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नीतीश के इस्तीफे से लालू की लालटेन की बत्ती हुई गुल, कमल में रंग भरने का आया मौसम

'संघमुक्त भारत' बनाने की बात करने वाले नीतीश कुमार ने राजनीति का ऐसा दांव मारा कि लालू यादव चारों खाने चित हो गए.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Jul 26, 2017 09:01 PM IST

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नीतीश के इस्तीफे से लालू की लालटेन की बत्ती हुई गुल, कमल में रंग भरने का आया मौसम

छह महीने पहले जब बिहार के सीएम नीतीश कुमार गांधी मैदान में लगे पुस्तक मेले में बीजेपी के प्रतीक और चुनाव चिन्ह यानी कमल में रंग भर रहे थे तब किसी ने सोचा नहीं था कि बिहार के महागठबंधन की सरकार किस दिशा की तरफ बढ़ रही है. दूर-दूर तक किसी को अंदेशा नहीं था कि संघमुक्त भारत बनाने की बात करने वाले नीतीश कुमार राजनीति का ऐसा दांव मारेंगे कि लालू यादव चारों खाने चित हो जाएंगे.

सियासत में सत्ता और रिश्ते स्थाई नहीं होते. अगर गठबंधन शब्द में वजन नहीं महसूस होता है तो महागठबंधन बोला जाता है. बिहार के महागठबंधन में पहले गांठ पड़ी फिर डोर ही टूट गई. आरजेडी और जेडीयू की दोस्ती बिखर गई. 20 महीने पुरानी महागठबंधन की सरकार सिर्फ दो महीनों की कसरत में ही टूट गई. नीतीश ने इस्तीफा देकर लालू की लालटेन की बत्ती गुल कर दी तो बीजेपी के कमल में रंग भी भर दिया.

नीतीश कुमार के काम करने की स्टाइल को लेकर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश झुकेंगे नहीं. लालू ने मनाने की कोशिश भी की. परिवार पर आए संकट की दुहाई भी दी. लेकिन नीतीश ने साफ कह दिया कि ये संकट तो उन्हीं का लाया हुआ है. नीतीश ने तेजस्वी से इस्तीफा भी नहीं मांगा. सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब मांगा था. लालू एंड संस वो जवाब भी नहीं दे सके.

ऐसे में नीतीश ने बड़ा सियासी दांव चलते हुए अपना ही इस्तीफा दे दिया. अब लालू एंड संस सोचे कि आगे क्या करना है. कांग्रेस भी अब बिहार की सियासत में उलझ गई. नीतीश का कहना है कि उन्होंने इस मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी बात की लेकिन कुछ हुआ नहीं. उनका तंज था कि ऑर्डिनेंस फाड़ने वाले भी इस मामले में चुप रहे.

अब नीतीश की अंतरात्मा की आवाज ने उन्हें इस्तीफे के लिये कहा क्योंकि बिगड़े हुए राजनीतिक माहौल में काम करना मुश्किल था.

Nitish-Lalu

ये अंतरात्मा की आवाज इस वक्त विपक्ष पर बड़ी चोट कर रहा है. पहले राष्ट्रपति पद के एनडीए उम्मीदवार रहे रामनाथ कोविंद को अंतरात्मा की आवाज से मिले वोटों से विपक्षी एकता का बेड़ागर्क हो गया. अब अंतरात्मा की आवाज सुन इस्तीफा देकर नीतीश ने लालू यादव की सियासत को किनारे लगा दिया.

बिहार के राजनीतिक समीकरणों को देखें तो नीतीश नुकसान में कहीं से भी नहीं हैं. उनका सियासी इतिहास कहता है कि जब भी उन्होंने इस्तीफा दिया है तो वो और मजबूत हो कर लौटे हैं. इस बार बीजेपी उन्हें हाथों हाथ लेने के पूरे मूड में है.

अब लालू की तिलमिलाहट ने नीतीश को हत्या का आरोपी बता दिया है. तस्वीर साफ है कि नीतीश एक बार फिर एनडीए के दूल्हा बनने को तैयार हैं. जाहिर तौर पर नीतीश बीजेपी के साथ गए तो साल 2019 में इसका एनडीए  को ही फायदा होगा.

नीतीश ने अपने इस्तीफे से कमल में रंग भर ही दिया. तभी उनके इस्तीफे के बाद पीएम मोदी का बधाई संदेश मिला. पीएम मोदी ने नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिये बधाई दी है. बीजेपी की संसदीय बोर्ड की बैठक में नीतीश सरकार को बिना शर्त समर्थन देने पर मुहर लग चुकी है.

उधर नीतीश के महागठबंधन से अलग होने के बाद दलील साफ है कि नोटबंदी का अगर उन्होंने समर्थन किया तो साथ ही बेनामी संपत्ति पर भी हथौड़ा चलाने की बात की थी. अब लालू की बेनामी संपत्तियों पर सीबीआई का हथौड़ा चल रहा है. नीतीश वो सारे काम कर चुके हैं जिसका अंदाजा लालू यादव को नहीं था और अब जानने के बाद उन्हें भरोसा नहीं हो पा रहा है.

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