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दिल्ली एमसीडी चुनाव 2017: नतीजों से टूटेंगी कई धारणाएं

यह चुनाव खाली नगरपालिका के चुनाव नहीं हैं जो पहले हुआ करते थे.

Pramod Joshi | Published On: Apr 26, 2017 07:50 AM IST | Updated On: Apr 26, 2017 07:45 AM IST

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दिल्ली एमसीडी चुनाव 2017: नतीजों से टूटेंगी कई धारणाएं

एमसीडी चुनाव के नतीजे आने से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि नतीजे वैसे ही आए जैसे एग्जिट पोल बता रहे हैं तो हम आंदोलन छेड़ेंगे. यह बात उन्होंने अपनी पार्टी के लोगों से कही है.

एग्जिट पोल पर मीडिया की चर्चा के दौरान उनकी पार्टी के प्रतिनिधि घूम-फिरकर ईवीएम की गड़बड़ियों पर बात का रुख मोड़ते रहे. लगता है कि पार्टी ने परिणाम आने के पहले मान लिया है कि उनकी हार हो रही है.

मतदान के दो-तीन दिन पहले अखबारों में प्रकाशित इंटरव्यू में केजरीवाल ने कहा, ईवीएम में गड़बड़ी नहीं हुई तो हमें 272 में 200 से ज्यादा सीटें मिलेंगी. उनकी बातों में यकीन नहीं बोल रहा है. पंजाब और गोवा में मिली हार से उनका मनोबल टूटा हुआ है पर एमसीडी की पराजय तमाम सपने तोड़ देगी.

राजौरी गार्डन की हार का दुख

बार-बार ईवीएम का नाम लेना पार्टी के टूटते आत्मविश्वास की निशानी है. पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद ज्यादातर विरोधी दलों ने ईवीएम को निशाना बनाया है. केजरीवाल इनमें सबसे आगे रहे हैं. क्यों?

पंजाब और गोवा की पराजय के बाद राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र की पराजय का संदेश आम आदमी पार्टी के लिए कुछ ज्यादा ही कड़वा था. उसे पार्टी ने जरनैल सिंह के 'पंजाब-पलायन' से जोड़कर फौरी राहत हासिल जरूर कर ली. पर वह एमसीडी चुनावों के परिणाम का संकेत था.

एमसीडी परिणामों पर देश की उत्सुक निगाहें इसीलिए टकटकी लगाए बैठी हैं क्योंकि अब दो परीक्षाएं हैं. पहली एग्जिट पोल की, कि क्या वे इतने गलत हैं कि उन्होंने 'आप' की सुनिश्चित जीत को उल्टा पढ़ लिया? या फिर यह 'नई राजनीति का सूपड़ा-साफ' है, जिसे केजरीवाल एंड कंपनी पढ़ना नहीं चाहती?

Arvind Kejriwal

केजरीवाल ने एमसीडी चुनाव हारने पर आंदोलन की बात कही है

सोशल मीडिया पर केजरीवाल का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा है, 'अब अगर हम बुधवार को हारते हैं...नतीजे वैसे ही रहते हैं जैसे कि बीती रात बताए गए हैं तो हम ईंट से ईंट बजा देंगे...आम आदमी पार्टी आंदोलन की उपज है इसलिए पार्टी वापस अपनी जड़ों की ओर लौटने से हिचकिचाएगी नहीं.'

केजरीवाल किसकी ईंट से ईंट बजा देंगे और क्यों? उनकी राजनीति जनता से जुड़ी है तो वे घबराते क्यों हैं? उनके लिए सत्ता इतनी महत्त्वपूर्ण क्यों है? और ईवीएम से उन्हें काबिले यकीन शिकायत है तो चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त करना चाहिए.

मीडिया की खबरों पर यकीन किया जाए तो आयोग कुछ समय के भीतर ही शिकायत करने वालों को मौका देने वाला है कि वे मशीन में गड़बड़ी की संभावना को साबित करें.

टिकट बंटवारा पड़ सकता है भारी

एमसीडी के चुनाव केवल आम आदमी पार्टी के लिए ही महत्त्वपूर्ण नहीं हैं. आम आदमी पार्टी एक अलग अध्याय है. संयोग से दिल्ली में 'स्वच्छ राजनीति' का एक नया ब्रांड स्वराज पार्टी के रूप में उभरा है. इसे बने अभी छह-सात महीने ही हुए हैं और यह पार्टी आम आदमी पार्टी के अंतर्विरोधों की देन है.

इस चुनाव में उसकी क्या भूमिका होगी इसे लेकर अभी कयास हैं. परिणाम आने पर पता लगेगा कि दिल्ली के नीर-क्षीर विवेकी वोटरों ने उस पर ध्यान दिया या नहीं.

नतीजे बीजेपी और कांग्रेस के लिए भी काफी मायने रखते हैं. बीजेपी पिछले दस साल से एमसीडी पर काबिज है. इतने लंबे समय में जनता के मन में शिकायतें पैदा होती ही हैं. इस बात को समझते हुए पार्टी ने इस बार अपने किसी भी पार्षद को टिकट नहीं दिया. इतनी लंबी इनकंबेंसी के बावजूद एग्जिट पोल गगन-भेदी जीत की घोषणा कर रहे हैं तो इसके मायने क्या हैं?

manoj tiwari

मनोज तिवारी के लिए भी ये चुनाव काफी अहम है

परिणाम बताएंगे कि वोटर ने एमसीडी की समस्या को लेकर वोट दिया या नहीं. मोदी के नाम पर वोट दिया तो क्यों दिया? इस सवाल का जवाब केजरीवाल को ही नहीं कांग्रेस को और दूसरे विपक्षी दलों को भी खोजना है, जो 'इन्द्रधनुषी एकता' कायम करने पर विचार कर रहे हैं.

ऐसा क्या हो गया है जो वोटर 'नोटबंदी' के दर्द झेलने को और एमसीडी के कष्ट की अनदेखी करने को तैयार है? यह देखने का मौका भी है कि दिल्ली में तीन दलीय राजनीति चलेगी या दो दलीय राजनीति की वापसी होगी? और यह भी कि क्या कांग्रेस की वापसी होगी?

दसियों बातें हैं जो परिणाम आने पर ही स्पष्ट होंगी. यह खाली नगरपालिका के चुनाव नहीं हैं जो पहले हुआ करते थे.

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