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बिहार: कहीं नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज दबा तो नहीं रहे

नीतीश कुमार गोलमोल रवैया अपनाकर किसी भी बड़े फैसले से बचना चाहते हैं?

Vivek Anand Vivek Anand Updated On: Jul 26, 2017 09:03 AM IST

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बिहार: कहीं नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज दबा तो नहीं रहे

बिहार की सियासी परिस्थितियां सास बहू के फैमिली ड्रामे जैसी हो गई है. हर गुजरते दिन के बाद ये सस्पेंस बढ़ता ही जा रहा है कि बिहार की सरकार का क्या होगा...सवाल ही सवाल कौंधते हैं. मसलन बिहार सरकार रहेगी या जाएगी, क्या तेजस्वी यादव इस्तीफा देंगे या फिर नीतीश कुमार को कुर्बानी देनी होगी या कि सीन में किसी तीसरी थ्योरी की गुंजाइश है.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने दिल्ली आए थे तो उनसे इन सवालों के जवाब पूछे जाने लाजिमी थे. लेकिन नीतीश कुमार ने किसी सीरियल के क्रिएटिव डायरेक्टर की तरह जवाब के नाम पर मीडिया को गोलमोल घुमा दिया.

नीतीश कुमार से जब महागठबंधन के भविष्य पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि जेडीयू और आरजेडी का महागठबंधन कैसा चल रहा है ये आपलोग देख ही रहे हैं. यानी मीडिया के सामने उन्होंने कयास लगाने का ऑप्शन खुला छोड़ दिया. उन्होंने अपनी तरफ से कुछ नहीं कहा.

दूसरों के कयासों पर है महागठबंधन का 'भविष्य'

नीतीश कुमार का कहने का मतलब है कि आप खुद ही आकलन कीजिए कि बिहार में महागठबंधन की सरकार कैसी चल रही है. जिन्हें लगता है कि बिहार में महागठबंधन की सरकार टूट की ओर बढ़ रही है वो अपने आकलन में खुश रहें और जिन्हें लगता है कि अपनी-अपनी मजबूरियों में बंधे नीतीश और लालू बिहार की सरकार बचा ले जाएंगे वो अपनी सियासी समझ को सही समझते रहें.

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बिहार में महागठबंधन को लेकर नीतीश कुमार ने अपनी चुप्पी तो तोड़ी लेकिन जवाब नहीं दिया. लेकिन अब सवाल ये उठता है कि ऐसे गोलमोल जवाब देकर नीतीश कुमार आखिरी वक्त तक दोस्ती की लाज बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं या फिर वो खुद कंफ्यूज हो गए हैं कि अब किया क्या जाए.

तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर अब तक नीतीश कुमार भले ही नहीं बोल रहे थे लेकिन जेडीयू के नेताओं-प्रवक्ताओं की फौज अपने तीखे शब्दबाणों की लगातार बारिश कर रही थी. नीतीश कुमार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का हवाला देकर किसी भी तरह का समझौता न किए जाने की बात हो रही थी.

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दिल्ली में मीडिया के सवालों के जवाब में नीतीश कुमार चाहते तो एक लाइन में अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति की बात कहके अप्रत्यक्ष तौर पर ही माकूल जवाब दे सकते थे. लेकिन उन्होंने सवाल के जवाब में आप देख ही रहे हैं जैसा जुमला चुनकर खुद को सेफ कर गए.

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मतलब कोशिशें जारी हैं

दिल्ली में सोनिया और तेजस्वी की मुलाकात के बाद शायद बिहार की सियासी परिस्थितियां थोड़ी और बदली है. सोमवार को बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. बंद कमरे में हुई बात बाहर तो नहीं आई लेकिन दूसरे दिन नीतीश कुमार का महागठबंधन पर गोलमोल जवाब जरूर आ गया.

इसे संकेत के बतौर समझा जा सकता है कि बिहार की महागठबंधन सरकार को बचाने की कोशिशें अभी खत्म नहीं हुई है. खबर ये भी है कि अपने दिल्ली प्रवास के दौरान नीतीश कुमार सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं. कांग्रेस जीतोड़ कोशिश में लगी है कि बिहार की महागठबंधन सरकार को किसी तरह से बचा लिया जाए और इस लिहाज से नीतीश-सोनिया की मुलाकात अहम हो सकती है.

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भ्रष्टाचार पर नीतीश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति के अतिप्रचार के बाद भी अगर तेजस्वी यादव सरकार में बने रहे और सरकार भी चलती रहे ये नीतीश कुमार के अपने ही कमिटमेंट से यू टर्न होगा. अपनी छवि के साथ किसी भी तरह का समझौता न किए जाने के कमिटमेंट को तोड़ना इतना आसान भी नहीं है. लेकिन राजनीति में संभावनाएं कभी खत्म नहीं होती और सियासी पंडितों की भविष्यवाणियां भी अक्सर गलत साबित होती रही हैं.

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तस्वीर: तेजस्वी यादव के फेसबुक से

नीतीश का रवैया क्या महागठबंधन को बचाएगा?

28 जुलाई से बिहार असेंबली का सेशन शुरू हो रहा है. पटना में पत्रकारों के बीच सियासी हलचल भांपने की होड़ लगी है. सीएम नीतीश कुमार से सवाल पूछा गया कि वो अपने बगल में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के साथ कैसे सहज होंगे. नीतीश कुमार ने मजाकिया लहजे में मुस्कुराते हुए कहा कि आप लोग सहज रहिए. सरकार को कोई खतरा नहीं है.

बिहार में असेंबली सेशन शुरू होने से पहले महागठबंधन में शामिल तीनों दल ने अलग-अलग मीटिंग बुलाई है. कांग्रेस अपने विधायकों के साथ अलग बैठक कर रही है. आरजेडी अपने एमएलए के साथ अलग बैठक में कमर कसने वाली है. जेडीयू ने अपने विधायकों की बैठक 26 जुलाई को बुलाई है. महागठबंधन की विधानमंडल की बैठक के बारे में अभी कुछ तय नहीं है.

नीतीश कुमार पटना लौटने पर अपने पार्टी के नेताओं से मुलाकात करेंगे. बिहार जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को पटना में ही रहने को कहा गया है. नीतीश कुमार फैसला लेंगे. लेकिन उसके पहले वो चाहते हैं कि सोनिया गांधी भी फैसला ले ले और लालू यादव भी. फिलहाल सस्पेंस बरकरार है.

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