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व्यंग्य: 100 फीसदी टंच ईमानदारी संकट में

2 करोड़ रुपए के लिए भ्रष्टाचार किया है तो इससे बड़ा राजनीतिक भ्रष्टाचारियों का अपमान कुछ हो नहीं सकता

Piyush Pandey Updated On: May 08, 2017 06:42 PM IST

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व्यंग्य: 100 फीसदी टंच ईमानदारी संकट में

वह कल तक ईमानदार थे. 100 फीसदी टंच माल. आज उन पर भ्रष्टाचार का आरोप है.

वह कल तक ईमानदारी का ISO-9000000009 सर्टिफिकेट बांटा करते थे. उनके साथ रहने वाला हर शख्स ईमानदार और उनकी आलोचना करने वाला हर शख्स बेईमान था.

आज उन्हीं के ISO-900000009 मार्का ईमानदार साथी ने उन्हीं पर भ्रष्टाचार का आरोप जड़ दिया तो वो 'बेईमान' करार दिया जा रहा है.

कल तक वे भ्रष्टाचारियों की लिस्ट जारी किया करते थे. कौन नंबर 1, कौन 100 नंबर पे. और उस वक्त कोई उनसे सवाल करे तो वो कहते कि सवाल पूछने वाले भ्रष्टाचारियों से मिले हुए हैं जी.

आज अपना ही साथी कह रहा है कि मैंने खुद अपनी नंगी आंखों से बिना चश्मा लगाए करोड़ों रुपए कैश लेते हुए देखा तो कहा जा रहा है कि या तो देखने वाले की आंखों में मोतियाबिंद है या किसी ने बहका दिया है.

वह कल तक इस्तीफा पहले मांगा करते थे, आरोप बाद में लगाया करते थे. वह आज इस्तीफा देने की बात सुन नहीं रहे, और आरोप को बेबुनियाद बता रहे हैं.

ईमानदारी-बेईमानी के इसी मुद्दे पर विकट चिंतन करते हुए मैंने उनके एक पुराने साथी से कहा- 'भइया, आम आदमी की ईमानदारी पर इस बार वो दाग लगा है, जो कम से कम 10 रुपए वाली डिटर्जेंट टिकिया से नहीं धुलने वाला.'

पुराने साथी दार्शनिक की मुद्रा में आ गए. बोले- 'ईमानदारी का इम्तिहान बेईमानी की चौखट पर ही होता है.'

मैंने कहा- 'बात में दम है. लेकिन उनकी ईमानदारी पर विरोधी भी संदेह नहीं करते थे.'

वह बोले- 'ईमानदारी के लिए कुछ खास दिल मखसूस होते हैं, ये वो राग है जो हर साज़ पे गाया नहीं जाता.'

'लेकिन वो तो बरसों से यही राग गा रहे हैं. शानदार आलाप लेते हुए.' मैंने सवाल किया.

अब साथी ताव खा गया. बोला- 'यार तुम फालतू बकवास किए जा रहे हो. जो बंदा 20 साल ईमानदार रहा, वो ईमानदारी के 21वें साल में बेईमान नहीं होगा, ये किस किताब में लिखा है जी.'

arvind kejriwal.11 अब इस सवाल का कोई क्या जवाब देगा!

बेईमानी से आशिकी किस उम्र में हो जाए-इसकी गारंटी कौन ले सकता है. वैसे, अपना मानना है कि भ्रष्टाचार के बड़े फायदे है. बंदा भ्रष्टाचारी हो तो उसका कोई काम नहीं रुकता. स्कूटर के लाइसेंस से लेकर बच्चे के एडमिशन तक सब काम बिना झमेले के हो लेते हैं.

बंदा तन-मन-धन से भ्रष्टाचारी हो तो कोई भी कैसे आरोप लगाए-फर्क नहीं पड़ता. बंदा ईमानदार हो, और फिर कोई उस पर बेईमानी के आरोप लगाए तो वो ताव खा जाता है. भ्रष्टाचारी को कोई फर्क नहीं पड़ता.

वैसे, आम आदमी भइया को घबराने की जरुरत नहीं है. राजनेताओं को ऐसा वरदान है कि उन पर भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध नहीं हो सकता. आरोप सिद्ध हो भी जाए तो राजनेता जेल नहीं जा सकता. कुछ दिन के लिए जेल चला भी जाए तो चक्की पीसने का कोई योग उसकी कुंडली में होता नहीं.

जमानत के कागज तो वो जेल में लेकर जाता है. जेल के कलंक के बावजूद उसकी सक्रिय राजनीति जा नहीं सकती. सक्रिय राजनीति से थोड़ी दूरी हो भी जाए तो उसकी राजनीतिक ताकत जा नहीं सकती.

यानी जेल-आरोप-राजनीति से दूर सब मोह-माया है. यकीन नहीं हो तो लालू यादव जी से पूछ लीजिए.

Arvind-Kejriwal

2 करोड़ के लिए भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचारियों का अपमान होगा

आम आदमी भइया के बारे में तो अपना मानना है कि अगर उन्होंने महज दो करोड़ रुपए के लिए भ्रष्टाचार किया है तो इससे बड़ा राजनीतिक भ्रष्टाचारियों का अपमान कुछ हो नहीं सकता.

देश के भ्रष्ट राजनेता एसोसिएशन को आज ही प्रस्ताव पास करके ऐलान कर देना चाहिए कि इस घटिया भ्रष्टाचार करने वाले को हम भ्रष्टाचारी मानने से इंकार करते हैं और कभी अपनी एसोसिएशन का सदस्य नहीं बनाएंगे.

आम आदमी भइया की समस्या सिर्फ एक है. वो ये कि रात 9 बजे अब रोज टीवी पर एक बंदा चिल्ला चिल्लाकर कहेगा- नेशन वांट्स टू नो, दो करोड़ कहां हैं?

इस बीच, मैं कफ्यूज हूं कि कित्ता भी बड़ा ईमानदार हो, राजनीति में आकर भ्रष्ट होना उसकी नियति है या राजनीति में ईमानदारों के लिए कोई जगह ही नहीं !!!!

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