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लालू यादव का मिशन 2019: कहीं लालू अंदर से ज्यादा डरे तो नहीं हैं?

एक बार फिर लालू के ऊपर संकट के बादल मंडरा रहे हैं तो वो विपक्ष को साथ लाने में जुट गए हैं.

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 06, 2017 02:54 PM IST

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लालू यादव का मिशन 2019: कहीं लालू अंदर से ज्यादा डरे तो नहीं हैं?

पटना में आरजेडी के 21वें स्थापना दिवस समारोह के बाद लालू यादव बीजेपी को धमकी भरे अंदाज में जवाब दे रहे थे. लालू ये दिखाने से नहीं चूके कि अगर विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़े तो अगली बार ना मोदी का जादू चलेगा और ना ही बीजेपी फिर से सत्ता में आएगी.

लालू का ये अंदाज तो पुराना है. लेकिन इस बार लालू की इस धमकी में डर दिख रहा था. डरे हुए लालू विपक्षी एकता की दुहाई देकर सभी विपक्षी दलों को भी चेता रहे थे. लालू यादव ने कहा कि अगर अखिलेश और मायावती एक हो जाएं तो फिर मैच ओवर है.

एकजुट विपक्ष ही बनेगा बीजेपी के खिलाफ हथियार

उनका ये बयान बीजेपी के लिए था जोकि अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए मैच ओवर होने की बात कर रहे हैं. लालू यादव को लगता है कि अगर बिहार की तरह यूपी के भीतर भी विपक्षी दलों का एक मजबूत गठबंधन बना तो फिर बीजेपी के लिए मुश्किलें हो सकती हैं.

वो लंबे वक्त से दोनों को साथ लाने की रणनीति पर काम भी कर रहे हैं. लेकिन, बिहार के भीतर महागठबंधन की खींचतान उनकी तमाम कोशिशों पर कई बार ग्रहण लगा देती है. फिलहाल बिहार में महागठबंधन में तात्कालिक संघर्ष विराम दिख रहा है तो लालू अब अखिलेश और मायावती की दोस्ती की पहल करने लगे हैं.

Akhilesh Mayawati

लालू की रैली में शक्ति का प्रदर्शन

अब अगले महीने की 27 तारीख को पटना में होने वाली रैली में लालू एक मंच पर सबको लाने की कोशिश कर रहे हैं. इस रैली के माध्यम से लालू बिहार के भीतर और बाहर भी एक बार फिर से अपनी ताकत का एहसास कराएंगे. इस रैली को मोदी विरोधी दलों के एक होने के प्रतीक के तौर पर लालू प्रचारित भी करेंगे.

पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त जब नीतीश कुमार ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था तो उस वक्त त्रिकोणीय मुकाबले में बिहार के भीतर बीजेपी ने लालू-नीतीश दोनों का सफाया कर दिया था. फिर साल भर बाद ही बिहार के विधानसभा चुनाव के वक्त लालू-नीतीश ने एक-दूसरे का हाथ थामा तो बीजेपी का सफाया हो गया.

मोदी लहर के बावजूद बिहार में बीजेपी के विजय रथ का पहिया पंचर हो गया था. लालू एक बार फिर चाहते हैं कि मोदी लहर और लोकप्रियता के बावजूद अगर महागठबंधन एक साथ चुनाव मैदान में उतरा तो 2019 में बीजेपी को रोका जा सकता है.

नीतीश का चेहरा बनेगा मोहरा

तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद लालू अंदर से नहीं चाहते कि नीतीश महागठबंधन से अलग हों. लालू को भी पता है कि नीतीश के भरोसेमंद चेहरे के दम पर ही बिहार में मोदी के विजय रथ को रोका जा सकता है.

उन्हें इस बात का भी डर सता रहा है कि अगर नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग हो जाएंगे तो फिर से पिछले लोकसभा चुनाव की ही कहानी दोहराई जा सकती है. लिहाजा दवाब की राजनीति के बावजूद लालू बिहार के महागठबंधन की दुहाई दे रहे हैं. ये कहानी अखिलेश-मायावती के मिलन को लेकर हो रही है.

Lalu Prasad Yadav Nitish Kumar

दरअसल, लालू को लग रहा है कि एक बार फिर से चारा घोटाले के मामले में उनपर शिंकजा कस सकता है. उनके दोनों बेटों और बेटी के उपर इनकम टैक्स की पहले से ही टेढ़ी नजर है. अगर इन मामलों में उनपर कार्रवाई हुई तो फिर नीतीश के साथ गठबंधन खटाई में पड़ सकता है. महागठबंधन में एक बार फिर से दरार दिख सकती है.

लेकिन अखिलेश, मायावती और कांग्रेस को वो साधकर रखने में सफल हो गए तो फिर सियासत में अलग-थलग पड़ने से बच जाएंगे.

लगभग दो दशक पहले यही वो वक्त था जब लालू यादव के ऊपर संकट के बादल थे और चारा घोटाले के मामले में जेल जाने की नौबत आई तो लालू ने अलग पार्टी बनाकर सबको ठेंगा दिखा दिया था. अब एक बार फिर से लालू और उनके परिवार के ऊपर संकट के बादल मंडरा रहे हैं तो लालू विपक्ष को एक साथ लाने में जुट गए हैं. लेकिन, उनको भी एहसास होगा कि शायद ये दौर कुछ अलग है वो दौर कुछ अलग था.

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