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एमसीडी चुनाव: घोटालों के आरोपों से घिरे केजरीवाल कितने 'मि. क्लीन'

अरविंद केजरीवाल एमसीडी चुनाव में कैसे लगाएंगे नैया पार

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 06, 2017 08:23 PM IST

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एमसीडी चुनाव: घोटालों के आरोपों से घिरे केजरीवाल कितने 'मि. क्लीन'

आम आदमी पार्टी और उसके राष्ट्रीय संयोजक दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. विपक्षी दलों के द्वारा अरविंद केजरीवाल पर एमसीडी चुनाव से ठीक पहले कई आरोप लगाए जा रहे हैं.

पार्टियां तो पार्टियां अब जांच कमेटी ने भी अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार के द्वारा लिए गए प्रशासनिक फैसले पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं.

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली द्वारा दायर मानहानि केस में केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी की फीस सरकारी कोटे से दिए जाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में भूचाल ला दिया है.

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शुंगलू कमेटी ने अरविंद केजरीवाल की सरकार द्वारा लिए गए कई फैसलों पर सवाल खड़े किए हैं. कमेटी ने केजरीवाल सरकार द्वारा लिए गए 440 फैसलों से जुड़ी फाइलों की जांच की. कमेटी ने पाया कि 36 फैसलों की फाइल एलजी ने पहले ही दिल्ली सरकार को लौटा दी हैं, लेकिन 404 फैसलों की जांच में घोर अनियमितता सामने आई है.

नजीब जंग ने भी बनाई थी कमेटी

नजीब जंग (फोटो. पीटीआई).

नजीब जंग (फोटो. पीटीआई).

सिंतबर 2016 में तत्कालीन एलजी नजीब जंग ने केजरीवाल सरकार के फैसलों की समीक्षा करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था. पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक वीके शुंगलू की अध्यक्षता वाली एक कमेटी बनाई गई थी.

शुंगलू कमेटी में दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर प्रशासनिक फैसलों में नियमों की अनदेखी की भी बात कही है. शुंगलू कमेटी ने मोहल्ला क्लीनिक के सलाहकार पद पर सत्येंद्र जैन की बेटी को नियुक्ति को गलत बताया है. निकुंज अग्रवाल को स्वास्थ्य मंत्री का ओएसडी बनाने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं.

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साथ ही रोशन शंकर को पर्यटन मंत्री का ओएसडी बनाने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं. कमेटी ने कहा कि रोशन शंकर सहित कई लोगों की नियुक्ति ऐसे पदों पर की गई है जिस पद का पहले कोई अस्तित्व नहीं रहा है.

कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी बार सत्ता में आने बाद अरविंद केजरीवाल की सरकार ने संविधान और कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया. अरविंद केजरीवाल ने ऐसे कई फैसले खुद लिए जिन फैसलों को लेने से पहले दिल्ली के उपराज्यपाल की सहमति जरूरी होती है.

सरकारी खजाने का दुरुपयोग कर रहे केजरीवाल: मनोज तिवारी

MANOJ TIWARI

शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद अरविंद केजरीवाल पर बीजेपी ने हमला तेज कर दिया है. दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि यह अब साफ हो गया है कि अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग करने के साथ ही अपने लोगों की मनमाने तरीके से नियुक्तियां की.

मनोज तिवारी का कहना है कि दिल्ली के लोगों से मिले टैक्स के पैसे से मंत्रियों ने विदेश यात्राएं कर पार्टी के लिए फंड जुटाने का काम किया.

वहीं आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक दिलीप पांडे ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि जो रिपोर्ट चार महीने पहले एलजी को सौंपी गई थी उस रिपोर्ट को नगर निगम चुनाव से ठीक पहले लीक करना बीजेपी की बौखलाहट दर्शाता है.

दिलीप पांडे का कहना है कि जिस एमसीडी को बीजेपी ने 10 सालों से लूटा है और दिल्ली को गंदगी के ढेर में तब्दील कर दिया है, उसे जनता सबक सिखाने वाली है. उन्होंने कहा कि बीजेपी शुंगलू रिपोर्ट के जरिए जनता का ध्यान भटकाना चाहती है, लेकिन जनता तय कर चुकी है कि इस चुनाव में बीजेपी को हराना है.

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शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट लीक होने का फायदा उठाने में कांग्रेस भी पीछे नहीं रहना चाहती है. कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन का कहना है कि शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट हासिल करने के लिए सबसे पहले हमने ही आरटीआई लगाई थी. कमेटी ने जिस तरह से केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाए गए हैं उससे आप सरकार बेनकाब हो चुकी है.

सिर्फ मीडिया में बने रहना चाहते हैं केजरीवाल: अजय माकन

ajay maken

माकन ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को मीडिया में बने रहने की पुरानी आदत है. कभी अपने द्वारा लिए गए फैसले के कारण या फिर कभी किसी नेता पर बगैर साक्ष्य के आरोप लगाए जाने के कारण. अरविंद केजरीवाल आंदोलन से राजनीति में सुचिता और ईमानदारी की बात पर आए थे, पर अपनी ही सरकार में जिस तरह से भाई-भतीजाबाद और नजदीकी लोगों को फायदा दे कर वे अपने बातों से भटक गए हैं.

पिछले तीन-चार सालों में दिल्ली और देश की राजनीति में काफी बदलाव आया है. अरविंद केजरीवाल अगर पूर्व के चुनावों की तरह ही एमसीडी चुनाव में अपनी लोकप्रियता बरकरार रखते हैं तो यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धी होगी और अगर लोकप्रियता खोते हैं तो आगे की राह उनके लिए मुश्किल भरी साबित हो सकती है.

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