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झारखंड की बीजेपी सरकार में सबकुछ ठीक नहीं

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में 11 जनवरी 2017 को अर्जुन मुंडा ने रघुवर सरकार को घेरा

Mukesh Bhushan Updated On: Jan 13, 2017 01:17 PM IST

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झारखंड की बीजेपी सरकार में सबकुछ ठीक नहीं

झारखंड में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.

राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य सरयू राय सरकार के तरीकों से नाराज हैं. राय 10 जनवरी को मंत्रिपरिषद की बैठक बीच में छोड़कर यह कहते हुए चले गए थे कि ‘मुझे जेल नहीं जाना’. वह राज्य में बंद खदानों को खोलने के लिए मंत्रिपरिषद में फैसला लिए जाने के खिलाफ हैं.

एक दिन बाद ही उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर न सिर्फ अपनी नाराजगी जताई बल्कि इसे सार्वजनिक भी कर दिया.

मंत्रिपरिषद की जिस बैठक में बंद खदानों को खोलने का निर्णय लिया गया था, राय उसमें शामिल नहीं हो पाए थे. अगली बैठक में जब उन्होंने आपत्ति जताने का प्रयास किया तो उन्हें तवज्जो नहीं मिली.

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सरयू राय का मानना है कि संबंधित मामले में कोई भी निर्णय खनन विभाग को लेना चाहिए था, पर उसने अपनी जिम्मेदारी मंत्रिपरिषद पर डाल दी है.

होना तो यह चाहिए था कि सरकार खनन पट्टों पर रोक लगाती और प्रक्रिया का नियमपूर्वक पालन करते हुए इन्हें अस्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू करती. पर, हुआ यह कि कैबिनेट ने 28 दिसंबर को इन्हें एक्सटेंशन दे दिया.

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उनका कहना है कि कैबिनेट ने यह जाने बिना कि ये खनन पट्टे किस चीज के हैं, कहां के हैं, इनकी समीक्षा हुई है या नहीं, इनपर अपनी मंजूरी दे दी है. यह अनियमितता है.

इससे पहले बीजेपी के ही एक और दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी सरकार के फैसले का विरोध करते हुए पत्र लिखा था.

मुंडा का विरोध भी कैबिनेट के एक फैसले के खिलाफ था, जिसमें छोटानागपुर काश्तकारी कानून (सीएनटी) में संशोधन संबंधी फैसले किए गए थे.

अर्जुन मुंडा ने फिर से रघुवर सरकार को घेरा

बीजेपी के एक और दिग्गज नेता और सांसद करिया मुंडा ने भी यह बयान दिया है कि सीएनटी में संशोधन पर उनसे कोई सलाह नहीं ली गई है. ‘हो सकता है हम बूढ़े हो गए हैं, इसलिए हमसे कोई रायशुमारी नहीं की गई होगी.’

जमशेदपुर के आदित्यपुर में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में 11 जनवरी 2017 को अर्जुन मुंडा ने फिर से रघुवर सरकार को घेरा. उन्होंने पार्टी फोरम में अपनी नाराजगी प्रमुखता से रखी. कहा कि सीएनटी कानून में संशोधन के फैसले से जनमानस पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

इस संशोधन को शॉर्ट टर्म में देखा गया जबकि, इसका दूरगामी परिणाम होगा. उन्होंने कई उदाहरणों से यह साबित करने की कोशिश की कि संशोधन गैरजरूरी है.

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कार्यसमिति में जवाब देते हुए रघुवरदास ने कहा कि कुछ लोग अपना निजी एजेंडा लागू करना चाहते हैं. आदिवासियों के नाम पर राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी. ‘धारा के विपरीत तैरकर दिखाना ही जीत है, विरोधी की हवा में बहना कोई चालाकी नहीं.’

मुख्यमंत्री रघुवरदास, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और संसदीय कार्य व खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय तीनों ही जमशेदपुर क्षेत्र से संबंधित हैं.

रघुवरदास जमशेदपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं तो सरयू राय जमशेदपुर पश्चिम क्षेत्र का. अर्जुन मुंडा भी जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं.

हालांकि खरसावां से लड़ते हुए पिछला विधानसभा चुनाव वह हार गए थे. समझा जाता है कि अंदरुनी कलह में उन्हें मात मिली थी.

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झारखंड सरकार के लिए नई समस्या

सरयू राय की छवि बुद्धिजीवियों के बीच एक पढ़े-लिखे, समझदार मंत्री की है. पत्रकारिता से राजनीति में आनेवाले राय पर्यावरण की सुरक्षा के लिए चिंतित दिखते रहे हैं.

जब राज्य में गैर आदिवासी सीएम की तलाश की जा रही थी तब रघुवरदास के साथ-साथ सरयू राय भी दावेदार माने जा रहे थे.

सरकार के फैसले का सार्वजनिक विरोध करने की हिम्मत दिखाकर उन्होंने एक तरफ अपनी छवि साफ रखने की कोशिश की है तो दूसरी तरफ एक कद्दावर नेता के रूप में भी अपने आपको प्रस्तुत भी किया है.

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राज्य सरकार में शामिल ऑल झारखंड सेक्युलर यूनियन पार्टी (आजसू पार्टी) के प्रमुख व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो भी सरकार के लिए अवांक्षित स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं.

उन्होंने सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर एक रिपोर्ट कार्ड जारी किया है. यह रिपोर्ट अपनी ही सरकार की बखिया उधेड़ने वाला है.

इसमें दो साल पूरे होने पर सरकार द्वारा मनाए जा रहे विकासपर्व को ‘तथाकथित’ कहकर मजाक उड़ाया गया है. कहा गया है कि पिछले दो सालों में बंदूक से हत्या के मामलों में 700 फीसदी की वृद्धि की गई है.

सीएम के पांच संकल्पों की भी सर्जरी की गई है. कहा गया कि विकास की स्थिति यह है कि दिसंबर 2016 तक सिर्फ 52 फीसदी ही राशि खर्च हो पाई है.

फोटो. NarendraModi.in से साभार

चौबीस घंटे और सातों दिन काम का वादा करते हुए रघुवर दास ने सचिवालय में एक दिन का अवकाश बढ़ा दिया तो पुलिस व्यवस्था में सुधार के संकल्प के बाद पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं बढ़ गई.

हालांकि, सरकार में शामिल आजसू पार्टी के एकमात्र मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी इसमें कुछ गलत नहीं मानते.

उनका कहना है कि गठबंधन में शामिल सभी दलों के अलग-अलग विचार हो सकते हैं. हम सरकार को अपनी पार्टी की नीति से अवगत कराते रहते हैं. सीएनटी में संशोधन पर भी हमने सीएम को पत्र लिखकर विरोध जताया था.

यह बताना लाजिमी होगा कि आजसू पार्टी ही एक ऐसी है जो अब तक झारखंड में बनी हर सरकार का हिस्सा रही है. एक समय के बाद सरकार के खिलाफ मुखर रवैया अख्तियार कर जनपक्षीय इमेज बनाए रखना इसकी रणनीति रही है.

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झारखंड का इतिहास गवाह है कि कोई भी सरकार अपना पांच साल पूरा नहीं कर सकी है. हालांकि विधानसभा ने हमेशा अपना कार्यकाल पूरा किया है.

वर्तमान सरकार भी आजसू पार्टी के चार सदस्यों के साथ चल रही है क्योंकि, 82 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के सिर्फ 38 विधायक ही है. यानी मात्र दो विधायकों का उलटफेर कोई नया गुल खिला सकता है.

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