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रामनाथ कोविंद की बड़े अंतर से जीत विपक्ष के बिखराव का एक और सबूत

उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी हश्र यही होने वाला है. संख्या बल साथ नहीं है, फिर भी विपक्ष विरोध के नाम पर विरोध कर रहा है

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 21, 2017 08:38 AM IST

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रामनाथ कोविंद की बड़े अंतर से जीत विपक्ष के बिखराव का एक और सबूत

रामनाथ कोविंद लगभग 66 फीसदी मतों के साथ अब राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर चुके हैं. उनके मुकाबले विपक्ष की साझा उम्मीदवार मीरा कुमार को महज 35 फीसदी के करीब मतों से ही संतोष करना पड़ा है. ये आंकड़ा ही बीजेपी की रणनीतिक सफलता और विपक्ष के पराभव की कहानी बयां करने के लिए काफी है.

राष्ट्रपति चुनाव के वक्त विपक्ष ने जोर-शोर से एनडीए के खिलाफ साझा उम्मीदवार को खड़ा किया था. कोशिश इस बात की थी कि बीजेपी को कड़ी टक्कर दी जाए. लेकिन, जीत के अंतर ने साबित कर दिया कि विपक्ष के खेमे में राष्ट्रपति चुनाव ने दरार और बढ़ा ही दिया है.

राष्ट्रपति चुनाव शुरू होने के वक्त एनडीए के वोटों का गणित 50 फीसदी से भी कम था, लेकिन, चुनाव के वक्त तक ये आंकडा 66 फीसदी तक पहुंच गया है. एनडीए के अलावा एआईएडीएमके, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस से लेकर कई दूसरे दलों ने भी कोविंद का समर्थन कर दिया था.

लेकिन, विपक्ष के लिए सबसे बड़ा झटका जेडीयू के कोविंद के साथ जाने से लगा. नीतीश कुमार के इस दांव ने विपक्ष की एकता को उस वक्त ही तार-तार कर दिया था. फिर बीजेडी के भी साथ आने के बाद से कोविंद का पलड़ा काफी भारी हो गया था.

ramnath kovind

लेकिन, क्रॉस वोटिंग ने रामनाथ कोविंद के पक्ष में समर्थन को 66 फीसदी के पास पहुंचा दिया. अंतरात्मा की आवाज पर अपने पक्ष में वोट देने की अपील मीरा कुमार ने की थी. लेकिन, अंतरात्मा की आवाज का फायदा रामनाथ कोविंद को मिल गया.

गुजरात से भी क्रास वोटिंग की खबर आई जहां रामनाथ कोविंद के पक्ष में 132 और मीरा कुमार के पक्ष में 49 विधायकों ने वोटिंग की. माना जा रहा है रामनाथ कोविंद के पक्ष में करीब दस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है. बीजेपी शासित राज्य गोवा से भी क्रॉस वोटिंग की खबर है.

रामनाथ कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग दक्षिण में आन्ध्र से लेकर उत्तर पूर्व में त्रिपुरा तक हुई है. बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोले बैठीं ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 6 विधायकों ने खुलेआम बगावत कर कोविंद के पक्ष में वोटिंग की है.

समाजवादी कुनबे में बिखराव पहले से ही है. मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव गुट की तरफ से क्रॉस वोटिंग की खबर पहले ही थी.

कुछ इसी तरह की खबरें कई दूसरे राज्यों से आईं हैं जिनसे साफ हो जाता है कि क्रास वोटिंग हुई है, अंतरात्मा की आवाज पर वोट पड़े हैं. लेकिन, ये वोट विपक्षी एकता की दुहाई देने वाले दलों को अंदर तक हिलाने वाले हैं.

राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना के बाद जो तस्वीर निकल कर सामने आ रही है, उसने बीजेपी को और मजबूत बना दिया है. देश भर में अपने जनाधार के विस्तार को लेकर चलाई जा रही नीति को बीजेपी एक और आशा की किरण के तौर पर देख रही है.

इस वक्त राष्ट्रपति चुनाव के ही बहाने सही कई दल और कई विधायक करीब आ गए हैं. उसकी स्वीकार्यता उत्तर-पूर्व से लेकर दक्षिण तक, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक दिख बढ़ रही है. पहली बार बीजेपी के बैकग्राउंड का कोई व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हो रहा है.

SONIA GANDHI

लेकिन, पहले से बिखरा पड़ा कमजोर विपक्ष हतोत्साहित होता दिख रहा है. कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने संविधान पर खतरे की बात कहकर विरोध को जरूरी बताया था. सोनिया की तमाम कोशिशों के बावजूद उनके कुनबे में हुई क्रॉस वोटिंग ने उनकी लड़ाई की कोशिश को कमजोर बना दिया है.

उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी हश्र यही होने वाला है. संख्या बल साथ नहीं है, फिर भी विपक्ष विरोध के नाम पर विरोध कर रहा है. हालाकि इस बार थोड़ी राहत जरूर मिलेगी क्योंकि जेडीयू के साथ-साथ बीजेडी ने भी विपक्ष के साथ खड़ा होने का फैसला किया है. लेकिन, ये राहत भी विपक्ष के लिए शायद ही कोई बड़ी राहत लेकर आए.

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