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मंदसौर: मध्य प्रदेश के पाटीदारों ने ही कहा- हम क्यों करें हार्दिक पटेल का समर्थन ?

मंदसौर के एसपी मनोज कुमार सिंह ने फर्स्टपोस्ट को बताया कि हमें हार्दिक पटेल के दौरे की कोई जानकारी नहीं मिली.

Subhesh Sharma Updated On: Jun 13, 2017 05:15 PM IST

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मंदसौर: मध्य प्रदेश के पाटीदारों ने ही कहा- हम क्यों करें हार्दिक पटेल का समर्थन ?

गुजरात के पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को एमपी पुलिस ने नीमच में राजस्थान सीमा पर गिरफ्तार कर लिया. हार्दिक मंगलवार की सुबह राजस्थान के उदयपुर से निंबाहेड़ा होते हुए मंदसौर जाना चाह रहे थे.

राहुल गांधी व अन्य बड़े नेताओं की तरह पुलिस ने उन्हें भी मंदसौर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी. पटेल को रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ के जवान भी तैनात किए गए थे. साथ ही गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश की पुलिस ने भी उन पर कड़ी नजर रखी हुई थी.

हार्दिक पटेल सोमवार शाम को उदयपुर पहुंचे थे, जहां उन्होंने बताया था कि वो मध्यप्रदेश किसान आंदोलन में पुलिस की गोली से मारे गए किसानों के परिवारों से मिलने जा रहे हैं पर उन्हें जाने से रोका जा रहा है.

उन्होंने कहा था कि वो हर हाल में मंदसौर के किसानों से मिल कर रहेंगे. हालांकि हार्दिक पटेल के इन प्रयासों का मंदसौर के किसानों पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है. या यूं कहें कि वो हार्दिक से मदद चाहते ही नहीं है.

हार्दिक की मंशा पर सवाल उठना लाजमी है

मंदसौर के लिए रवाना होने से पहले हार्दिक पटेल ने उदयपुर में किसानों के साथ बैठक भी की थी. हार्दिक ने ये दौरा मंदसौर में हुई हिंसा के करीब एक हफ्ते बाद करने का फैसला किया, जिससे किसानों की सहायता करने की उनकी मंशा पर सवाल उठना लाजमी है. अगर वो वाकई किसानों के मुद्दों को लेकर इतने चिंतित थे, तो उन्हें किसानों की समस्याओं को सरकार के सामने लाना चाहिए था.

FARMER WALKS DURING A CLOUDY EVENING NEAR BHOPAL.

हालांकि अपने 'किसान भाईयों' के लिए इतनी देर बाद कुछ करने के पटेल के प्रयास का मंदसौर के स्थानीय किसानों पर कोई खास असर नहीं पड़ा, क्योंकि उन्हें हार्दिक पटेल की मंशा के बारे में पहले से ही पता था.

पुलिस को नहीं थी जानकारी

मंदसौर के एसपी मनोज कुमार सिंह ने फर्स्टपोस्ट को बताया कि हमें पटेल के दौरे की कोई जानकारी नहीं मिली. हमें इस बात की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई कि हार्दिक पटेल मंदौर में किसानों से मिलने आ रहे हैं. मंदसौर में कर्फ्यू हट गया है, लेकिन धारा 144 अब भी लागू है, जिसकी वजह से हमने योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर, स्वामी अग्निवेश व अन्य को मंदसौर में प्रवेश करने से रोका था और आज हमने मध्य प्रदेश की महिला एंव बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस को मंदसौर जाने से रोक दिया.

मंदसौर में आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए छह किसानों के मामले की जांच कर रहे एक अफसर ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि हमारे पास इस बात की जानकारी है कि किसान आंदोलन से एक हफ्ते पहले मध्य प्रदेश के पाटीदार समूह के युवकों के समूह ने जयपुर में हार्दिक पटेल के साथ बैठक की थी. हम इस एंगल से भी मामले की जांच कर रहे हैं.

पाटीदारों को नहीं चाहिए हार्दिक का साथ

मध्य प्रदेश पाटीदार समाज संगठन के मुताबिक, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के पाटीदार समाज के लोग सरकार के खिलाफ इन तीनों राज्यों में आंदोलन शुरू करने को लेकर गंभीरता से काम कर रहे थे. लेकिन मध्य प्रदेश के पाटीदारों को आमतौर पर बीजेपी समर्थक माना जाता है. दूसरी ओर मलवा में रह रहे पाटीदारों का कहना है कि उनकी जंग किसानों के संकट से जुड़ी, जबकि जाति से जुड़े मुद्दों को लेकर लड़ रहे हैं. बता दें कि मंदसौर में करीब 10 लाख पाटीदार रहते हैं.

mandsaur

6 जून , 2017 को पुलिस फायरिंग में मारे गए चैन राम पाटीदार के रिश्तेदार और नयाखेड़ा गांव के निवासी खेमराज पाटीदार ने कहा, हार्दिक पटेल जातीय मुद्दों को लेकर लड़ रहे हैं. उनकी राजनीति उनकी जाति से जुड़ी है. जबकि मंदसौर, नीमच व अन्य जिलों के पाटीदारों की लड़ाई किसानों के मुद्दों से जुड़ी है. इसलिए हम उनका समर्थन क्यों करें.

मंदसौर में ट्रैवल का बिजनेस चलाने वाले स्थानीय निवासी राजेश तोमर ने बताया कि इलाके में पाटीदार अमीर और प्रमुख किसान हैं, जोकि खेती के अलावा दूसरे व्यापार भी करते हैं. पिछले कुछ दशकों से जातीय राजनीति मध्य प्रदेश के पाटीदारों के एजेंडा का हिस्सा नहीं है. इस कारण वो हार्दिक पटेल की मंशाओं को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं.

भोपाल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मंदसौर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हार्दिक पटेल का टार्गेट युवा पीढी हैं. पाटीदार समाज के किसानों के वो बच्चे जिन्होंने कभी रोजी रोटी के लिए खेती नहीं की.

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