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योगी सरकार के 100 दिन: चुनौती कि 'आउट ऑफ ऑर्डर' कैसे बने 'लॉ एंड ऑर्डर'

योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में 100 दिन पूरे कर लिए हैं जिस दौरान कानून व्यवस्था लचर सी लगती है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval | Published On: Jun 28, 2017 09:19 AM IST | Updated On: Jun 28, 2017 09:19 AM IST

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योगी सरकार के 100 दिन: चुनौती कि 'आउट ऑफ ऑर्डर' कैसे बने 'लॉ एंड ऑर्डर'

यूपी में योगी सरकार के लिये जश्न का मौका है. ऐतिहासिक बहुमत के साथ सत्ता में आई बीजेपी ने सत्ता के सौ दिन पूरे कर लिये. जब योगी आदित्यनाथ ने सीएम पद की शपथ ली तो उनसे जुड़े कई किस्से सुर्खियां बने.

एक तस्वीर ऐसी भी थी जिसमें वो शावकों को दूध पिला रहे थे. यूपी की आवाम के लिये वो तस्वीर उत्साहजनक थी क्योंकि यूपी को सत्ता में एक ऐसा शेरदिल चाहिये था जो बेलगाम और बेखौफ लुटेरे-बदमाशों में खौफ भर सके.

योगी आदित्यनाथ की कड़क छवि की वजह से जनता की उम्मीदों का ग्राफ ऊंचाई पर है. सौ दिन में योगी सरकार ने कई कामों की शुरुआत कर संतोषजनक रिपोर्ट कार्ड दिया है. भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की अब तक ईमानदार कोशिश सामने आई है तो विकास के लिये भी कई  योजनाओं का ऐलान किया. यूपी के गड्ढे भरने का भी दावा किया.

कानून व्यवस्था पर हालत वही ढाक के तीन पात

सरकार कह रही है कि वो ‘सबका साथ-सबका विकास’ की महाकल्याण भावना के साथ आगे बढ़ रही है. लेकिन यूपी में लॉ एंड ऑर्डर के गड्ढे अभी तक भरे नहीं जा सके हैं. आश्चर्य है कि सौ दिनों के रिपोर्ट कार्ड में वो मुद्दा ही गायब रहा जिसने पिछली अखिलेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया था. कानून व्यवस्था के मामले में योगी सरकार की चुप्पी ठीक उसी तरह है जैसे कि जो सवाल समझ में नहीं आए उसे परीक्षा में छोड़ देना चाहिये ताकि निगेटिव मार्किंग ना हो.

Yogi Adityanath in Ayodhya

(फोटो: पीटीआई)

कानून व्यवस्था यूपी में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा हर चुनाव में रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि योगी सरकार सहारनपुर की हिंसा को कैसे भूल सकती है? दलित बनाम ठाकुर संघर्ष में जो घर जले, बस्तियां फूंकी गईं और जो लोग मारे गए क्या वो यूपी का हिस्सा नहीं थे?

योगी सरकार सहारनपुर में जातीय संघर्ष रोकने में नाकाम रही. सहारनपुर हिंसा पर यूपी सरकार की रिपोर्ट में कानून व्यवस्था की नाकामी के लिये डीएम और एसएसपी के बीच तालमेल की कमी को जिम्मेदार ठहराया गया. सहारनपुर में बेखौफ भीड़ ने एसएसपी के घर पर ही हमला कर दिया था. ऐसे में अधिकारी पहले अपनी जान बचाएं या फिर कानून व्यवस्था बचाएं.

भीम आर्मी के चंद्रशेखर को पकड़ने के लिये यूपी पुलिस का चप्पे-चप्पे को तलाशना यूपी पुलिस की बेबसी का उदाहरण बनी.

हिंदू वाहिनी और गौ रक्षक से बढ़ती चुनौती

कहीं भीड़तंत्र हावी है तो कहीं योगी सरकार के लिये गौरक्षक और हिंदू युवा वाहिनी चुनौती बन रहे हैं जिनसे निपटने में पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल जाते हैं.

गोरखपुर में सिमटी हुई हिंदू युवा वाहिनी अब पूरे यूपी में सक्रिय दिखाई देने लगी है. बीच में कुछ उन पोस्टरों से भी बवाल हुआ जिसमें ये लिखा था कि यूपी में रहना है तो ‘योगी योगी कहना है’. पोस्टरों की जांच की जा रही है.

yogi adityanath

ये तपिश बीजेपी की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है. हालांकि योगी आदित्यनाथ कट्टर हिंदू छवि के बावजूद सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों की समस्या सुनकर दिल जीतने का काम कर रहे हैं. लेकिन उन्हें उस सेना पर भी लगाम कसनी होगी जो बेकाबू होने पर पूरे सरकार के लिये सिरदर्द बन सकती है. कानून को लेकर दो व्यवस्थाएं सरकार और संगठन के नाम पर चलीं तो फिर लॉ एंड ऑर्डर योगी सरकार के लिये मुश्किलें पैदा करेगा.

अपराधों पर कैसे कसी जाएगी नकेल?

इसी तरह हत्या, डकैती और रेप के मामलों में भी यूपी में ग्राफ कतई नहीं गिरा. योगी सरकार के आने के बाद आम जनता को उम्मीद थी कि गुंडों पर योगी की ललकार भारी पड़ेगी. योगी आदित्यनाथ ने कहा भी था कि जो लोग कानून व्यवस्था हाथ में लेंगे उन्हें यूपी से बाहर खदेड़ दिया जाएगा. इसके बावजूद सीएम और सरकार की दहाड़ का लुटेरों पर कोई खास असर नहीं पड़ा.

अगर सरकारी दफ्तरों में सफाई पर सरकार का इतना जोर है तो फिर गुंडे-बदमाशों के ‘स्वच्छ अभियान’ की सरकार कब शुरुआत करेगी?  अराजक तत्वों से निपटने के लिये सरकार ठोस प्लान कब बनाएगी?

UP Police Dial 100

बनारस में एक जौहरी के यहां करोड़ों की डकैती, मथुरा में ज्वैलरी शॉप पर डकैती और दो कारोबारियों की हत्या, ग्रेटर नोएडा में हाइवे पर एक परिवार के सदस्य की हत्या और महिलाओं के साथ गैंगरेप की घटना योगी सरकार को झकझोरने के लिये काफी है. हालांकि यूपी पुलिस ने कई मामलों में आरोपियों को समय पर धरदबोचा. लेकिन आम लोगों के भीतर असुरक्षा का भाव कम नहीं हुआ है.

दलितों की राजनीति करने वाली बीएसपी ने जब सोशल इंजीनियरिंग को हथियार बनाया तब भी उसकी प्राथमिकता में यूपी की कानून व्यवस्था थी. बीएसपी ने अपनी अपनी सरकार के कार्यकाल में कुछ हद तक गुंडागर्दी पर रोक लगा कर वाहवाही बटोरी थी. दीगर बात ये है कि उस वक्त बीएसपी के कुछ नेताओं की गुंडागर्दी भी मायावती के लिये सिरदर्द बनी थी. यही वजह है कि जब कभी बीएसपी सुप्रीमो मायावती को मौका मिलता है तो वो ये याद दिलाना नहीं भूलतीं कि यूपी को गुंडागर्दी से सिर्फ बीएसपी ही निजात दिला सकती है.

जड़ जमा चुके अपराधियों से निपटने को दीजिये थोड़ा वक्त

ऐसे में प्रचंड बहुमत के बावजूद योगी सरकार कानून व्यवस्था के नाम पर अल्पमत में दिखाई सी देती है. हालांकि योगी सरकार से सिर्फ सौ दिनों में कानून व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद बेमानी होगा. जो लोग बीएसपी और एसपी के शासनकाल में निरंकुश, बेलगाम और अराजक हो गए थे उनकी लगाम कसने के लिये योगी सरकार को वक्त चाहिये.

yogi adityanath

दरअसल पुराना प्रशासन भी पुरानी सरकारों के हैंगओवर से बाहर नहीं निकल सका है. इसके बावजूद सीएम आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अमले में भारी फेरबदल ना कर उसी प्रशासन पर भरोसा जताया है. ये योगी के काम का स्टाइल हो सकता है इसलिये नतीजों के लिये थोड़ा इंतजार भी करना पड़ेगा.लेकिन उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ है जो जनता की उम्मीदों के पहाड़ से छोटा जरूर है.

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