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मंदसौर की हिंसा संदेह पैदा करती है: वीरेंद्र सिंह मस्त

बीजेपी के लिए किसानों के भीतर पैदा हुए असंतोष को दबा पाना फिलहाल मुश्किल हो रहा है

Amitesh Amitesh Updated On: Jun 08, 2017 11:09 PM IST

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मंदसौर की हिंसा संदेह पैदा करती है: वीरेंद्र सिंह मस्त

मध्य प्रदेश के भीतर किसानों के आंदोलन ने जिस तरीके से हिंसक रूप अख्तियार कर लिया उस पर सियासत लगातार हो रही है. विपक्ष सरकार को घेर रहा है लेकिन, सरकार के लिए बचाव करना मुश्किल हो रहा है.

केंद्र और प्रदेश दोनों जगह बीजपी की सरकार है लिहाजा विपक्ष के तीखे हमलों से पार पाना बीजेपी के लिए मुश्किल हो गया है. कृषि मंत्री राधामोहन सिंह विपक्ष के हमलों को कौन कहे मीडिया के सवालों से भी कन्नी काटते नजर आ रहे हैं.

लेकिन, बीजपी की तरफ से किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त ने मोर्चा संभाला है. मस्त ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बचाव करते हुए कहा है कि राज्य में किसान और कृषि दोनों की उपलब्धि के लिए शिवराज ने बहुत कुछ किया है. राज्य में कृषि विकास दर में काफी बढ़ोत्तरी हुई है और किसानों के मुद्दे को लेकर सरकार काफी बेहतर काम कर रही है.

बातचीत और संवाद के जरिए किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है

वीरेंद्र सिंह मस्त ने मंदसौर की हिंसा पर संदेह जताया है. उनका मानना है कि जब भारतीय किसान संघ एक दिन पहले शांति के माहौल में बात करता है और फिर आंदोलन वापस लेने की बात करता है तो फिर अगले ही दिन इस तरह से हिंसा कैसे हो जाती है.

फर्स्टपोस्ट से बातचीत में किसान मोर्चा के अध्यक्ष ने आंदोलन को जायज बताते हुए कहा है कि किसानों का आंदोलन सत्याग्रह वाला होना चाहिए. बातचीत और संवाद के जरिए ही किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है. हिंसा के जरिए समाधान मुमकिन नहीं है.

वीरेंद्र सिंह मस्त

वीरेंद्र सिंह मस्त

हालाकि, कर्ज माफी की व्यवस्था को वो तात्कालिक व्यवस्था बताते हैं. दरअसल, किसानों का आंदोलन कर्ज माफी के मुद्दे को लेकर ही शुरू हुआ था. इसके अलावा किसान चाहते हैं कि उनकी पैदावार का वाजिब मूल्य मिले.

खासतौर से यूपी में किसानों की कर्ज माफी के फैसले के बाद से ही दूसरे प्रदेशों में भी इसी तरह की मांग शुरू हो गई है. लेकिन, हकीकत है कि अबतक यूपी के भीतर भी ये सबकुछ कागजों में ही सीमित है. यूपी सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि यूपी के भीतर 86 लाख किसानों का कर्ज माफ होना है जो कि 4 सालों में पूरा होगा.

दरअसल, अबतक यूपी सरकार ने फैसला तो कर लिया है. लेकिन, बजट पेश हुए बगैर इस फैसले पर अमल कर पाना मुश्किल है. अब यूपी में योगी सरकार के पहले आम बजट में ही तय हो पाएगा कि सरकार पहले साल कितने किसानों की कर्ज माफी का फैसला करती है.

नई टीम के साथ बीजेपी किसान मोर्चा

फिलहाल विपक्ष लगातार इस मसले को जोर-शोर से उठाकर बीजेपी को घेर रहा है. बीजेपी के लिए किसानों के भीतर पैदा हुए असंतोष को दबा पाना फिलहाल मुश्किल हो रहा है.

बीजेपी किसान मोर्चा ने गुरुवार को अपनी नई टीम के पदाधिकारियों की घोषणा कर दी और कहा कि वह देश भर में किसानों के हितों में काम करता रहेगा. मोर्चा की नई टीम में आठ उपाध्यक्ष, दो महासचिव, आठ सचिव और 50 कार्यकारी सदस्य होंगे.

मोर्चा के प्रमुख वीरेंद्र सिंह मस्त ने इसकी घोषणा की और कहा कि मोर्चा देश भर में किसानों के हितों में काम करता रहेगा. नई टीम के पदाधिकारियों में देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल हैं.

इसके पदाधिकारियों में लोकसभा सदस्य ओमप्रकाश यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत और सावित्री ठाकुर शामिल हैं.

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