर देखें तो राज्यों की संख्या 31 होती है और इन 31 राज्यों के विधायकों की कुल संख्या 4120 है. फिलहाल 4 सीट खाली हैं और इनकी गणना 4120 में शामिल नहीं है. हाल के विधानसभा चुनावों खासकर उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में मिली जीत से बीजेपी/एनडीए खेमे को बड़ी ताकत मिली है.

फिलहाल देश में विधायकों की सबसे बड़ी संख्या एनडीए के पास है. एनडीए के कुल 1804 विधायक हैं और यह विधायकों की कुल संख्या का 44 प्रतिशत है. यूपीए और बीजेपी-विरोधी खेमे को एक साथ मिलाकर देखें तो इन दोनों के पास एनडीए की तुलना में थोड़े से ही विधायक ज्यादा( कुल 1874 यानी 45.5 प्रतिशत) हैं. तटस्थ पार्टियों के पास 438 सदस्य हैं.

जैसा कि फर्स्टपोस्ट पर प्रकाशित हो रही लेखमाला की पहली किश्त में बताया गया है, विधायकों के वोट का मोल एक फार्मूले से निर्धारित होता है और इस फार्मूले में राज्य की आबादी के हिसाब से विधायक के वोट के मोल की गणना की जाती है. विधायक के वोट का मोल सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश में है. यहां एक विधायक के वोट का मोल 208 है, इसके बाद तमिलनाडु और झारखंड का नंबर है जहां प्रत्येक विधायक के वोट का मोल 176 है. महाराष्ट्र में एक विधायक के वोट का मोल 175 है जबकि बिहार में 173. बीजेपी इनमें तीन राज्यों में सत्ता में है. विधायक के वोट के मोल का औसत निकालें तो यह 134 आता है. तमिलनाडु में फिलहास एआईएडीएमके सत्ता में है और पार्टी में जारी नेतृत्व के संघर्ष के कारण उसने अपने को तटस्थ बना रखा है.

राष्ट्रपति के चुनाव में विधायकों के वोट के मोल के हिसाब से स्थिति कुछ यों रहने वाली है.

खेमावोटों का मोललोकसभा के कुल वोट(प्रतिशत मात्रा में)
एनडीए239,92343.7
यूपीए93,13717.0
बीजेपी विरोधी152,77627.8
तटस्थ63,10711.5
कुल548,943100

स्रोत: www.politicalbaba.com

यहां भी एनडीए मजबूत हालत में है, उसके विधायकों के वोटों का मोल 2.4 लाख है और यह कुल विधायकों के वोटों के मोल का 44 प्रतिशत है. यूपीए और बीजेपी-विरोधी पार्टियों के विधायकों के वोट एक साथ मिला दें तो इस खेमे को राज्यों की विधानसभा में एनडीए से थोड़े से ही ज्यादा वोट ( कुल 2.45 लाख) हासिल हैं. यह राज्यों की विधानसभा में जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी के अनुकूल ही है.

खेमालोकसभाराज्यसभाराज्य विधानसभाकुल योगकुल योग का प्रतिशत
एनडीए237,88849,560239,923527,37148.10%
यूपीए34,69246,02093,137173,84915.90%
बीजेपी विरोधी60,18047,436152,776260,39223.80%
तटस्थ50,26820,53263,107133,90712.20%
कुल383,028163,548548,9431,095,5191,095,519

 

फिलहाल राष्ट्रपति के चुनाव के निर्वाचक मंडल में वोटों के मामले में एनडीए को बढ़त हासिल है. एनडीए के 5,27 लाख वोट हैं और यूपीए 1.74 लाख वोट पीछे है. अगर बीजेपी विरोधी पार्टियों और यूपीए के वोट एक साथ जोड़ दें तो भी एनडीए 93 हजार वोटों से आगे दिखता है. जिन पार्टियों ने तटस्थ रुख अपनाया है जैसे बीजेडी, टीआरएस, एआईएडीएमके तथा निर्दलीय, वे राष्ट्रपति के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभायेंगे.

कुल मिलाकर देखें तो एनडीए राष्ट्रपति के चुनावी मुकाबले में बाकियों से बहुत आगे है क्योंकि 2014 की प्रभावशाली जीत के बाद उसने हाल के विधानसभाई चुनावों में एक बार फिर से भारी-भरकम जीत हासिल की है. यूपीए और बीजेपी विरोधी खेमा फिलहाल राष्ट्रपति के चुनावी मुकाबले में एनडीए से 8.5 फीसद वोटों से पीछे है. सारा दारोमदार तटस्थ पार्टियों और निर्दलीय सांसद और विधायकों पर है, वे जिसे चाहेंगे उसी खेमे का उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव में विजयी होगा.

लेखमाला की अगली किश्त में फर्स्टपोस्ट पर पढ़िए कि राष्ट्रपति के चुनाव के लिए चल रही राजनीति के पर्दे के पीछे की कहानी क्या है, अगली किश्त के साथ इस लेखमाला का समापन होगा. समापनी किश्त में चर्चा होगी कि विपक्षी दलों की एकजुटता की राजनीति क्या अपना वजूद बचाने की कवायद है?

(यह लेख यह मानकर लिखा गया है कि सांसद और विधायक उसी उम्मीदवार को वोट करेंगे जिसे उनकी पार्टी ने समर्थन दिया होगा, पाला बदलकर वोट डालने जैसा वाकया पेश नहीं आएगा)

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