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कपिल मिश्रा के आरोप: अग्निपरीक्षा के बाद ही केजरीवाल की इमेज चमकेगी

संदेह के वातावरण को खत्म करने के लिए जरूरी है कि वे जांच की अग्निपरीक्षा का सामना करें

Suresh Bafna Updated On: May 07, 2017 06:17 PM IST

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कपिल मिश्रा के आरोप: अग्निपरीक्षा के बाद ही केजरीवाल की इमेज चमकेगी

अरविंद केजरीवाल ने देश की राजनीति व सार्वजनिक जीवन से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आम आदमी पार्टी का गठन किया था. लोकसभा चुनाव मोदी लहर के बावजूद दिल्ली की जनता ने 2015 में आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत देकर केजरीवाल के नेतृत्व में अपना भरोसा जताया था.

आज आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य और केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि वे इस बात के चश्मदीद गवाह है कि दिल्ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंत्री सत्येन्द्र जैन से दो करोड़ रुपए नगद लिए हैं.

मिश्रा के अनुसार जब उन्होंने इतनी बड़ी नगद राशि के बारे में सवाल किया तो केजरीवाल का जवाब था कि राजनीति में ऐसा होता है.

मनीष सिसोदिया ने नहीं दिया साफ जवाब?

केजरीवाल सरकार में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कपिल मिश्रा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप को जवाब देने लायक ही नहीं समझा. दिन में कई बार ट्वीट करनेवाले अरविंद केजरीवाल ने भी खामोश रहकर यह जताने की कोशिश की है कि वे इस तरह के आरोपों के प्रति जवाबदेह नहीं है.

यह सही है कि कपिल मिश्रा ने अपने आरोप के बारे में कोई प्रमाण मीडिया के सामने पेश नहीं किया है. लेकिन वे जांच एजेंसी के सामने जरूरी साक्ष्य व तथ्य रखने के लिए तैयार हैं.

आरोप को दरकिनार करना केजरीवाल के लिए आसान नहीं 

केजरीवाल इस आरोप को इस आधार पर दरकिनार नहीं कर सकते हैं कि मंत्री पद से हटाए जाने के कारण कपिल मिश्रा उन पर आरोप लगा रहे हैं. हैरानी की बात है कि देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी आज खुद पर लगे आरोपों पर जांच कराने से भी कतरा रही है.

kapil mishra

तस्वीर: कपिल मिश्रा के ट्विटर वाल से

अभी तक केजरीवाल सरकार के सात मंत्री भ्रष्टाचार और गलत आचरण के कारण कानून के कटघरे में खड़े थे. लेकिन आज अरविंद केजरीवाल खुद भ्रष्टचार के आरोपों से घिर गए हैं.

आजादी के बाद भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आम आदमी पार्टी का उभरना एक बड़ी राजनीतिक घटना थी. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत से यह उम्मीद जगी थी कि स्थापित राजनीतिक दलों के सामने नया राजनीतिक विकल्प भी सफल हो सकता है.

दुखद बात यह रही कि आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा का चुनाव जरूर जीत गई, लेकिन एक राजनीतिक दल के तौर पर उभरने में नाकाम रही.

अपना एजेंडा ही चूक गई आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी का एकमात्र एजेंडा भ्रष्टाचार विरोध ही था. अब यह अपने ही कारनामों की वजह से पूरी तरह कमजोर हो गया है. जिस रफ्तार से आम आदमी पार्टी ने दिल्ली सहित देश भर के कई हिस्सों में अपनी सकारात्मक छवि बनाई थी, आज वह उतनी ही तेजी के साथ खत्म हो रही है.

केजरीवाल के तानाशाही व अहंकारी स्वभाव ने आम आदमी पार्टी का सबसे अधिक नुकसान किया है.

दिल्ली और देश की जनता को यह उम्मीद थी कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी एक नई व पारदर्शी राजनीति को बढ़ावा देगी. लेकिन आज यह पार्टी अपनी वजह से ही बिखराव के कगार पर खड़ी हुई है.

अपनी हार से सबक क्यों नहीं सीख रही है पार्टी?

पंजाब, गोवा और दिल्ली नगर निगम के चुनावों में मिली पराजय से आम आदमी पार्टी ने कोई सबक सीखने की कोशिश नहीं की है.

आम आदमी पार्टी का आंतरिक संकट चरम पर पहुंच गया है. अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के लगभग सभी सदस्यों की भ्रष्टाचार-विरोधी साख पर गंभीर सवालिया निशान लग चुके हैं.

लाभ के पद के मामले में 21 आप विधायकों की सदस्यता पर तलवार लटकी हुई है. यदि चुनाव आयोग ने इन 21 विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी तो दिल्ली विधानसभा भंग कर चुनाव कराने की स्थिति भी बन सकती है.

इस संकट से उबरने के लिए अरविंद केजरीवाल के सामने ही एक ही विकल्प है कि वे अपने ऊपर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने पर सहमत हो जाए.

संदेह के वातावरण को खत्म करने के लिए जरूरी है कि वे जांच की अग्निपरीक्षा का सामना करें. यदि जांच में कपिल मिश्रा के आरोप निराधार पाए जाए तो अरविंद केजरीवाल अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा को बचाने में कामयाब होंगे.

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