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नीतीश के प्रयोग गांधी नहीं प्रधानमंत्री बनने के लिए किए जा रहे हैं

70 के दशक की शुरुआत में ही नीतीश कुमार ने एक कलमकार से पटना काफी हाउस में गंभीरता से कहा था कि ‘एक दिन मैं बिहार का सीएम बनूंगा’

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari | Published On: Apr 20, 2017 07:06 PM IST | Updated On: Apr 20, 2017 08:03 PM IST

नीतीश के प्रयोग गांधी नहीं प्रधानमंत्री बनने के लिए किए जा रहे हैं

वाक्या 1995 का है, तब नीतीश कुमार बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के सांसद हुआ करते थे. रात्रि के बेला में लालचंद महतो विधायक के सरकारी आवास पर अचानक उनसे मुलाकात हो गई.

चंद्रगुप्त बनने की तैयारी और रणनीति उन्होंने शुरू कर दी थी. स्वभाविक है चाणक्य की भूमिका निभा रहे कुशल राजनीतिक रणनीतिकार जॉर्ज फर्नांडीस का भी उस समय उनके साथ होना. उनका ब्रम्ह वाक्य ‘10 वर्षों के भीतर मैं लालू यादव को पाटलिपुत्र की गद्दी से उतार दूंगा’

70 के दशक में ही नीतीश  ने सीएम बनने की भविष्यवाणी कर दी थी

आज भी उनकी कही वह बात कानों में गूंज रही है. सबके सामने है कि अपने दृढ़ संकल्प को नीतीश कुमार ने 2005 में अमली जामा पहना ही दिया. वैसे 70 के दशक की शुरुआत में ही नीतीश कुमार ने एक कलमकार से पटना काफी हाउस में गंभीरता से कहा था कि ‘एक दिन मैं बिहार का सीएम बनूंगा’

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अब 66 साल के नीतीश कुमार की गिद्ध दृष्टि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है. संभव है कि कहीं न कहीं किसी के सामने उन्होंने इस कुर्सी को हासिल करने के लिए

अवश्य ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ ली होगी.

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इसको दिमाग में रखकर देखा जाए तो ये समझना कठिन नहीं होगा कि उनके द्वारा की जा रही सारी राजनीतिक कवायतें किसलिए हैं? भविष्य के गर्भ में क्या है कोई नहीं जानता.

हो सकता है कुर्सी तक नहीं भी पहुंचे, लेकिन कोशिश करने में क्या हर्ज है. सियासी राजनीति में कुर्सी पाने की चाहत रखना पाप थोड़े ही है. लक्ष्य प्राप्ति के लिए साधक को नाना प्रकार का तिकड़म करना पड़ता है.

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महाभारत में फतह के लिए कुछ भी करना जायज है. ये महाभारत ग्रंथ के भीष्म पर्व में वर्णित है. बिहार में मनाया जा रहा चंपारण सत्याग्रह स्मृति समारोह को इसी संदर्भ में देखना लाजमी होगा. माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम देश के सबसे ताकतवर सियासी कुर्सी तक पहुंचने का एक मजबूत सीढ़ी साबित हो सकती है.

इसी बहाने देश के कोने-कोने से सैकड़ों फ्रीडम फाइटर बिहार दर्शन के लिए तशरीफ लाए और लौटते समय नीतीश कुमार का संदेश और एक डिब्बा सिलाव का नमकीन/मीठरस खाजा अपने साथ ले गए.

रैली में नारे लग रहे थे 'देश का पीएम कैसा हो नीतीश कुमार जैसा हो'

नमक खाने के बाद मनुष्य को क्या करना चाहिए इसका मुहावरा तो देश के नागरिक भलाभांति जानते हैं. 18 अप्रैल को मोतीहारी में नीतीश कुमार के नेतृत्व में पदयात्रा चल रही था तो उस समय जनता दल यू के सैकड़ों उत्साही कार्यकर्ता नारा लगा रहे थे ‘देश का पीएम कैसा हो, नीतीश कुमार जैसा हो’.

पिछले दिनों पटना में भव्य तरीके से गुरू गोबिंद सिंह जी का 350 वां जन्मदिन प्रकाश पर्व के रूप में मनाया गया. दुनिया भर के सिखों ने उस समारोह में शिरकत की.

आज भी वे लोग मुक्त कंठ से नीतीश कुमार का गुणगान कर रहे हैं. पंजाब में रोटी की खातिर काम करने वाले कई बिहारी मजदूर बताते हैं कि ‘हमारे सिख मालिक लोग उस समारोह की खातिरदारी के बाद नीतीश कुमार साहब का फैेन बन गए हैं’.

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बहरहाल, नीतीश कुमार को पीएम बनाने की मुहिम में लगी टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य का कहना है कि ‘शराबबंदी की घोषणा कुर्सी को ही ध्यान में रखकर की गई है. यह राजनीतिक हथियार काफी कारगर भी साबित हो रहा है. जंगल की आग की तरह पूरे देश में फैल रहा है.’

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बीजेपी शासित कई प्रदेश के मुख्यमंत्री भी इस मुद्दे पर नीतीश कुमार के कायल हो गए हैं. आधी आबादी तो सचमुच शराबबंदी से बहुत प्रसन्न है. नीतीश कुमार देश भर में घूम घूमकर अपने इस धारदार व ‘सफल’ हथियार का प्रयोग कर रहे हैं. नवंबर 2015 में सीएम बनने के बाद कम से कम दो दर्जन सभा कर चुके हैं.

21 अप्रैल को केरल प्रदेश के कोच्चिन शहर तथा 22 अप्रैल को मुंबई में शराब विरोधी जलसों को संबोधित करेंगे और कार्यकर्ता बैठक करेगें. उनका अगला टारगेट है बाल विवाह और दहेज प्रथा चोट करना, जिसकी शुरुआत उन्होनें कर दी है और इन मुद्दों पर उनको समाज से सकारात्मक समर्थन भी मिल रहा है क्योंकि हर वर्ग, जाति और कौम के गरीब व मध्यम वर्ग के लोग इस सामाजिक बुराई से त्रस्त हैं.

नीतीश कुमार समाजवादी विचारक स्वर्गीय राम मनोहर लोहिया के परम अनुयायी हैं. लोहिया ने एक समय एलान किया था कि ‘कांग्रेस को हराने के लिए मैं शैतान की भी मदद ले सकता हूं’.

नीतीश कुमार की अर्जुन चक्षु जिस पद को हथियाने की है वह तत्काल में बीजेपी के कब्जे में है. स्वभाविक है 2019 के चुनावी महाभारत में बीजेपी को शिकस्त देने के लिए नीतीश कुमार को कई रथियों, महारथियों और कुलश्रेष्ठों से हेल्प की जरूरत होगी.

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उपलब्ध महारथियों में ‘चारा टू लारा‘ घोटाले की जनक लालू प्रसाद यादव भी हैं. वो किसी कोण से कतई शैतान की श्रेणी में नहीं आते हैं. नीतीश कुमार हार्डकोर राजनीतिज्ञ हैं. सियासी राजनीति करते हैं. उनके समर्थक गला फाड़ के कहते हैं कि ‘साहब विकास पुरुष हैं, वो पेड़ों में चंदन हैं जहां- विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग.'

अगले चुनाव में विपक्ष नीतीश को पीएम फेस बना सकता है

जनता दल यू के एक प्रवक्ता का मानना है कि जो लोग ये कहतें और लिखते हैं कि ‘घोटालेबाज’ लालू के साथ रहकर नीतीश कुमार अपनी छवि समाप्त कर रहे हैं उन्हें पावर पोलिटीक्स का ज्ञान नहीं है.

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चलिए अब अंदर की बात जानने का प्रयास करते हैं. राज्य के सियासत में उफान मार रहा मिट्टी और लारा एपीसोड लालू प्रसाद यादव को बैकफुट पर ला दिया है.

अपने दोनों मंत्री बेटों के राजनीतिक भविष्य के खातिर राजद बाॅस ने नीतीश कुमार के सामने अपना हथियार डाल दिया है. चर्चा तो यहां तक है कि लालू प्रसाद यादव ने मान लिया है कि नीतीश कुमार को ही विपक्ष की तरफ से अगले लोकसभा चुनाव में पीएम फेस बनाया जाए.

राजनीतिक रूप से घायल मुलायम सिंह यादव को नीतीश कुमार के पक्ष में लाने की जिम्मेवारी भी लालू प्रसाद यादव ने ले ली है. पीएम बनाओ टीम में खट रहे बुजुर्गों और नौजवनों को विश्वास है कि बिहार सीएम नीतीश कुमार के लिए दिल्ली अब दूर नहीं है.

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