S M L

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ मोहन भागवत के लंच के सियासी मायने

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और संघ प्रमुख भागवत के बीच लंच पर हुई ये मुलाकात निश्चित रूप से संघ के इतिहास में नया पन्ना जोड़ने वाली है

Sanjay Singh | Published On: Jun 18, 2017 10:39 AM IST | Updated On: Jun 18, 2017 10:39 AM IST

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ मोहन भागवत के लंच के सियासी मायने

शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में एक ऐसे शख्स की मेहमाननवाजी की, जो बेहद चौंकाने वाली थी. लंच पर राष्ट्रपति के मेहमान थे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत.

मौजूदा सियासी माहौल में इस मुलाकात के गहरे मायने हैं. इसके कई मतलब निकाले जा सकते हैं. ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी राष्ट्रपति ने संघ प्रमुख को राष्ट्रपति भवन आने का न्यौता दिया. वो भी सिर्फ मुलाकात के लिए नहीं.

राष्ट्रपति ने मोहन भागवत को लंच पर बुलाया था. राजधानी दिल्ली में बहुत से लोग इस बात से हैरान हैं. इससे अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. लोग कयास लगा रहे हैं कि आखिर इस लंच मीटिंग में दो दिग्गजों के बीच क्या-क्या बातें हुईं?

यह भी पढ़ें: जनरल रावत इन्हें माफ करना, वाम दल समझ नहीं रहे कि वो क्या कह रहे हैं

संघ प्रमुख मोहन भागवत की राष्ट्रपति से लंच पर उस दिन मुलाकात हुई, जिस दिन मोदी सरकार के दो सीनियर मंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं से मिले. सोनिया के अलावा राजनाथ और वेंकैया नायडू ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से भी मुलाकात की.

मोदी सरकार के दो मंत्रियों का विपक्षी नेताओं से मिलने का मकसद सरकार और विपक्ष के बीच रिश्तों को बेहतर बनाना भी था, और राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार को लेकर चर्चा करना भी था.

दोनों के मुलाकात के पहलू

New Delhi: President Pranab Mukherjee, Vice President Hamid Ansari, Prime Minister Narendra Modi and other dignitaries pose with the awardees at the Padma Awards 2017 function at Rashtrapati Bhavan in New Delhi on Thursday. PTI Photo (PTI3_30_2017_000226B)

दिल्ली में सत्ता के गलियारों में दिग्गज नेताओं की मुलाकात के तीन प्रमुख पहलू थे:

मोहन भागवत और आरएसएस को करीब से जानने वाले एक सूत्र ने हमें बताया कि भागवत पहले भी, दो बार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिल चुके हैं. यानी ये इन नेताओं की पहली मुलाकात नहीं थी. हां, राष्ट्रपति भवन में पहली बार किसी आरएसएस प्रमुख को लंच के लिए न्यौता मिला था.

इस सूत्र के मुताबिक, इस मुलाकात के बहुत ज्यादा मायने निकालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. ये दोनों दिग्गजो के बीच लंच पर सौहार्दपूर्ण मुलाकात भर थी. अगर ये मुलाकात दो महीने पहले हुई होती, तो इसके कई मायने निकाले जा सकते थे. हमारे सूत्र के कहने का मतलब ये कि प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति भवन से विदा होने वाले हैं. वो राष्ट्रपति चुनाव की रेस में भी नहीं हैं. ऐसे में उनकी संघ प्रमुख के साथ लंच मीटिंग से हालात बहुत बदलने वाले नहीं.

हालांकि, कई और जानकार मानते हैं कि मोहन भागवत और प्रणब मुखर्जी के लंच पर मिलने से कई नई संभावनाएं बन सकती हैं. इन लोगों का मानना है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं करते, तब तक किसी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता.

राष्ट्रपति चुनाव से संघ परिवार को बड़ी उम्मीद 

मोहन भागवत

वैसे भी कहावत यही है कि राजनीति में एक हफ्ते का वक्त बहुत लंबा होता है. पिछले तीन सालों के मोदी सरकार के राज में पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं. 2014 के आम चुनाव के दौरान भी मोदी एक नेता के तौर पर प्रणब मुखर्जी की जमकर तारीफें किया करते थे.

मोदी अभी भी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का बहुत सम्मान करते हैं. लेकिन, मोदी सरकार के पास जिस तरह का बहुमत और समर्थन है, उसे देखते हुए संघ परिवार को राष्ट्रपति चुनाव को लेकर उनसे बड़ी उम्मीदें हैं.

ऐसा माना जा रहा था कि बीजेपी ऐसे शख्स को राष्ट्रपति बनाएगी जो संघ परिवार से गहरा ताल्लुक रखता हो. बीजेपी के काडर से वाजपेयी और मोदी प्रधानमंत्री रह चुके हैं. भैरो सिंह शेखावत उप-राष्ट्रपति रहे थे. मगर संघ परिवार का कोई नेता अब तक राष्ट्रपति नहीं हुआ है.

तीसरी बात ये कि आरएसएस के प्रमुख को राष्ट्रपति ने लंच पर राष्ट्रपति भवन बुलाया, इसके और भी मायने हैं. इससे जाहिर होता है कि संघ की देश में और राजनीति में स्वीकार्यता बढ़ी है. आज की तारीख में देश की राजनीति और अफसरशाही के बीच संघ का रुतबा कई गुना बढ़ गया है.

प्रणब मुखर्जी एक तजुर्बेकार और खांटी कांग्रेसी नेता रहे हैं. वो इंदिरा गांधी से लेकर कई सरकारों में मंत्री रहे थे. उनका कई ऐसी रिपोर्टों से सामना हुआ होगा, जिसमें संघ को कांग्रेस का सबसे बड़ा दुश्मन बताया गया होगा.

संघ के लिए भरोसेमंद है मोदी-शाह की जोड़ी

shah-modi-rajnath-allahabd

इसीलिए प्रणब मुखर्जी का संघ प्रमुख भागवत को निजी लंच पर बुलाना, या उनसे पहले भी मिलना, किसी भी नजरिए से सामान्य बात नहीं. सूत्रों के मुताबिक इस लंच का प्लान करीब एक महीने पहले बना था. लेकिन, इसे बाद के लिए टाल दिया गया था, ताकि लंच के बहाने अटकलों का बाजार न गर्म हो.

एक और सियासी तर्क दिया जा रहा है. वो ये कि, आजाद भारत के 70 साल के इतिहास में बीजेपी केवल 9 साल केंद्र की सत्ता में रही है. संघ भी इस दौरान अपना विस्तार करता रहा है.

हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि वो भी एक स्वयंसेवक हैं. लेकिन उस वक्त संघ को वाजपेयी सरकार पर उतना भरोसा नहीं था, या वाजपेयी सरकार को संघ पर उतना यकीन नहीं था, जितना भरोसा आज संघ और मोदी-अमित शाह की जोड़ी एक-दूसरे पर करते हैं.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और संघ प्रमुख भागवत के बीच लंच पर हुई ये मुलाकात निश्चित रूप से संघ के इतिहास में नया पन्ना जोड़ने वाली है.

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi