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उपराष्ट्रपति चुनाव 2017: कैसे होता है भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव?

उपराष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सबसे बड़ा सांवैधानिक पद होता है

FP Staff | Published On: Jul 17, 2017 08:18 PM IST | Updated On: Jul 17, 2017 08:20 PM IST

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उपराष्ट्रपति चुनाव 2017: कैसे होता है भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव?

भारत के राष्ट्रपति पद चुनाव के लिए मतदान खत्म हो चुके हैं. एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार के बीच मुकाबला एकतरफा नजर आ रहा है हालांकि नतीजे 20 जुलाई को आएंगे.

देश के दूसरे सबसे बड़े सांवैधानिक पद उपराष्ट्रपति के लिए भी चुनाव होने हैं. ये चुनाव 5 अगस्त को होंगे और इसका परिणाम भी उसी दिन आ जाएगा. कई लोगों को ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव एक जैसा होता है पर ऐसा है नहीं.

केवल सांसद कर सकते हैं वोट

दोनों पदों की लिए चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए होता है पर इसके सदस्य अलग-अलग होते हैं. राष्ट्रपति चुनाव से अलग इस चुनाव में केवल संसद के सदस्य ही वोट कर सकते हैं. ऐसे में वोटरों की कम संख्या के चलते परिणाम उसी दिन आ जाते हैं.

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 790 निर्वाचक होते हैं जिनमें राज्यसभा के 245 के सदस्य और लोकसभा के 545 सदस्य शामिल हैं.

इसके अलावा इस चुनाव में हर वोट की एक बराबर कीमत होती है. यह मतदान सीक्रेट बैलट के जरिए होता है और पार्टियों को इस वोटिंग के लिए व्हिप जारी करने की इजाजत नहीं होती है.

उपराष्ट्रपति किसी सदन का सदस्य नहीं होता है. चुने जाने से पहले सदस्य होने की हालत में चुने जाने पर उन्हें उस पद से इस्तीफा देना पड़ता है.

उपराष्ट्रपति वही बन सकता है जो भारत का नागरिक हो, 35 साल से ज्यादा उम्र हो और राज्यसभा सदस्य बनने योग्य हो. अगर वह किसी लाभ के पद पर हों तो वह उपराष्ट्रपति नहीं बन सकता.

इस चुनाव के उम्मीदवारों को कम से कम 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक सांसदों का समर्थन चाहिए होता है. इसके अलावा उन्हें 15,000 रुपए भी सिक्योरिटी के रूप में जमा कराने होते हैं.

चुनाव में रिटर्निंग अफसर दोनों सदनों में से किसी एक के महासचिव होते हैं.

सिंगल ट्रांस्फरेबल वोट सिस्टम के जरिए होता है चुनाव

इस चुनाव में वोटर को उम्मीदवारों के लिए अपनी प्राथमिकता बतानी होती है. इस तरीके को सिंगल ट्रांस्फरेबल वोट सिस्टम कहते हैं. वोटिंग के बाद सभी उम्मीदवारों के प्रथम प्राथमिकता वाले वोट गिने जाते हैं. गिनकर उसे 2 से भाग देकर उसमें 1 जोड़ा जाता है. अगर इस गिनती में कोई उम्मीदवार एक खास कोटा (अंक) को पार कर लेता है तो वह जीत जाता है.

ऐसा नहीं होने पर सबसे कम प्रथम प्राथमिकता वाले वोट पाने वाले उम्मीदवार को रेस से बाहर कर दिया जाता है और उसके वोटरों के दूसरे प्राथमिकता के वोटों को उन उम्मीदवारों में बांट दिया जाता है. इसके बाद अगर किसी के वोटों की संख्या निर्धारित कोटे जितनी हो जाती है तो वह विजयी माना जाता है. ऐसा होने तक यह प्रक्रिया लगातार जारी रहती है.

एक उम्मीदवार के तय हो जाने के बाद वह जीता हुआ घोषित किया जाता है और फिर राष्ट्रपति उन्हें शपथ दिलाते हैं.

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