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शिवराज सिंह का उपवास: आंसू, वादे, आक्रोश और सियासत के सत्ताईस घंटे

मुख्यमंत्री चौहान के अनुसार उन्होंने चार घंटे में पंद्रह बड़े और 236 किसान संघों के प्रतिनिधि मंडलों से चर्चा की

Dinesh Gupta | Published On: Jun 11, 2017 11:09 PM IST | Updated On: Jun 11, 2017 11:09 PM IST

शिवराज सिंह का उपवास: आंसू, वादे, आक्रोश और सियासत के सत्ताईस घंटे

मंदसौर के पुलिस गोलीकांड में किसानों की मौत के बाद उपजी हिंसा से राज्य को उबारने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा किया गया उपवास सत्ताईस घंटे बाद समाप्त हो गया. इन सत्ताईस घंटों में उपवास स्थल पर किसानों का आक्रोश, आंसू और सरकारी वादों की भरमार देखने को मिली.

किसानों को कर्ज मुक्त करने जैसा कोई बड़ा ऐलान इस मंच से नहीं हुआ. कतिपय किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री के वादों पर भरोसा कर आंदोलन वापस लेने की घोषणा की है. वैसे किसानों संगठनों का पूर्व घोषित आंदोलन के दस जून को समाप्त होने का अंतिम दिन था. उपवास पर बैठने से पूर्व, मुख्यमंत्री चौहान ने ऐलान किया था कि जब तक पूरे प्रदेश में शांति बहाल नहीं हो जाती है, वे उपवास पर रहेंगे.

किसान आंदोलन के केंद्र मंदसौर में रविवार को तीन थाना क्षेत्रों से कर्फ्यू पूरी तरह हटा लिया गया है. सुरक्षा के लिहाज से सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहेगी. कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव और एसपी मनोज सिंह ने बताया स्थिति शांतिपूर्ण है और अब तक हिंसा की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. विभिन्न मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन एक जून से चल रहा था. छ: जून गोलीकांड में सात किसानों की मौत के बाद आंदोलन हिंसक हो गया था.

ढाई सौ से अधिक किसान संगठनों से मिले शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को सुबह लगभग साढ़ ग्यारह बजे उपवास पर बैठे थे. 10 जून को माह का दूसरा शनिवार होने के कारण शासकीय अवकाश का दिन था. इसके बाद भी मुख्यमंत्री ने अपना कार्यालय भेल के दशहरा मैदान पर लगाया.

उपवास स्थल पर ही मुख्यमंत्री चौहान ने तीन सरकारी बैठकें कीं. ये बैठकें वृक्षारोपण कार्यक्रम, भोपाल के हमीदिया अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रदेश की कानून एवं व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा से जुड़ी हुईं थीं. मुख्यमंत्री सरकारी बैठकों में व्यस्त थे और भारतीय जनता पार्टी के नेता, मंत्री मंच संभाले हुए थे. मुख्यमंत्री के साथ उपवास पर उनकी पत्नी साधना सिंह और पुत्र कार्तिकेय भी थे.

शनिवार को साधना सिंह का जन्म दिन था. उपवास कार्यक्रम के कारण हर साल की तरह इस बार साधना सिंह विदिशा के बाढ़ वाले गणेश जी के दर्शन करने नहीं जा पाईं. मुख्यमंत्री की इच्छा थी कि वे कुछ समय पत्नी साधना सिंह को दें, पर यह संभव नहीं हो सका. उन्होंने शाम को मंच से अपनी इच्छा को सार्वजनिक तौर पर जाहिर करते हुए कहा कि यदि सरकारी कामकाज से मुझे कुछ समय मिल जाएगा तो कुछ वक्त साधना सिंह के साथ गुजारना चाहूंगा.

Bhopal : Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chauhan addressing a gathering during his indefinite fast to placate angry farmers at BHEL Dussehra Ground in Bhopal on Saturday. PTI Photo (PTI6_10_2017_000087B)

रात साढ़े बारह बजे तक मुख्यमंत्री मंच पर ही बैठे रहे है. सरकारी बैठकों से पूर्व मुख्यमंत्री ने दोपहर बारह बजे से चार बजे तक का समय किसान संगठनों को बातचीत के लिए दिया. मुख्यमंत्री चौहान के अनुसार उन्होंने चार घंटे में पंद्रह बड़े और 236 किसान संघों के प्रतिनिधि मंडलों से चर्चा की.

कतिपय किसान संगठन के प्रतिनिधि असंतुष्ट होकर वहीं धरने पर बैठ गए. शाम को लगभग छह बजे भारतीय किसान यूनियन का एक प्रतिनिधि मंडल आता है. पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी उपवास स्थल पर पहुंच जाते हैं.

उपवास मंच पर दिख रहा था कि असंतुष्टों को भी साधा जा रहा है

किसानों के इस बड़े आंदोलन का सबसे गंभीर पक्ष यह रहा कि भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया. यह बात जब सामने आई तो खुद मुख्यमंत्री चौहान को उपवास पर बैठने का एलान करना पड़ा.

मुख्यमंत्री भोपाल में उपवास पर बैठे तो राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में किसानों से बातचीत का एक अलग मंच तैयार कर लिया. किसानों और उनके संगठनों से लगभग चार घंटे की चर्चा के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया कि अफसरशाही की अडंगेबाजी के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है.

उन्होंने कहा कि किसानों का कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं होता. विजयवर्गीय की गतिविधियों पर पार्टी हरकत में आई और उन्हें भोपाल बुला लिया गया. वे शाम को लगभग छह बजे भोपाल पहुंचे. कैलाश विजयवर्गीय मालवा क्षेत्र से आते हैं. किसानों का आंदोलन भी इसी क्षेत्र में हो रहा है.

विजयवर्गीय की गिनती असंतुष्ट भाजपा नेताओं में होती है. उपवास के मंच पर पिछले सत्ताइस घंटे में वे सारे असंतुष्ट नेता नजर आए जो कि घरों में बैठे हुए थे. पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी भी मंच पर थे. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने पूरा आयोजन ही अपने हाथ में ले रखा था. पूर्व मंत्री कमल पटेल भी सक्रिय थे. पूर्व राज्यसभा सांसद रघुनदंन शर्मा को मुख्यमंत्री ने अपने बगल में बैठकार लंबी बातचीत की.

शाम को मृतकों के परिजनों पहुंचे तो प्रशासन की जान में जान आई

मंदसौर के गोलीकांड में मारे गए किसानों के परिजन शाम को उपवास स्थल पर पहुंचे तो प्रशासन की जान में जान आ गई. पंडाल में बैठे सभी लोगों की निगाह इन पीड़ित परिजनों पर जाकर टिक गई.

21 वर्षीय मृतक सत्यनारायण धनगर के साठ वर्षीय पिता मांगीलाल ने मुख्यमंत्री चौहान को देखा तो जोर-जोर से रोने लगे. उनके दोनों हाथ याचना की मुद्रा में बंधे हुए थे. आंखों में आंसू और रूंधे गले से उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कहा- मेरा बेटा तो चला गया, तुम्हारा कोई दोष नहीं है. उपवास तोड़ दो.

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान ने कहा कि मांगीलाल असहनीय दु:ख का सामना कर रहे हैं, पर जैसे ही उन्होंने सुना कि मुख्यमंत्री उपवास पर बैठे हैं तो स्वर्स्फूत भोपाल आ गए. मुख्यमंत्री से मिलने वाले ज्यादतर लोग पाटीदार समुदाय के थे.

मृतक कन्हैया लाल के भाई ने कहा कि हम मुख्यमंत्री से सिर्फ न्याय मांगने आए हैं. मुख्यमंत्री ने उन्हें न्याय का दिलासा दिलाया. पीड़ित परिवार जनों को गले भी लगाया. मुख्यमंत्री ने 9 जून की शाम पांच उपवास पर बैठने की घोषणा की थी. जिला प्रशासन ने पंद्रह घंटे से भी कम समय में उपवास स्थल पर वीआईपी व्यवस्थाएं कर दीं.

मंदसौर से पीड़ित परिजन भी भोपाल आ गए. रात लगभग साढ़े बारह बजे हुई तेज बारिश ने पूरे उपवास स्थल को कीचड़ में बदल दिया. मुख्यमंत्री ने रात अपने अस्थाई विश्राम कक्ष में ही गुजारी

महाराजा ने किया जवाबी सत्याग्रह का ऐलान

सत्ताईस घंटे राजनीतिक घटनाक्रम से भरे रहे. कांग्रेस के नेता जहां इस उपवास को नौटंकी बताते हुए धरने पर बैठे तो कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना कार्यक्रम जारी कर 14 जून से भोपाल में 72 घंटे का सत्याग्रह करने का ऐलान कर दिया.

बताया जाता है कि इस ऐलान से पूर्व सिंधिया ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से कार्यक्रम की मंजूरी ली थी. सिंधिया, राहुल गांधी के साथ मंदसौर नहीं आ सके थे. वे निज कारणों के चलते विदेश में थे. सिंधिया के इस ऐलान के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी में कोई गतिविधि दिखाई नहीं दी थी.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव बालाघाट के दौरे पर थे. पार्टी सूत्रों का दावा है कि सिंधिया, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के बैनर तले ही सत्याग्रह करेंगे. इस सत्याग्रह में प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता मौजूद रहेंगे. इधर, दिल्ली में साठ से अधिक किसान संगठनों ने शिवकुमार शर्मा के नेतृत्व में एक बैठक कर ऐलान किया कि वे 16 जून को तीन घंटे हाईवे जाम करेंगे.

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