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किसानों की हालत देख राहुल को नानी याद आईं?

देश में मंदसौर जल रहा है और राहुल गांधी अपनी नानी से मिलने इटली जा रहे हैं

Amitesh Amitesh | Published On: Jun 14, 2017 02:37 PM IST | Updated On: Jun 14, 2017 06:19 PM IST

किसानों की हालत देख राहुल को नानी याद आईं?

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपने ननिहाल जा रहे हैं. जी हां, इटली जा रहे हैं राहुल. इस बात की जानकारी किसी और ने नहीं बल्कि खुद राहुल ने ही ट्वीट कर दी है.

ननिहाल जाने में कोई बुराई भी नहीं है. अपने रिश्तेदारों से मिलना और बुजुर्ग नानी की सेवा करना तो भारतीय संस्कार और संस्कृति का हिस्सा है. कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला का ये तर्क जायज भी है. लेकिन, इस दौरे पर कटाक्ष होने लगे हैं. पहले से ही राहुल गांधी के इटली कनेक्शन को लेकर तंज कसने वाले बीजेपी के नेता अब एक बार फिर से उसी अंदाज में बातें कर रहे हैं.

बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए ट्वीट किया है कि बचपन में हम भी नानी के घर छुट्टियां मनाने जाया करते थे. उधर, राहुल गांधी को पिछले ही दिनों इटालियन भाषा में लिखी गीता पोस्ट करने वाले दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजेंदर सिंह बग्गा ने भी कुछ ऐसा ही ट्वीट किया है.

राहुल के विदेश दौरे की टाइमिंग पर सवाल

राहुल गांधी के विदेश दौरे की टाइमिंग को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं. किसी भी नेता को विदेश दौरे पर जाने का हक है. उसकी निजी जिंदगी में दखल देने का किसी को भी नैतिक अधिकार नहीं है.

लेकिन, राहुल के विदेश दौरे की टाइमिंग उनके दौरे को इस कदर सुर्खियां बना देती है जिसके बाद पूरी कांग्रेस और खुद उनके लिए भी बचाव करना मुश्किल हो जाता है. कांग्रेस के युवराज हंसी के पात्र बनकर रह जाते हैं.

इस वक्त राहुल गांधी कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत में हैं. लेकिन, जल्द ही उनके पार्टी अध्यक्ष बनने को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. उनके उपर इस वक्त सबसे बड़ी जिम्मेदारी दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी को बीजेपी के विकल्प के तौर पर सामने लाने की है. साथ ही खुद को भी प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक बड़े नेता के तौर पर स्थापित करने की है.

इस वक्त देश के राजनीतिक हालात भी ऐसे हैं जिसे भुना कर राहुल खुद को कामयाब बनाने की कोशिश कर सकते हैं. मंदसौर से निकली किसान आंदोलन की आग से देश भर के किसानों में रोष है. मंदसौर जाने की रस्म अदायगी भर करने के बाद उन्हें लगा कि शायद अब बहुत हो गया. वरना इस वक्त किसानों के मुद्दे पर घिरी बीजेपी और सरकार को चक्रव्यूह में घेरने के बजाए विदेश दौर पर न जा रहे होते.

Rahul on a bike on way to Mandsaur

मंदसौर किसान आंदोलन में भड़की हिंसा के दौरान राहुल गांधी ने बाइक पर बैठकर वहां जाने की कोशिश की थी

दूसरी तरफ, आने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है. इसके लिए अधिसूचना जारी हो गई है और अब इस मुद्दे पर मुलाकातों का सिलसिला भी तेज होने लगा है. ऐसे वक्त में राहुल के विदेश जाने का फैसला उनकी संजीदगी का एहसास कराता है कि वो पार्टी के इतने बड़े ओहदे पर होते हुए भी किस कदर खुद को अलग-थलग किए हुए हैं.

वैसे भी पहले से ही राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सोनिया गांधी ही विपक्षी दलों से बात करने और रणनीति बनाने की कमान अपने हाथों में ले रखी हैं. लेकिन, अब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपनी ताजपोशी के करीब पहुंच रहे राहुल का यह रवैया उनके सामर्थ्य और सोच दोनों पर से पर्दा उठाने वाला है.

पहले भी राहुल का विदेश दौरा रहा विवादों में

इस साल यह राहुल गांधी का तीसरा विदेश दौरा है. इसके पहले मार्च में राहुल गांधी अपनी मां सोनिया गांधी के इलाज के सिलसिले में अमेरिका दौरे पर गए थे. हालाकि, तब उनके दौरे को लेकर इतने सवाल नहीं उठे थे क्योंकि उनकी मां की सेहत से जुड़ा मसला था.

लेकिन, इस साल नए साल के जश्न के मौके पर यूरोप के दौरे पर जाने का उनका फैसला सुर्खियों और सवालों के घेरे में रहा. नोटबंदी के दो महीने के अंदर जब साल के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को संबोधित करने वाले थे तो उससे पहले ही राहुल गांधी नए साल का जश्न मनाने विदेश रवाना हो गए.

उस वक्त कांग्रेस की तरफ से मोदी सरकार के उपर नोटबंदी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा रहा था. खुद राहुल गांधी प्रधानमंत्री के खिलाफ लगातार हमलावर थे. विपक्ष की तरफ से नए साल के मौके पर दो और तीन जनवरी को बड़ा प्रदर्शन का आयोजन था लेकिन, इस मौके पर खुद नेतृत्व करने के बजाए राहुल गांधी परदेस में नए साल के जश्न में मशगूल थे.

राहुल गांधी के 2015 के दो विदेश दौरे भी सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में रहे. इस दौरान कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे थे कि राहुल आखिर हैं कहां.

2015 में 16 फरवरी से 16 अप्रैल तक राहुल विदेशी दौरे पर रहे. वो दो महीने तक दक्षिण पूर्व एशिया के देशों का भ्रमण करते रहे. इस दौरान उन्होंने थाइलैंड में 15 दिन, कंबोडिया में 11 दिन, म्यांमार में 21 दिन और वियतनाम में 12 दिन बिताए. इस यात्रा को लेकर भी सस्पेंस था. विरोधी इस दौरान भी उनकी यात्रा को लेकर निशाना साध रहे थे.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सरकार का यह पहला पूर्ण बजट सत्र था लेकिन, इस दौरान राहुल की गैर मौजूदगी ने उनकी सियासी सोच और कदम को लेकर विरोधियों को उनपर ताने मारने का मौका दे दिया था.

rahul gandhi

राहुल गांधी पर आरोप लगता है कि वो संसद में जनता से जुड़े मुद्दों से बेपरवाह बने रहते हैं

लेकिन, इससे राहुल को कोई फर्क नहीं पड़ा और उसी साल सितंबर में बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त उनके फिर से विदेश दौरे पर जाने को लेकर सस्पेंस शुरू हो गया. राहुल कहां हैं ये सवाल सियासी गलियारों में गूंजने लगा जिस पर राहुल गांधी को खुद अपना फोटो ट्वीट करना पड़ गया.

राहुल ने एस्पेन में एक कान्फ्रेंस में शामिल होने की कुछ तस्वीरें ट्वीट कर अपने वहां होने का सबूत दिया था.

इस विवाद के बाद अब राहुल गांधी अपने विदेश दौरे से जाने से पहले ट्वीट कर उसकी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं, जिससे सस्पेंस और सियासी तौर पर कोई ड्रामा न हो.

मोदी का जवाब कैसे देंगे राहुल

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि एक ऐसे नेता की बनी है जो 24 घंटे में से 18 घंटे काम करता है, और एक दिन भी छुट्टी नहीं लेता है. वहीं राहुल की लगातार निजी छुट्टी और विदेश दौरे ने उनके काम करने के तरीके, पार्टी और जनता को लेकर उनकी जवाबदेही और संजीदगी को सवालों के घेरे में लाकर रख दिया है.

राहुल उपहास के पात्र बन रहे हैं. विरोधियों के निशाने हैं. सियासी विरोधी मजाक उड़ा रहे हैं. यहां तक की उनकी अपनी पार्टी के भीतर भी उनकी हरकतों को लेकर कानाफूसी हो रही है. लेकिन, इन सबसे बेखबर राहुल को किस बात की चिंता, उन्हें तो बस नानी के घर जाना है...

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