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सीबीआई के डर से लालू के लाल जप रहे हैं 'हरे रामा, हरे कृष्णा'

धार्मिक मान्यता है कि आफत-विपत से मुक्ति प्रदान कराने में यह अनुष्ठान काफी सहायक होता है

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari Updated On: Jul 18, 2017 06:31 PM IST

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सीबीआई के डर से लालू के लाल जप रहे हैं 'हरे रामा, हरे कृष्णा'

मौजूदा राजनीतिक बवंडर से छूटकारा पाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री और लालू प्रसाद के ज्येष्ठ पुत्र तेज प्रताप यादव ने अपने सरकारी निवास स्थान 3, देशरत्न मार्ग में अष्टजाम कीर्तन का आयोजन किया है. इस धार्मिक अनुष्ठान को अखंड कीर्तन के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि आफत-विपत से मुक्ति प्रदान कराने में यह अनुष्ठान काफी सहायक होता है.

ढोलक और झाल की थाप पर ‘हरे रामा, हरे कृष्णा, रामा रामा हरे हरे’ मंत्र का जाप ऊंची आवाज में लयबद्ध होकर कम से कम 24 घंटे तक किया जाता है. खानदानी पुरोहित की सलाह पर स्वास्थ्य मंत्री के निवास में यह अनुष्ठान अनब्रेकेबल 19 जुलाई की सुबह 4 बजे तक चलेगा. ततपश्चात पूर्णाहुति के दिन भंडारा होगा जिसका प्रसाद परिवार के सदस्यों एवं जाप में सक्रिय भाग ले रहे लोगों के बीच वितरित किया जाएगा.

तेज प्रताप को सदमे से मुक्ति दिलाने के लिए हो रही है पूजा

Lalu-Tej Pratap Yadav

जब से सीबीआई ने सर्जिकल स्ट्राइक किया है तब से अध्यात्मिक मिजाज के तेज प्रताप यादव सदमे में हैं. निवास के कोने में, बांस की लकड़ी का इस्तेमाल कर खास डिजाइन से बनवाए मड़ई के आगे खाट बिछाकर खरहने पड़े रहते हैं. पेटकुनिया पोज में हाथ लटकाकर नख से जमीन का मिट्टी खोदते रहना और कभी पीठ के बल लेटकर आसमान की तरफ टकटकी लगाकर देखते रहना स्वघोषित कृष्ण भक्त की दिनचर्या हो गई है. उनके इर्द-गिर्द रहने वालों ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी को बताया कि रूद्राक्षधारी सेहत मंत्री को राज-पाट जाने का डर सताने लगा है.

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कहते हैं मंत्री की अजीबोगरीब हरकत देखकर निजी स्टाफ घबड़ा गए. राबड़ी देवी के सरकारी निवास 10 सकुर्लर रोड में पूजा-पाठ कराने वाले पारिवारिक पुजारी को बुलाया गया. देख-दाखकर पुजारी ने बताया कि मां, बाप, भाई और बहन पर आई चक्रवात से तेज प्रताप यादव काफी चिंतित और व्यथित हो गए हैं. तत्काल घर की शुद्धिकरण की जरूरत है ताकि नाराज चल रहे ग्रहों को प्रसन्न किया जा सके. सूचना के अनुसार इसी पुजारी की सलाह पर अष्टजाम कीर्तन का अनुष्ठान 18 जुलाई को 4 बजे सुबह से शुरू कराया गया है.

अखंड कीर्तन गाने के लिए खास तौर पर रोहतास और बक्सर जिला से गवैया बुलाए गए हैं. सूत्र बताते हैं कि यह अनुष्ठान पिछले शुक्रवार से ही होना फिक्स था पर लालू प्रसाद पटना से बाहर थे इसीलिए इसे चार दिन आगे बढ़ा दिया गया.

अष्टजाम कीर्तन की शुरूआत से लेकर पूर्णाहूति तक यजमान और परिवार के सदस्यों को सशरीर अथवा 1000 गज के रेडियस में रहना होता है तभी कर्ता एवं उसके सगे संबन्धियों पर इसका पोजिटिव इंपैक्ट होता है.

दुश्मन मारन जाप भी करवा चुके हैं तेज प्रताप 

तेज प्रताप यादव

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव भगवान कृष्ण की वेशभूषा में

पिछले 4 अप्रैल को मिट्टी घोटाले के डिस्कवरी के बाद से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए तेज प्रताप यादव अपने सरकारी निवास के प्रांगण में दर्जनो बार विभिन्न प्रकार के तांत्रिक अनुष्ठान करा चुके हैं. जिनमें ‘दुश्मन मारन’ जाप भी शामिल है. जो जून के प्रथम वीक में लगातर तीन दिनों तक सेम मड़ई में चला था. इस तांत्रिक जाप को कराने के लिए तेज प्रताप यादव ने दरभंगा निवासी एक कर्मकांडी ब्राहण की सहायता ली थी. ब्राहण की सलाह पर मंत्री ने 37 लाख में फोर्ड गाड़ी ली.

इस तांत्रिक जाप की समाप्ति के एक सप्ताह बाद स्वास्थ्य मंत्री वृंदावन गए. वहां जाकर नाना प्रकार की गैर-तांत्रिक धार्मिक अनुष्ठान भी करवाया. इस वृंदावन यात्रा को तेज प्रताप यादव ने नंगे पैर अकले एक एसी बस में बैठकर तय की थी. पूछने पर मीडिया को बताया था कि ‘भगवान कृष्ण हमारे इष्ट देव हैं और वृंदावन के बिहार मंदिर में इनकी पूजा-अर्चना करने मै गया था.'

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अचलेश नंदन नामक ज्यातिषी के कहने पर स्वास्थ्य मंत्री ने 28 मई को अपने निवास के मेन गेट को बंद करा दिया था. नंदन ने समझाया था कि मेन गेट दक्षिण दिशा की ओर है. इस दिशा में यम का वास होता है. उसके सुझाव पर तेज प्रताप यादव ने निवास के उत्तर दिशा की मजबूत दिवाल को तुड़वाकर निकास बनवा लिया था जिससे अगल-बगल रहने वाले सैकड़ों झुग्गी-झोपड़ी वासियों को कठिनाई हो रही थी. लालू प्रसाद और राबड़ी को अपने इस हॉट टेंपरामेंट बेटे को मुख्य द्वार खोलने के लिए राजी करने मे काफी पापड़ बेलने पड़े थे. अंततः 23 जून को पुराना मुख्य द्वार खोला गया था.

लालू ने शुरू की थी अनुष्ठान की परंपरा

तेज प्रताप का झुकाव बचपन से धर्म-कर्म के कामों में अधिक रहा है

बताते चलें कि दुश्मनों पर विजय प्राप्त करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने की परंपरा लालू प्रसाद ने 22 वर्ष पहले ही शुरू कर दी थी. 1995 का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए आरजेडी सुप्रीमो ने यूपी के मशहूर विंध्यवासिनी मंदिर में ‘बगला मुखी’ जाप करवाया था जो लगातार 40 दिनों तक चला था. चुनावी जंग जीतने के बाद लालू प्रसाद सरकारी उड़नखटोला से जाप की पूर्णाहुति में शामिल होने चार मित्रों के साथ विंध्याचल गए थे.

तब मंदिर परिसर में मौजूद बाल काटने वाले, झाड़ू-पोछा करने वाले, भीख मांगने वाले और छोटा-मोटा काम करने वाले लोगों के बीच सीएम ने लाखों रुपए बांटे थे. बगला मुखी जाप कराने वाले राजा पंडा ने बताया कि ‘मैने अपने जीवन में लालू प्रसाद जैसा शाहखर्ची नहीं देखा है. कलयुग का असली राजा है. मुझे पटना बुलाकर भक्त की तरह सीएम ने मेरी सेवा की और विदाइ में डेढ़ लाख रुपए दक्षिणा दी.’

आरजेडी के एक लालूमय विधायक की प्रतिक्रिया है कि ‘योग्य पिता के योग्य संतान हाने के नाते 28 वर्षीय तेज प्रताप यादव ने जाप परंपरा को जिंदा रखने का अगर संकल्प लिया है तो इसकी तारिफ होनी चाहिए.’

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