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लालू के दोनों 'बाहुबली' सलाखों के पीछे: बिहार की सियासत पर क्या होगा असर?

प्रभुनाथ बनाम शहाबुद्दीन की लड़ाई खुलकर सामने न आई हो, लेकिन एक लालू के साथ था तो दूसरा नीतीश के साथ

Amitesh Amitesh | Published On: May 19, 2017 03:35 PM IST | Updated On: May 23, 2017 12:52 PM IST

लालू के दोनों 'बाहुबली' सलाखों के पीछे: बिहार की सियासत पर क्या होगा असर?

हजारीबाग की अदालत ने 22 साल पुराने हत्या के मामले में आरजेडी के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद की सजा हुई है. बिहार के सारण जिले की मशरक सीट से जनता दल के विधायक अशोक सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने प्रभुनाथ सिंह को सजा दी है.

यह बात उन दिनों की है जब प्रभुनाथ सिंह लालू यादव के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे. लेकिन, पहले से विधायक प्रभुनाथ लालू की पार्टी जनता दल के उम्मीदवार अशोक सिंह से 1995 का विधानसभा चुनाव हार गए थे. जनता दल विधायक अशोक सिंह कुछ वक्त पहले तक प्रभुनाथ सिंह के खासमखास हुआ करते थे. लेकिन, बाद में लालू यादव के करीब हो गए थे.

prabhu nath singh

चुनाव जीतने के कुछ ही दिन के भीतर 1995 में जनता दल के विधायक अशोक सिंह की उनके पटना के सरकारी आवास पर ही हत्या कर दी गई थी, जिसमें प्रभुनाथ सिंह, दीनानाथ सिंह और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगा था.

सारण जिले के मशरक इलाके में प्रभुनाथ सिंह का सिक्का पहले से ही चलता आ रहा है. बाहुबली प्रभुनाथ के समर्थक उन्हें सारण का सीएम भी कहा करते हैं. प्रभुनाथ के ऊपर हत्या और हत्या की कोशिश के अलावा अपहरण के मामलों में भी आरोप लगे हैं. प्रभुनाथ सिंह की छवि एक बाहुबली और आपराधिक प्रवृत्ति के नेता की रही है जो किसी की नहीं सुनता केवल अपने मन की करता है.

इसी कारण लालू यादव के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले प्रभुनाथ आज लालू की पार्टी में खड़े हैं और बिडंबना ऐसी कि उस वक्त लालू की पार्टी के विधायक अशोक सिंह की हत्या के ही मामले में लालू के मौजूदा साथी प्रभुनाथ सिंह को दोषी ठहरा दिया गया है.

अभी भी प्रभुनाथ खुद सांसद नहीं हैं लेकिन, उनके छोटे भाई केदार सिंह सारण जिले की बनियापुर (परिसीमन के बाद मशरक सीट बनियापुर में तब्दील हो गई है) विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार विधायक हैं.

पहले शहाबुद्दीन और फिर प्रभुनाथ को मिली सजा

90 के दशक के दौर को आज भी प्रभुनाथ बनाम शहाबुद्दीन के नाम से याद किया जाता है. बिहार के सिवान से आरजेडी के बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन का सिक्का चलता था. उस वक्त लालू-राबड़ी शासन काल में जंगलराज का दौर था जब प्रशासन और पुलिस की परवाह किए बगैर अपराधी खुलेआम इस इलाके में कानून की धज्जियां उड़ाया करते थे.

shahabuddin

दूसरी तरफ, सिवान के ही बगल की लोकसभा सीट महाराजगंज से एक दूसरे सांसद प्रभुनाथ सिंह का खौफ भी पूरे इलाके और सारण जिले में था. उस दौर में भले ही कभी प्रभुनाथ बनाम शहाबुद्दीन की लड़ाई खुलकर सामने न आई हो, लेकिन, एक लालू के साथ था तो दूसरा नीतीश के साथ. हालांकि आज की तारीख में दोनों लालू के साथ खड़े हैं.

उस दौर में इस पूरे सारण प्रमंडल में माहौल ऐसा ही भयावह हो गया था, जहां एक आम नागरिक की बात कौन करे, खुद विधायक और दूसरे लोग भी खतरे से अछूता नहीं थे.

लेकिन, 2005 में नीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही बिहार में कानून का राज स्थापित करने की पूरी कोशिश हुई. एक-एक कर सारी फाइलें खुलनी शुरू हुईं और बाहुबली शहाबुद्दीन को सलाखों के पीछे जाना पड़ा. कई मामलों में शहाबुद्दीन को कोर्ट से सजा सुनाई जा चुकी है. फिलहाल दिल्ली के तिहाड़ में शहाबुद्दीन इस वक्त बंद है.

NITISH-KUMAR

जबकि प्रभुनाथ सिंह को दोषी करार दिया गया है. हत्या से जुड़े मामले में प्रभुनाथ को सजा होने के बाद उत्तर बिहार के ये दो दबंग एक साथ सलाखों के पीछे हो गए हैं.

प्रभुनाथ का सियासी सफर

बिहार के सारण जिले की मशरक सीट से विधायक रहे प्रभुनाथ सिंह बाद में महाराजगंज से सांसद भी बने. प्रभुनाथ सिंह पहले जेडीयू के सांसद थे लेकिन, बाद में 2009 के चुनावों में हार के बाद उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते हुए लालू यादव का हाथ थाम लिया था.

आरजेडी के टिकट पर महाराजगंज से हुए उपचुनाव में 2013 में उनको जीत मिली थी लेकिन, फिर 2014 के चुनाव में प्रभुनाथ सिंह चुनाव हार गए हैं.

इसके पहले जनता दल से जुड़े रहे प्रभुनाथ ने बाहुबली आनंद मोहन के साथ मिलकर बिहार पीपुल्स पार्टी के साथ जुड़ने का फैसला किया, लेकिन 1995 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रभुनाथ फिर नीतीश कुमार के साथ हो गए. नीतीश कुमार के साथ मतभेद के बाद प्रभुनाथ सिंह ने आरजेडी का दामन थामने का फैसला किया था. 2009 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद प्रभुनाथ सिंह ने 2010 में आरजेडी में शामिल होने का फैसला कर लिया था.

बिहार की सियासत लेगी करवट

बिहार में पहले से ही बीजेपी ने महागठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. लालू यादव के खिलाफ हो रही इनकम टैक्स की छापेमारी के बाद बीजेपी ने नीतीश सरकार को निशाने पर ले रखा है. अब लालू की पार्टी के एक और बाहुबली नेता के हत्या के मामले में जेल जाने के बाद बीजेपी और आक्रामक हो गई है.

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बीजेपी नेता सुशील मोदी ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि नीतीश के सुशासन के दो स्तंभ पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन और प्रभुनाथ सिंह हत्या के मामले में जेल में हैं. इस बयान से साफ है कि बीजेपी आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाकर  नीतीश के सुशासन पर सवाल खड़ा करेगी.

पहले से ही अलग-अलग मामलों में घिरे लालू यादव के लिए अपनी ही पार्टी के दूसरे पूर्व सांसद के दोषी ठहराए जाने के बाद अब जवाब देना मुश्किल होगा.

 

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