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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार दौरा : बाढ़ से बेहाल लोगों को कितनी राहत दे पाएगी ?

प्रधानमंत्री ने 500 करोड़ रुपए की सहायता की घोषणा की है. उन्होंने बाढ़ से हुए भारी नुकसान के आकलन के लिए केंद्र से एक टीम भी भेजने को कहा

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 26, 2017 05:31 PM IST

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार दौरा : बाढ़ से बेहाल लोगों को कितनी राहत दे पाएगी ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर 500 करोड़ रुपए की सहायता राशि को तुरंत देने की घोषणा कर दी. बिहार पहुंचे प्रधानमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया. हवाई सर्वेक्षण के दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी मौजूद रहे.

पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जिलों का हवाई सर्वेक्षण पूरा होने के बाद पूर्णिया में ही प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राहत और पुनर्वास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की. इस दौरान बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा भी लिया गया.

बाढ़ पीड़ितों के लिए 500 करोड़ की मदद का एलान

समीक्षा बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने बिहार को संकट की इस घड़ी में हर संभव मदद का भरोसा दिया. हालांकि प्रधानमंत्री ने 500 करोड़ रुपए की तो तुरंत सहायता की घोषणा कर दी. उन्होंने बाढ़ से हुए भारी नुकसान के आकलन के लिए जल्द ही केंद्र से एक टीम भेजने को भी कहा.

प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी. इस साल आई भयानक बाढ़ से बिहार में अब तक 418 लोगों की जान जा चुकी है.

बाढ़ से बेहाल बिहार के 19 जिले इस वक्त बेहाल हैं. फसलें बर्बाद हो चुकी हैं. सड़क टूट गई है. सबकुछ जलमग्न हो चुका है. लगभग 1.62 करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार भी केंद्र की ओर टकटकी लगाकर देख रही है.

Flood Ariel Survey in Bihar

विनाशकारी बाढ़ की चपेट में बिहार के 19 जिले हैं (फोटो : पीटीआई)

ऐसे में बिहार के लोगों को प्रधानमंत्री के इस दौरे से काफी उम्मीद बढ़ गई है. बिहार में एनडीए की सरकार बन गई है. 27 साल बाद ऐसा संयोग बना है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी या गठबंधन की सरकार है. केंद्र में मोदी तो बिहार में नीतीश की सरकार से लोगों को उम्मीद इसीलिए ज्यादा बढ़ गई है.

प्रधानमंत्री मोदी के साथ हवाई सर्वेक्षण के दौरान नीतीश कुमार लगातार उनसे बाढ़ की विभीषिका के बारे में चर्चा करते रहे. बताने की कोशिश कर रहे थे कि बिहार की आपदा से निपटने के लिए केंद्र की भारी मदद की दरकार है.

हवाई सर्वे पूरा होते ही प्रधानमंत्री की तरफ से तात्कालिक राहत के तौर पर 500 करोड़ रुपए की रकम देने को कहा गया. साथ ही बाढ़ के हालात से चिंतित प्रधानमंत्री ने जल्दी ही केंद्र से एक टीम भेजने को भी कहा है. इस टीम के आकलन के बाद सहायता राशि और बढ़ाई जा सकती है.

नमो-नीतीश की जोड़ी से बिहार को बड़ी उम्मीद

नमो-नीतीश की जोड़ी से बिहार के लोगों को केवल तात्कालिक बाढ़ से ही राहत की उम्मीद नहीं है. उनसे उम्मीद है बिहार की हर साल की बर्बादी पर रोक लगाने की. उम्मीद है बाढ़ की त्रासदी से निपटने को लेकर कोई ठोस पहल होगी और स्थायी हल निकलेगा जिससे हर साल बाढ़ की कहानी ना दोहराई जाए.

बिहार का यह दुर्भाग्य ही रहा है कि केंद्र और राज्य में काफी लंबे वक्त से एक ही पार्टी की सरकारें नहीं रह पाई हैं. केंद्र से मिलने वाली मदद और विकास के काम भी राजनीति और राजनीतिक बयानबाजी के बीच उलझकर रह गए हैं. लेकिन, अब दोनों जगह एनडीए सरकार होने के बाद माना जा रहा है कि बिहार पिछड़ेपन के दौर से बाहर निकल कर विकास की पटरी पर फिर से दौड़ेगा.

2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त नरेंद्र मोदी की तरफ से किए गए वादे के पूरा होने का वक्त आ गया है. भूल सुधार के बाद नीतीश कुमार भी फिर से सुशासन बाबू की अपनी छवि को लेकर सतर्क हैं. नीतीश भी समझते हैं कि आलोचकों को अपने काम से ही चुप कराना होगा.

शायद यही वजह है कि नीतीश कुमार पर जनादेश के अपमान का आरोप लगाने वाली आरजेडी की पटना रैली से ठीक एक दिन पहले ही बाढ़ से प्रभावित लोगों का हाल पूछने खुद प्रधानमंत्री पहुंच गए. प्रधानमंत्री ने बिहार पहुंचकर बाढ़ से बेहाल लोगों के दर्द पर मरहम लगाने की कोशिश की.

बिहार की लगभग डेढ़ करोड़ की आबादी बाढ़ से प्रभावित है (फोटो : पीटीआई)

बिहार की लगभग डेढ़ करोड़ की आबादी बाढ़ से प्रभावित है (फोटो : पीटीआई)

नमो-नीतीश की लालू को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश

लालू यादव की ‘देश बचाओ, बीजेपी भगाओ’ रैली के ठीक एक दिन पहले ही नमो-नीतीश बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत पहुंचाने की कोशिश कर लालू को ही कठघड़े में खड़ा करना चाहते हैं. संदेश देने की कोशिश है कि हम तो बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगे हैं, लेकिन, लालू की तो अपनी फिक्र है, वो तो बस हमेशा की तरह रैली करने में लगे हैं.

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