S M L

नरेंद्र मोदी तय समय से पहले 2018 में कराएंगे लोकसभा चुनाव ?

बीजेपी के लिए सही होगा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है, वह तय समय से पहले ही चुनाव करा ले

IANS Updated On: Aug 20, 2017 06:49 PM IST

0
नरेंद्र मोदी तय समय से पहले 2018 में कराएंगे लोकसभा चुनाव ?

क्या केंद्र में मौजूद नरेंद्र मोदी की सरकार समय से पहले लोकसभा चुनाव करा सकती है... पिछले कुछ समय से इसे लेकर अटकलबाजी तेजी है. सियासी गलियारों में ऐसी अटकलें हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लगभग एक साल पहले कराने पर विचार कर रही है. इसके पीछे 2018 में होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ ही लोकसभा चुनाव करा कर पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का मानक पेश करना भर नहीं होगा.

दरअसल यह बीजेपी के लिए बेहतर साबित होगा कि वह लोगों के बीच अपने साढ़े तीन साल के दौरान किए गए काम को लेकर जनता के बीच जाए और उनसे वोट मांगे, बजाय इसके कि वह 20 महीना और इंतजार करे और बेरोजगारी और किसानों की समस्या हल करने में अपनी नाकामियों को और उजागर होने दें.

ओपिनियन पोल से साबित होता है नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है

बीजेपी के लिए यही सही होगा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है, जैसा कि हाल में किए गए ओपिनियन पोल से साबित होता है, वह तय समय से पहले ही चुनाव करा ले.

बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार भले विपक्ष की मौजूदा कमजोर स्थिति से संतुष्ट हो, लेकिन उसे यह भी साफ दिख रहा होगा कि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस अभी भी देश के कुछ हिस्सों में प्रभावी है. पिछले दिनों मध्य प्रदेश में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की स्थिति में जिस तरह सुधार हुआ है और पश्चिम बंगाल के निकाय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने जिस तरह भारी जीत दर्ज की है, वह निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए चिंता का सबब होगा.

बीजेपी जानती है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में उसे सत्ता-विरोध माहौल का सामना करना होगा. ऐसे में अगर पूर्व के चुनावों के मुकाबले पार्टी की सीटों में कमी आती है तो इसका सीधा असर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा.

यहां तक कि अगर कर्नाटक में कांग्रेस और त्रिपुरा में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) जीत जाती है तो बीजेपी के लिए यह मनोबल गिराने वाला साबित होगा.

बीजेपी को यह भी याद रखना होगा कि जनता अक्सर सत्तारूढ़ दल के प्रदर्शन से असंतुष्ट होकर उनके खिलाफ मतदान करती रही है, चाहे विपक्ष भले कमजोर हो. इस साल हुए गोवा और मणिपुर विधानसभा के चुनाव में ऐसा देखने को मिला, जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. यह अलग बात है कि विधायकों को अपने पाले में शामिल करने में सफल रही बीजेपी ने गोवा और मणिपुर में सरकार बनाई. लेकिन इस सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता कि बीजेपी के प्रति असंतोष की भावना है.

हाल के दिनों में इस तरह का असंतोष एक बड़े समुदाय के बीच भी देखने को मिला, जब कुछ रिटायर्ड नौकरशाहों और सेना के रिटायर्ड अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया. और वैज्ञानिकों ने सत्ता समर्थकों द्वारा विघ्नकारी कार्यो को बढ़ावा दिए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

बेरोजगारी और किसानों की समस्या दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं

इसके अलावा बीजेपी सरकार के सामने बेरोजगारी और किसानों की समस्या के रूप में दो सबसे बड़ी चुनौतियां भी हैं. देश में बढ़ रहे असहिष्णुता के माहौल को देखते हुए भी आम जनमानस सशंकित है.

गोरक्षा के नाम पर लोगों के साथ हो रहे अत्याचार, पुलिस द्वारा घर में घुसकर यह देखना कि गाय का मांस तो नहीं खाया जा रहा, जैसा कि महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार चाहती है. न्यूज चैनलों के बीच अंधराष्ट्रवाद को लेकर मचा घमासान, पार्टी समर्थकों द्वारा सोशल नेटवर्क पर विरोधियों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल और इतिहास के साथ छेड़छाड़ कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर बीजेपी बैकफुट पर नजर आती है.

इन सबका अगले एक-दो साल में क्या मिला-जुला असर होगा, कोई नहीं जान सकता लेकिन देश की अर्थव्यवस्था की धीमी गति भी केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए गंभीर चुनौती होगी.

2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी जिस चमक के साथ सत्ता में आई वह ज्यादा मद्धिम तो नहीं पड़ी है, लेकिन समय से पहले चुनाव के विकल्प पर विचार करते हुए भी बीजेपी को नरेंद्र मोदी में जनता द्वारा व्यक्त किए गए विश्वास पर ही निर्भर रहना होगा.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi