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मंदसौर में राहुल गांधी के 'फोटो सेशन' से बदलेगी कांग्रेस की किस्मत?

राहुल गांधी का उद्देश्य साफ था, दो दिन पहले हुई त्रासदी से मीडिया में ज्यादा से ज्यादा सुर्खियां बटोरी जाए

Sanjay Singh | Published On: Jun 09, 2017 10:46 AM IST | Updated On: Jun 09, 2017 10:46 AM IST

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मंदसौर में राहुल गांधी के 'फोटो सेशन' से बदलेगी कांग्रेस की किस्मत?

कांग्रेस के नजरिए से देखें तो राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के मंदसौर जाते वक्त जो सोचा था, उसे वो हासिल करने में सफल रहे. वो और पार्टी के अन्य रणनीतिकार जानते थे कि उन्हें राज्य के अशांत इलाके में जाने की अनुमति नहीं मिलेगी. वहां कर्फ्यू लगा है और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स के दस्ते तैनात हैं. राज्य के अधिकारियों ने उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं दी.

उनका उद्देश्य साफ था, दो दिन पहले हुई त्रासदी से मीडिया में ज्यादा से ज्यादा सुर्खियां बटोरी जाए. आंदोलन के दौरान फायरिंग में पांच किसानों की मौत हुई है.

राहुल गांधी मध्य प्रदेश प्रशासन और पुलिस के साथ लुका-छिपी का खेल खेलते रहे, यह महसूस किए बगैर कि उन्हें एसपीजी सुरक्षा मिली हुई है और उनकी गतिविधियों पर सुरक्षा और खुफिया एजेंसी आसानी से नजर रख सकती हैं.

उन्होंने नई दिल्ली से उदयपुर के लिए फ्लाइट ली और वहां से कार के जरिए मध्य प्रदेश की सीमा के लिए रवाना हुए. वो रास्ते में एक ढाबे पर तरोताजा हुए, मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे, बाइक पर दो अन्य लोगों के साथ बीच में बैठकर यात्रा की, फिर वाहन बदलकर खुली जीप की सवारी की और अंत में खुद को मध्य प्रदेश पुलिस की हिरासत में जाने दिया.

जब वो इस फोटो सेशन के लिए मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे अथवा दो अन्य लोगों के साथ बाइक पर सवार हुए तो वो और उनके हाई-प्रोफाइल सहयोगी भूल गए कि बाइक की सवारी करते समय हेलमेट पहनने का नियम है. इसके साथ ही बाइक पर हेलमेट अथवा बगैर हेलमेट के तीन व्यक्तियों की सवारी गैरकानूनी है.

दंगा-निरोधक वाहन 'वज्रायन' में सवार होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ उन्होंने हमेशा की तरह संक्षिप्त बयान दिया. अपने राजनीतिक मकसद के पूरा होने के बाद राहुल पुलिस वाहन में चढ़ गए. वो अच्छी तरह जानते थे कि उन्हें पुलिस की गाड़ी में बैठाकर कुछ दूर तक ले जाया जाएगा और फिर कुछ समय के लिए किसी अच्छी जगह पर आराम से रखा जाएगा. इसके बाद उन्हें दिल्ली की फ्लाइट पकड़ने या कहीं भी जाने के लिए छोड़ दिया जाएगा.

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मीडिया की सुर्खियों में राहुल

राहुल ने कहा, 'अगर आप आरएसएस की विचारधारा को नहीं मानते हैं तो आपको उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. मोदीजी किसानों का कर्ज माफ नहीं कर सकते हैं, बोनस और सही मुआवजा नहीं दे सकते हैं. वो केवल गोली चलवा सकते हैं.' राहुल ने यह भी कहा कि मोदी सरकार केवल अमीरों की चिंता करती है.

राहुल गुरुवार को दोपहर से पहले तक टेलीविजन चैनलों और डिजिटल मीडिया में छाए रहे. उन्होंने खूब सुर्खियों बटोरीं. कुछ टेलीविजन चैनलों पर डिबेट शो के विषय भी बने. भले ही राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस ने जन समर्थन ओर लोकप्रियता गवां दी हो, लेकिन वो गांधी-नेहरू परिवार के वंशज और उत्तराधिकार के वंशवादी मानदंडों के मुताबिक होने वाले पार्टी अध्यक्ष हैं, लिहाजा अब भी उनकी न्यूज वैल्यू है. उनके क्रियाकलापों से बेहतरीन विजुअल भी बनते हैं.

फोटो सेशन की इस प्रतिस्पर्धा में राहुल अकेले नहीं थे. वे दिग्विजय सिंह, कमल नाथ और शरद यादव के साथ मुकाबला भी कर रहे थे. जब राहुल को पुलिस हिरासत में ले लिया गया तो इन तीनों नेताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बहस की, जिन्होंने उन्हें मंदसौर पहुंचने से पहले नीमच में रोक दिया था.

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दिग्विजय सिंह की धौंस

दिग्विजय ने अधिकारियों पर धौंस जमाया “मैं 10 साल तक मुख्यमंत्री (मध्य प्रदेश का) रहा हूं. वे (कमलनाथ) केंद्रीय मंत्री रहे हैं. वे (शरद यादव) केंद्रीय मंत्री थे. हम कानून जानते हैं. आप हमें रोक नहीं सकते. हम यहां आग बुझाने के लिए आए हैं.'

कांग्रेस पर हिंसा भड़काने के आरोपों को नकारते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि आरएसएस के दो सहयोगी संगठनों के बीच टकराव की वजह से हिंसा हुई.

जहां तक शरद यादव की बात है, निश्चित तौर पर कोई नहीं कह सकता कि वो जेडी(यू) की गैर-मौजूदगी वाले राज्य में कांग्रेस के मजमे में क्या कर रहे थे.

दरअसल, जब से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाया है, वो खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं. संसद परिसर में कांग्रेस प्रायोजित विरोध-प्रदर्शनों या श्रीनगर में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के घर के बाहर या नीमच में फोटो फ्रेम में अपनी जगह बनाना शायद उनके लिए सार्वजनिक स्मृति में बने रहने का सबसे बेहतर तरीका हो.

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राहुल की बाइक यात्रा भट्टा परसौल की याद दिलाती है

बाइक पर राहुल की सवारी ने मुझे भट्टा परसौल की घटना याद दिला दी. 2011 की गर्मियों में राहुल दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के भट्टा परसौल पहुंचे थे, जहां किसान भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे. तब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार थी. उस जगह पहुंचने के लिए राहुल मोटर साइकिल पर पीछे बैठे. दिग्विजय सिंह राहुल के साथ थे. आज भी दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के दूसरे नेता राहुल के मंदसौर अभियान में शामिल थे.

राहुल की भट्टा परसौल की राजनैतिक यात्रा के छह महीने बाद फरवरी 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव हुए और कांग्रेस बुरी तरह से हार गई. उस इलाके में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई जहां कांग्रेस के उपाध्यक्ष पदयात्रा पर गए थे. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी को भट्टा परसौल ले जाने वाला कांग्रेस कार्यकर्ता धीरेंद्र सिंह बीजेपी में शामिल हो गया. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राहुल की एक माह लंबी चली किसान यात्रा फ्लॉप शो साबित हुई. कांग्रेस को 403 सदस्यों वाली विधानसभा में सिर्फ 7 सीटें मिलीं.

मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर है. राज्य में पिछले 14 साल से बीजेपी सत्ता में है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं.

कांग्रेस के तीन प्रमुख नेता दिग्विजय सिंह, कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश से हैं. कांग्रेस राज्य में चल रहे किसान आंदोलन को राजनीतिक पूंजी समझ रही है. पार्टी नेताओं का मानना है कि राहुल की मोटरबाइक की सवारी और पुलिस वैन में जाते दृश्यों से कांग्रेस की किस्मत चमक सकती है. वे उम्मीद कर रहे होंगे कि उत्तर प्रदेश के भट्टा परसौल का इतिहास मध्य प्रदेश में न दोहराए.

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