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बैठकों से लालू को क्या होगा फायदा? जब जोड़ीदार ही चुप हैं

बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद नीतीश कुमार पर दबाव बढ़ गया है

FP Staff Updated On: Jul 09, 2017 10:45 PM IST

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बैठकों से लालू को क्या होगा फायदा? जब जोड़ीदार ही चुप हैं

बेनामी संपत्ति और भ्रष्टाचार को लेकर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिजनों के ठिकानों पर जांच एजेंसियों की ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने इस मसले पर अब तक चुप्पी साध रखी है और मंगलवार को पार्टी के विधायकों व सांसदों की अहम बैठक होने जा रही है. इस बीच जदयू ने कहा है कि खराब सेहत की वजह से नीतीश कुमार सोमवार को होनेवाले लोकसंवाद सहित कई कार्यक्रमों में शिरकत नहीं करेंगे. बताया जा रहा कि नीतीश ने सोमवार के सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं.

नीतीश कुमार पर दबाव

वहीं, लालू प्रसाद यादव भी सोमवार को राजद नेताओं की सोमवार सुबह मीटिंग करने जा रहे हैं. ऐसे में सभी सियासी पंडितों की नजर इन दोनों बैठकों पर जा टिकी है.

जानकारों का मानना है कि बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद नीतीश कुमार पर दबाव बढ़ गया है. वैसे इसकी संभावना कम ही है कि नीतीश कुमार खुद तेजस्वी यादव को इस्तीफा देने को कहें. ऐसे में बीजेपी और अन्य पार्टियां लगातार राजद पर हमला कर रही है. साथ ही ये दल नीतीश कुमार से भी तेजस्वी के इस्तीफे की डिमांड कर रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि लालू प्रसाद यादव मोदी सरकार के खिलाफ इसी साल अगस्त में पटना में महारैली करने जा रहे हैं. इस रैली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मायावती, अरविंद केजरीवाल सहित कई सियासी दिग्गजों के आने की संभावना है. हालांकि, नीतीश के शामिल होने पर अभी तक संशय है. ऐसे में सीबीआई की छापेमारी और नीतीश की चुप्पी से इस रैली की कामयाबी संदिग्ध हो गई है.

लालू को मिला कांग्रेस का साथ

वैसे, कांग्रेस ने साफ किया है कि इस मसले पर वह लालू प्रसाद यादव के साथ है. बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक चौधरी, मंत्री अवधेश सिंह और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह ने राजद नेता के साथ बंद कमरे में बैठक की और घोषणा की कि कांग्रेस उनके साथ है.

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को भयभीत करने की साजिश रच रही है. केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी से लड़ाई में वे उनके साथ हैं.

नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार में शिक्षा मंत्री चौधरी ने कहा, 'कांग्रेस लालू प्रसाद और राजद के साथ है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली सरकार धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को भयभीत करने की साजिश रच रही है. हम मोदी सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं? हम बीजेपी से लड़ाई के लिए तैयार हैं.'

'अमित शाह कौन हैं?'

चौधरी ने कहा, 'अमित शाह (बीजेपी प्रमुख) कौन हैं? वह हत्याओं के मामले में जेल जा चुके हैं, उन्हें हाईकोर्ट ने एक बार गुजरात से बाहर करवा दिया था, लेकिन अब शक्तिशाली हो गए हैं और सीबीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम उनके कारनामों का जनता के सामने पर्दाफाश करेंगे.'

वहीं, सदानंद ने कहा, 'हम लालू के साथ हैं. हम बीजेपी की साजिश को समझते हैं.'

दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद व राबड़ी देवी के आधिकारिक आवास और अन्य स्थानों पर सीबीआई के छापे पड़ने पर अभी तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है. इसी तरह, जदयू के प्रवक्ता भी इस समय मीडिया से दूरी रख रहे हैं और छापेमारी पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं.

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