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मोदी की ललकार, गुजरात के लिए गांधी-नेहरू परिवार में कभी नहीं रहा है प्यार

गुजराती अस्मिता से जोड़कर कांग्रेस को मात देने की कोशिश नरेंद्र मोदी फिर करेंगे क्योंकि इस बार मुख्यमंत्री नहीं प्रधानमंत्री की साख का सवाल है

Amitesh Amitesh Updated On: Oct 16, 2017 08:38 PM IST

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मोदी की ललकार, गुजरात के लिए गांधी-नेहरू परिवार में कभी नहीं रहा है प्यार

गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख का बस ऐलान होना बाकी है. लिहाजा मोदी से लेकर राहुल गांधी...सब लगातार गुजरात का दौरा कर रहे हैं. राहुल के दौरे के बाद अब बारी प्रधानमंत्री मोदी की थी. गुजरात पहुंचे मोदी ने राहुल गांधी के साथ-साथ पूरे गांधी-नेहरू परिवार पर सीधा हमला बोल दिया.

'गांधी परिवार को चुभता है गुजरात'

मोदी ने गुजरात गौरव यात्रा के समापन के मौके पर गांधीनगर के भट गांव में पार्टी के राज्य भर के पन्नाप्रमुखों को संबोधित करते हुए गांधी-नेहरू परिवार को  गुजरात विरोधी बता दिया. मोदी ने कहा ‘गांधी-नेहरू परिवार और कांग्रेस पार्टी के लिए गुजरात हमेशा आंखों में चुभता रहा है. सरदार पटेल से लेकर उनकी बेटी तक के साथ इस परिवार ने क्या किया यह सबको पता है.’

मोदी ने कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को सरदार पटेल विरोधी बताकर गुजरात के लोगों की हमदर्दी लेने की पूरी कोशिश की. पिछले कई सालों से सरदार पटेल की विरासत पर दावेदारी कर मोदी ने कांग्रेस पर पटेल का अपमान करने का आरोप लगाया है.

क्या-क्या लगाएं आरोप?

मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू पर नर्मदा नदी पर बन रहे सरदार सरोवर बांध की परियोजना में जान-बूझकर देरी करने का आरोप लगाया. मोदी ने कहा कि नर्मदा नदी पर बांध की कल्पना सरदार पटेल की थी. यही वजह रही कि उन्होंने और बाद की कांग्रेस सरकारों ने इसे लटकाया. सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है.

2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही हर चुनाव में मोदी ने गुजराती अस्मिता से अपने-आप को जोड़कर विरोधियों को मात दी है. 2002 के गुजरात दंगों के बाद मोदी को लगातार कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार के ताने सुनने पड़े. लेकिन व्यंग्य-वाण को मोदी ने पांच करोड़ गुजरातियों के अपमान से जोड़ कर हर बार कांग्रेस को पटखनी दे दी.

क्या काम करेगा गुजराती अस्मिता का हथियार?

गुजराती अस्मिता की बात को समझने वाले मोदी इस बार भी उसी दांव से कांग्रेस को पछाड़ने की कोशिश में हैं. कांग्रेस अध्यक्ष बनने की अटकलों के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की गुजरात में सक्रियता को लेकर मोदी सजग हैं. उन्हें इस बात का एहसास है कि गुजरात में लड़ाई मोदी बनाम कांग्रेस ही होगी.

लिहाजा मोदी फिर से उस पुराने दांव को ही आजमा रहे हैं. अपने-आप को पांच करोड़ गुजरातियों के नायक के तौर पर पेश कर नरेंद्र मोदी कांग्रेस और राहुल गांधी को गुजरात विकास के विरोधी के तौर पर पेश कर रहे हैं.

rahul gandhi

मोदी का सरदार पटेल के अलावा मोरारजी देसाई और माधव सिंह सोलंकी के अपमान का आरोप राहुल गांधी के पुरखों पर लगाना इसी बात का प्रतीक है. अपने हमले में मोदी यह जता देना चाहते हैं कि सरदार पटेल और माधव सिंह सोलंकी तो कांग्रेसी ही थे, इसके बावजूद नेहरू-गांधी परिवार ने उनका अपमान किया.

अमित शाह की तारीफ करते हुए मोदी ने कांग्रेस पर उन्हें परेशान करने का आरोप लगा दिया. एक बार फिर से अमित शाह के जेल जाने और अपने-आप को कांग्रेस शासन काल में पीड़ित बता कर मोदी ने गुजरात के लोगों की सहानुभूति की कोशिश की.

इसके पहले मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ऐसा करते रहे हैं. उन्हें इसका फायदा भी खूब मिला जब वो गुजरात अस्मिता से अपनी जीत और हार को सीधे जोड़कर गुजरात की चुनावी लड़ाई को पांच करोड़ गुजराती बनाम कांग्रेस की लड़ाई में तब्दील करते रहे हैं.

विकासवाद बनाम वंशवाद की लड़ाई

विकास के गुजरात मॉडल का जिक्र कर मोदी लगातार विकास के प्रतीक के तौर पर गुजरात को पेश करते रहे हैं. इसका फायदा भी 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त भी मिला. लेकिन, अब कांग्रेस की तरफ से विकास के एजेंडे की हवा निकालने की कोशिश हो रही है.

‘विकास पागल हो गया है’ का नारा देकर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की है. राहुल ने गुजरात में मोदी-राज के विकास पर ही सवाल खड़ा कर दिया है. गांधीनगर की रैली में मोदी विकास के एजेंडे को फिर से चुनाव के केंद्र में लाते दिखे.

लेकिन, इस बार मोदी ने विकास के खिलाफ कांग्रेस के नारे की हवा निकालने के लिए सीधे नेहरू-गांधी परिवार के वंशवाद की राजनीति को चुनौती दे दी. मोदी ने कांग्रेस को विकास के मुद्दे पर चुनाव कराने की चुनौती दे डाली.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त गुजरात में लगातार कई परियोजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं. इस महीने उनका गुजरात का चौथा दौरा है. दिवाली बाद 22 अक्टूबर को मोदी फिर गुजरात में होंगे जब वो गोगा-दहेज फेरी सर्विस की शुरुआत करेंगे.

नोटबंदी और जीएसटी पर सफाई

मोदी ने बीजेपी के पन्ना प्रमुखों को हिंदी में संबोधित किया लेकिन, जब बात नोटबंदी और जीएसटी की आई तो मोदी गुजराती में बोलने लगे. दरअसल, मोदी गुजरात के व्यापारी समाज को यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि नोटबंदी और जीएसटी से सबका भला है, कालेधन पर रोक लगी है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है.

लेकिन, जीएसटी की मार से बेहार गुजरात के व्यापारी के वोट की चिंता शायद उन्हें भी सता रही है. बीजेपी को लग रहा है कि अबतक उनका परंपरागत वोटर रहा व्यापारी समाज कहीं उनसे रूठ ना जाए.

शायद यही वजह है कि मोदी ने चतुराई से व्यापारी वर्ग को गुजराती में ही संबोधित कर यह बताने की कोशिश की है कि जीएसटी लागू करने का फैसला अकेला उनका नहीं है. इस फैसले के पीछे सभी पार्टी और सभी राज्य सरकारों की सहमति ली गई है. मोदी यह बताना चाह रहे हैं कि जीएसटी का फैसला कांग्रेस की सहमति से भी लिया गया है.

फिलहाल यह तो अभी शुरुआत भर है. आगे गुजरात चुनाव का बिगुल बजने के बाद मोदी फिर से अपने पुराने अंदाज में होंगे, गुजराती अस्मिता से अपने-आप को जोड़कर कांग्रेस को मात देने की उनकी कोशिश फिर होगी क्योंकि इस बार मुख्यमंत्री नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख का सवाल है.

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