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उधर राहुल अमेरिका में भाषण दे रहे हैं, इधर बिहार कांग्रेस में घमासान मचा है

कई विधायकों की राय है कि आरजेडी के साथ बने रहना बेहद मुश्किल. जेडीयू में जाने की आशंकाएं

Amitesh Amitesh Updated On: Sep 20, 2017 02:35 PM IST

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उधर राहुल अमेरिका में भाषण दे रहे हैं, इधर बिहार कांग्रेस में घमासान मचा है

बिहार में कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. कांग्रेस के भीतर की राजनीतिक हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है. अभी भी कांग्रेस के कई विधायकों के जेडीयू में शामिल होने का खतरा बना हुआ है. अब सबको राहुल गांधी के दो हफ्ते के बाद अमेरिका दौरे से लौटने का इंतजार है. शायद राहुल गांधी अब कोई ठोस कदम उठा लें.

अपने विदेश दौरे के पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार कांग्रेस के सभी विधायकों को दिल्ली तलब कर उनसे बात भी की थी. अलग-अलग मुलाकात के दौरान विधायकों से उनकी पसंद और नापसंद को भी टटोलने की कोशिश की थी.

लेकिन, लगता है अबतक आलाकमान कांग्रेस के विधायकों को संतुष्ट नहीं कर पाया है. कांग्रेस के अधिकतर विधायक चाह रहे हैं कि लालू यादव के साथ नाता तोड़ कर आगे बढ़ा जाए. इनमें कांग्रेस के अधिकतर वो सवर्ण जाति के विधायक हैं जिन्हें अपने वोट खिसक जाने का खतरा सता रहा है.

Lalu Prasad Yadav appears before CBI Court

इस वक्त कांग्रेस में 11 अगड़ी जाति के विधायक हैं. ये विधायक किसी भी सूरत में लालू यादव के साथ नहीं रहना चाहते हैं. इन विधायकों को इस बात का डर सता रहा है कि अगर लालू के साथ उनका गठबंधन बरकरार रहा तो फिर अगले चुनाव में उनकी खुद की सीट बचानी मुश्किल होगी.

इन विधायकों का तर्क है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत मिली थी वो नीतीश कुमार के चेहरे के आधार पर मिली थीं, ना कि लालू यादव के चलते. यहां तक कि नीतीश कुमार के ही दखल के चलते कांग्रेस 41 सीटों पर चुनाव लड़ पाई थी, नहीं तो लालू यादव तो महज 15 से ज्यादा सीटें देने के मूड में भी नहीं थे.

सूत्रों के मुताबिक, भागलपुर से विधायक अजीत शर्मा, बक्सर से संजय तिवारी के अलावा बेगुसराय जिले से अमिता भूषण जैसे विधायक लालू का साथ छोड़ने की बात कर रहे हैं. इनकी मांग है कि कांग्रेस अकेले अपने दम पर बिहार में आगे चले तो बेहतर होगा.

अब फैसला कांग्रेस आलाकमान को करना है. गुरुवार को राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने के बाद इस पर जल्द ही कोई फैसला लिए जाने की उम्मीद है. हालाकि कांग्रेस आलाकमान बिहार में टूट की खबरों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी और कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह से संतुष्ट नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी तोड़कर जेडीयू में शामिल होने की चर्चा के बीच इन नेताओं को ही मुख्य सूत्रधार माना जाता है.

बिहार कांग्रेस में बदलाव की तैयारी

लेकिन, कांग्रेस आलाकमान की मजबूरी भी ऐसी है कि वो अशोक चौधरी को तुरंत पद से हटाने से पहले कई बार उसके बाद के हालात का आकलन कर लेना चाहता है. कांग्रेस को लगता है कि अगर अशोक चौधरी को हटाया जाता है तो फिर पार्टी के भीतर अशोक चौधरी के नेतृत्व में असंतुष्ट तबका कांग्रेस विधायको में टूट को अंजाम दे सकता है.

इस वक्त कांग्रेस के छह एमएलसी में से चार एमएलसी भी अशोक चौधरी के ही समर्थन में दिख रहे हैं. एमएलसी रामचंद्र भारती भी लालू से अलग होने की बात कर रहे हैं.

ऐसे में कांग्रेस आलाकमान किसी सवर्ण जाति के व्यक्ति को बिहार कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर सवर्ण जाति के विधायकों को टूटने से रोक सकता है. लेकिन, उसके लिए कांग्रेस को लालू के साथ रिश्ता तोड़ना होगा. दूसरी तरफ, अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद अशोक चौधरी भी पार्टी से बगावती तेवर अपना सकते हैं. यही वजह है कि किसी भी फैसले पर पहुंचने के पहले कांग्रेस पूरी तैयारी कर लेना चाहती है.

लेकिन, फिर भी कांग्रेस विधायक दल में टूट का खतरा बना हुआ है.

फर्जी लेटर से कांग्रेस के भीतर मचा बवाल

अशोक चौधरी की अध्यक्ष पद से छुट्टी की चर्चाओं के बीच अचानक एक ऐसी खबर आई जिसने कांग्रेस के भीतर बवाल और मचा दिया. एक फर्जी लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसमें बिहार कांग्रेस में चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की बात कही गई थी.

इस लेटर के मुताबिक, बिहार में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह, एमएलसी और पूर्व मंत्री मदन मोहन झा, शकील अंसारी और अशोक राम को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का दावा किया गया था. इन चार कार्यकारी अध्यक्षों के अलावा अशोक चौधरी के अपने पद पर बने रहने की बात कही गई थी.

बाद में कांग्रेस की तरफ से इस तरह की किसी भी नियुक्ति का खंडन कर दिया गया. लेकिन, इस खंडने के बावजूद बिहार में कांग्रेस पार्टी गंभीर संकट से गुजर रही है जिससे बाहर निकल पाना कांग्रेस आलाकमान के लिए भी इतना आसान नहीं दिख रहा है.

congress letter

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