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जुनैद मामला: सुरेश प्रभु सिर्फ दवा-दूध पहुंचाएंगे! सुरक्षा किसके भरोसे?

हे प्रभु... चाहें तो दवा और दूध पहुंचाना बंद कर दें, लेकिन जान बचा लें

Arun Tiwari Arun Tiwari Updated On: Jun 29, 2017 11:13 PM IST

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जुनैद मामला: सुरेश प्रभु सिर्फ दवा-दूध पहुंचाएंगे! सुरक्षा किसके भरोसे?

बल्लभगढ़ में ट्रेन में हुए एक मामूली विवाद के बाद एक मुस्लिम युवक को जान से मार दिया गया. सीट को लेकर बढ़ा विवाद धार्मिक रंग में बदला. फिर बातें बढ़ीं तो रुक न सकीं. मरने वाले युवक का नाम जुनैद था.

इस घटना के विरोध और दुख में जुनैद के गांव में ईद नहीं मनाई गई. इसी घटना और पहले की कुछ घटनाओं का असर माना जा रहा है कि देश में कई जगह ईद की नमाज पर काला बैंड हाथ में बांध कर नमाज अदा की गई.

कहा जा सकता है कि ये विरोध का तरीका किसी राजनीति से प्रेरित होगा. कुछ सोशल मीडिया कैंपेन का इसमें हाथ होगा. लेकिन विरोध का यह तरीका नाजायज तो कतई नहीं है. शांतिपूर्वक किए गए विरोधों को हम लोकतंत्र के लिए बेहतर ही मानते हैं.

नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर बुधवार को नॉटइनमाईनेम नाम से विरोध प्रदर्शन हुआ. तमाम बुद्धिजीवी और पत्रकार वहां मॉब लिंचिंग की घटनाओं का विरोध करने के लिए जुटे. गुरुवार को खुद पीएम ने ऐसे गौरक्षकों को फर्जी कहकर कड़ा संदेश देने की कोशिश की.

लेकिन इस घटना का सबसे दुखद पहलू ये है कि हमारे रेल मंत्री की तरफ से न कोई बयान आया और न ही कोई संवेदना व्यक्त की गई. जब से मुझे ये पता चला कि ट्रेन में मारपीट की ये वीभत्स घटना हुई उसके बाद से ही इंतजार था कि ट्विटर पर त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले रेल मंत्री इस पर भी कुछ बोलेंगे.

जबसे सुरेश प्रभु रेल मिनिस्टर हुए उनकी अगर किसी बात को लेकर सबसे ज्यादा वाहवाही हुई है तो वह ट्विटर पर उनकी सक्रियता ही है. कई ऐसे केस हुए जहां लोगों ने उनसे मदद मांगी और उन्होंने तुरंत मदद पहुंचाई.

सुरेश प्रभु लोगों की मदद करते रहे और हर बार उन तक वाहवाही खबरों के माध्यम से उन तक पहुंचती रही.

लेकिन जुनैद के मामले में रेल मंत्री चूक गए हैं. ये चूक भी छोटी चूक नहीं है. ऐसे समय में जबकि सरकार पर देश के एक तबके की तरफ से आरोप लग रहे हों रेल मंत्री की जुनैद मसले पर संवेदना जरूरी हो जाती है.

सुरेश प्रभु को इस बात पर भी कोई बात करनी चाहिए थी कि आखिर रेलवे में इस तरह की मारपीट की घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा? ये मामला जीआरपी और आरपीएफ के बीच लटककर रह जाएगा. लेकिन इस घटना से देश में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच ये भी मैसेज जा सकता है कि रेलवे में उनके साथ अगर ऐसी कोई घटना आगे घटती है तो उनकी रक्षा के लिए कौन आएगा?

लोगों की छोटी-छोटी डिमांड पूरी कर तारीफ बटोरने वाले सुरेश प्रभु आखिर किसी की जिम्मेदारी तय करेंगे? सुरेश प्रभु जबसे रेलवे मंत्री बने हैं उन्होंने लोगों को वायदे ही दिए हैं. फ्लेक्सी फेयर के नाम पर अनाप-शनाप किराए वसूले जा रहे हैं. 1 हजार रुपए किराए का टिकट 4 हजार में मिल रहा है. ट्रेनें उतनी ही देर से चल रही हैं जितनी यूपीए के टाइम पर चल रही थीं. गंदगी का लेवल भी वही है. सिर्फ एक ट्विटर पर उनकी सक्रियता ही नई चीज थी, जिसे इतने बड़े मामले के बाद भी उनकी चुप्पी ने तोड़ दिया है.

रेल मंत्री को बड़ी मेहनत से बनाई गई अपनी इस इमेज की रखवाली करनी चाहिए. जिन लोगों की उन्होंने ट्विटर के जरिए मदद की उसके लिए वो बधाई के पात्र हैं. ये अपने तरह के पहले मौके हैं जब जनता की मदद सीधे मंत्री कर रहा है.

लेकिन भविष्य में किसी ट्रेन में कोई व्यक्ति कीसी भी मसले पर पीट-पीट कर मार दिया जाए, चाहे वह मसला सांप्रदायिकता से न भी जुड़ा हो, बेहद दुखद है. लिंचिंग के अन्य मामलों से रेल मंत्री का कोई लेना-देना नहीं है मगर जुनैद के मसले पर उनकी चुप्पी लोगों को सालती रहेगी.

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