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योगेंद्र यादव से कपिल की माफी केजरीवाल पर हमले का नया हथियार

कपिल मिश्रा कोई अन्ना हजारे नहीं हैं, माफी मांगकर वे इस साजिश से दोषमुक्त नहीं हो पायेंगे.

Debobrat Ghose Debobrat Ghose | Published On: May 24, 2017 08:58 AM IST | Updated On: May 24, 2017 09:00 AM IST

योगेंद्र यादव से कपिल की माफी केजरीवाल पर हमले का नया हथियार

आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता योगेंद्र यादव ने दिल्ली के बर्खास्त मंत्री कपिल मिश्रा को एक जरूरी सलाह दी है और रविवार को ही इसके पहले मिश्रा ने जाहिरा तौर पर यादव और प्रशांत भूषण से माफी मांगी थी.

मिश्रा को लिखे एक खुले पत्र में ‘स्वराज भारत’ के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने दिल्ली के हटाए गए मंत्री कपिल मिश्रा को, जो एक वक्त पर केजरीवाल के खास सिपहसालार हुआ करते थे, यह संदेश देने की कोशिश की है कि जो लोग कांच के घर में रहते हैं उन्हें दूसरों के घरों में पत्थर नहीं फेंकने चाहिये.

योगेंद्र यादव ने कपिल मिश्रा को याद दिलाने की कोशिश की है कि किस तरह उन्होंने और उनकी पार्टी के सहयोगियों ने भूषण, यादव, आनंद कुमार और अजीत झा जैसे ‘आप’ के बौद्धिक चेहरों को बदनाम करने के हथकंडे इस्तेमाल किये थे.

इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि कपिल मिश्रा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप के नेतृत्व के खिलाफ अपनी आर-पार की लड़ाई में यादव और भूषण के समर्थन की उम्मीद कर रहे हों जो कि ‘स्वराज भारत’ नामक एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर चुके हैं.

स्वराज पार्टी और योगेंद्र यादव से आस?

दिल्ली में करावल नगर से विधायक कपिल मिश्रा ने रविवार को यू-टर्न लेते हुए एक नया पत्ता खोला है, जिसे उन्होंने योगेंद्र और भूषण से माफी मांगकर केजरीवाल और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खेला है.

'मैं पूर्व आप नेताओं योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण से हाथ जोड़ कर माफी मांगना चाहता हूं. हमें उस समय उनको तवज्जो देनी चाहिए थी' - रविवार को कपिल मिश्रा ने जाहिरा तौर पर ये बात कही.

Kapil Mishra

लेकिन कपिल मिश्रा ये बात कैसे भूल सकते हैं कि वो कोई अन्ना हजारे नहीं हैं जिनके मुंह से निकली बात पर लोग सीधे ही भरोसा कर लेते थे. उन्हें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि वे 2015 में यादव, भूषण और कुछ प्रमुख नेताओं को बाहर करने के लिए तैयार की गई साजिश का खास हिस्सा थे.

अब ऐसा क्या हो गया है कि दो साल बाद अब वे विलाप कर रहे हैं और उनको माफी मांगने की याद आई है? क्या यहां कपिल मिश्रा की ये अवसरवादी चाल नजर नहीं आ रही है? दिल्ली के लोग सब जानना चाहते हैं और सच जानना चाहते हैं.

योगेंद्र यादव के एक करीबी सहयोगी ने फर्स्टपोस्ट को बताया, 'जब कपिल मिश्रा पार्टी की तरफ से अपना पहला चुनाव हारने के बाद दूसरी बार दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने उतरे थे तो उस दौरान 2015 में वे योगेंद्रजी के पास आए थे और उन्होंने उनसे अपने विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार करने के लिए हाथ जोड़कर अनुरोध किया था. उन्होंने योगेंद्रजी से कहा था कि उनके प्रचार से उनको मदद मिलेगी क्योंकि वहां करावल नगर में काफी मुस्लिम मतदाता हैं. और उसके बाद मिश्रा ने चुनाव जीता भी. अब योगेंद्रजी और प्रशांत जी से माफी मांग कर इस 'समझदारी' को कपिल मिश्रा केजरीवाल के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. उनका शायद ये भी मानना है कि इस तरह वे खुद को भी निर्दोष साबित कर लेंगे.'

योगेंद्र यादव का टका सा जवाब

यादव ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उन्होंने मिश्रा के लिये कई बार प्रचार किया था.

Yogendra Yadav's Open Letter to Kapil Mishra by Firstpost on Scribd

'जिस तरह से हमें पार्टी से बाहर फेंकने के लिए हमारे खिलाफ साजिश की गई थी, वह बड़ा विश्वासघात था. हालांकि आप राजनीति में मेरे मुकाबले ज्यादा समझदार (इसे चालाक पढ़ें) हैं फिर भी मैं आपको सलाह देता हूं कि आप केजरीवाल के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने से बचें. पार्टी इस तरह से साफ नहीं होगी.' यादव ने अपने पत्र में लिखा है.

2015 में यादव, भूषण जैसे प्रमुख नेताओं को आम आदमी पार्टी से बाहर निकालने को लेकर हुई घटनाओं के सिलसिले के बारे में जो लोग जानते हैं, उनको पता है कि मिश्रा, कुमार विश्वास आदि वही लोग थे जो इन नेताओं के खिलाफ कमर कसकर मैदान में उतरे हुए थे और यहां तक कि जनता के बीच जाकर भी ये लोग उनको 'विश्वासघाती' कहने से बाज नहीं आये. p18_yogendra-yadav-aap

यादव ने मिश्रा को केजरीवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर विश्वसनीय साक्ष्य देने के लिए कहा है क्योंकि खाली आरोप जनता के बीच सिर्फ अविश्वास ही पैदा करते हैं.

योगेंद्र यादव ने फर्स्टपोस्ट से कहा, 'हमें न केवल हैरानी हुई थी बल्कि तकलीफ भी हुई थी जब कपिल मिश्रा ने चुनाव जीतकर सरकार का गठन होने के बाद जनता के बीच हमें 'धोखेबाज' कहा. इस चाल का इस्तेमाल हमें पार्टी से बाहर निकालने के लिए किया गया था. मिश्रा उन लोगों में से थे जो इस साजिश में आगे थे. हमें ही नहीं, बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों को भी निशाना बनाया गया था जिनका कहीं कोई कसूर नहीं था.

उन्होंने आगे जोड़ा, 'अब मैं मिश्रा को यह बताना चाहता हूं कि केजरीवाल के खिलाफ सिर्फ आरोपों की झड़ी लगाने की बजाए कपिल मिश्रा को उनके खिलाफ कम से कम एक विश्वसनीय सबूत का टुकड़ा तो लाना ही चाहिये वरना लोग ईमानदार और वैकल्पिक राजनीति के खिलाफ विश्वास खो देंगे.'

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