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नीतीश कुमार अपने सिद्धांतों से समझौते के मूड में नहीं?

कई बार अपने अलग स्टैंड से नीतीश ने साफ कर दिया है कि वो किसी के पीछे-पीछे चलने वाले लोगों में से नहीं हैं

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 03, 2017 03:26 PM IST

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नीतीश कुमार अपने सिद्धांतों से समझौते के मूड में नहीं?

जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार कांग्रेस के उपर हमलावर हैं. इशारों -इशारों में नीतीश कांग्रेस और आरजेडी दोनों पर हमला कर रहे हैं. लेकिन, निशाने पर सबसे ज्यादा कांग्रेस है.

बिहार में जेडीयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब नीतीश ने विपक्षी  एकता तार-तार करने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा दिया.

नीतीश का कहना था कि केवल एकता दिखाने के लिए विपक्ष को साथ होने की जरूरत नहीं है. बल्कि विपक्ष को एक सामूहिक और वैकल्पिक एजेंंडे पर आगे बढ़ने की जरूरत है. उनके मुताबिक, बिना किसी एजेंडे के बीजेपी सरकार को घेरने की रणनीति का कोई मतलब नहीं है.

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर नीतीश कुमार की कांग्रेस-आरजेडी के साथ मतभेद देखने को मिला था. लेकिन, उनकी तरफ से कांग्रेस को नसीहत दी जा रही है. ये नसीहत विपक्ष के एजेंडे तय करने में कांग्रेस की तरफ से की गई गलती को लेकर है.

नीतीश कुमार ने कांग्रेस को किसानों के इतने बड़े आंदोलन के बावजूद अपनी भूमिका ठीक से ना निभाने की याद दिला दी. पत्रकारों से मुखातिब नीतीश ने साफ कर दिया कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर हम उलझे रहे लेकिन, किसानों के मुद्दे पर सरकार को ठीक से घेरा नहीं जा सका.

जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिलहाल किसी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं. पटना में जेडीयू की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के मौके पर उनके निशाने पर कांग्रेस भी थी और आरजेडी भी. नीतीश ने बिहार के अपने दोनों सहयोगियों को इस मौके पर नसीहत भी दे दी.

अपनी पार्टी के नेताओं के बीच नीतीश ने साफ कर दिया कि ‘मैं किसी के पीछे-पीछे नहीं चलता, बल्कि अपनी नीतियों पर कायम रहता हूं.’ उनके इस बयान को कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के उस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोगों के कई सिद्धांत होते हैं.

कांग्रेस पर साधा सीधा निशाना 

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर नीतीश बनाम कांग्रेस और नीतीश बनाम लालू की लड़ाई शुरू हो गई थी. जिसके बाद दोनों ही पक्षों की तरफ से खूब बयानबाजी हुई थी. इसी कड़ी में अपने उपर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के हमले से नीतीश कुमार तिलमिला गए हैं.

अब नीतीश सीधे कांग्रेस के उपर अपने सिद्धांतों से भटकने की बात कहने लगे हैं. उनका आरोप है कि गांधी और नेहरू के सिद्धांत को कांग्रेस इस वक्त भूल चुकी है. इसे अपनी ही सहयोगी कांग्रेस के खिलाफ नीतीश का बड़ा हमला माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें: लालू की रैली के लिए नीतीश को आमंत्रण का इंतजार क्यों है?

विपक्षी एकता को तोड़ने का आरोप लगाने पर नीतीश ने तो अब खुद कांग्रेस को ही इसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार ठहरा दिया. उन्होंने असम से लेकर यूपी तक हर विधानसभा चुनाव में विपक्ष की एकता को तार-तार करने के लिए कांग्रेस को निशाने पर लिया.

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी नीतीश ने पूरे विपक्ष को भरोसे में नहीं लिए जाने का आरोप कांग्रेस पर मढ़ दिया.

Nitish Kumar

आरजेडी के लिए भी चेतावनी 

अपनी नीतियों से समझौता नहीं करने की बात कर नीतीश कुमार ने कांग्रेस के साथ-साथ आरजेडी को भी चेतावनी दी है. चेतावनी लालू के लिए भी है, क्योंकि उनके दोनों बेटे और परिवार के बाकी सदस्य इस वक्त भ्रष्टाचार के आरोप से दागदार हो रहे हैं.

इनकम टैक्स की तरफ से हो रही कारवाई की आंच लालू के परिवार तक पहुंच रही है. अगर इस मामले में चार्जशीट दाखिल होती है तो लालू के बेटे और अपनी सरकार में मंत्री के खिलाफ नीतीश क्या कदम उठाएंगे इसको लेकर अभी से ही अटकलें लग रही हैं.

लेकिन, अपनी नीतियों से समझौता नहीं करने की बात कह कर  नीतीश ने लालू और उनके परिवार की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं.

नीतीश को फिलहाल इस बात की तनिक भी चिंता नहीं दिख रही है कि आरजेडी और कांग्रेस के ही भरोसे वो अपनी सरकार चला रहे हैं. यानी अपने सम्मान की चिंता की खातिर वो अपने सरकार की चिंता को भी तिलांजलि दे रहे हैं.

कहां जाकर थमेगी महागठबंधन की उलझन 

Nitish Kumar

सवाल है कि महागठबंधन के भीतर की उलझन आखिर कहां जाकर थमेगी. पहले नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक और फिर राष्ट्रपति चुनाव के वक्त अपने अलग स्टैंड से नीतीश ने साफ भी कर दिया है कि वो किसी के पीछे-पीछे चलने वाले लोगों में से नहीं हैं.

अभी इतनी जल्दी गठबंधन के भीतर की आग शांत होने वाली नहीं है. 27 अगस्त को पटना में आरजेडी की तरफ से 'भाजपा हटाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित हो रही है जिसमें देश भर के विपक्षी नेताओं को बुलाया गया है.

नीतीश कुमार ने भी साफ कर दिया है कि उन्हें इस रैली के लिए अनौपचारिक न्योता मिल गया है. लेकिन, औपचारिक बुलावे का इंतजार है. उनकी तरफ से इस रैली में शामिल होने का सिग्नल दिया जा रहा है.

एक बार फिर से नीतीश कुमार ने 2019 की दावेदारी से अपने-आप को पूरी तरह से अलग कर लिया है. लेकिन, इस दांव से भी नीतीश ने कांग्रेस के उपर ही दबाव बढ़ाया है कि मुख्य विपक्षी दल आप हैं. लिहाजा, एजेंडा आप को ही तय करना पड़ेगा, नेतृत्व आपको ही तय करना पड़ेगा लेकिन, सभी विपक्षी दलों को भरोसे में लेकर.

 

 

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