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यूपी में भले योगीराज हो लेकिन रामपुर में आज़म ख़ान का जलवा बरकरार है

आज़म खान पर किसी भी तरह की कार्यवाही का फैसला लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री के दफ्तर के कहने पर ही होगी.

Faisal Fareed | Published On: May 06, 2017 11:40 AM IST | Updated On: May 06, 2017 01:48 PM IST

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यूपी में भले योगीराज हो लेकिन रामपुर में आज़म ख़ान का जलवा बरकरार है

समाजवादी पार्टी के फायर ब्रांड नेता आज़म खान भले ही सत्ता में न हो लेकिन उनका स्टाइल और जलवा अभी बरकरार हैं. आजम, जिनके घर पैदल चल कर खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मनाने गए थे या फिर उनकी भैंसों के गायब होने पर पुलिस ने रात दिन एक कर दिया हो, वे आजकल अपने जिले रामपुर में हैं.

मंत्री नहीं हैं, सरकार चली गई है लेकिन आज़म अभी भी वजन रखते हैं.

आजकल उनके ऊपर रामपुर में उनके विरोधी तमाम शिकायतों के पुलिंदे लेकर घूम रहे हैं. प्रशासन को लिखित शिकायत दी गयी है. राजभवन तक मामला पहुंचा है लेकिन विरोधियों के सारे दावे सिर्फ दावे साबित हो रहे हैं.

जिला स्तरीय एक अधिकारी के अनुसार आज़म के खिलाफ शिकायतें आईं हैं लेकिन इस संदर्भ में कोई कार्रवाई लखनऊ के निर्देशानुसार ही होगी.

आज़म के खिलाफ शिकायत करना कोई नई बात नहीं हैं. इस बार बात शुरू हुई है लगभग 200 साल पुराने मदरसे की नवाबी काल की बिल्डिंग से जिसपर आज़म खान ने 30 अप्रैल को अपनी जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित रामपुर पब्लिक स्कूल (किड) का उद्घाटन कर दिया.

एकदम से आरोपों की बाढ़ आ गई. विपक्षी दलों और बीजेपी ने मुद्दा बना लिया कि ये ऐतिहासिक इमारत कब्जाने का एक तरीका है. शिकायत राजभवन पहुंची तो गवर्नर राम नाईक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर 'समुचित कार्रवाई' के लिए कहा.

पहले भी ऐसे आरोपों से आज़म खान दो-चार होते रहे हैं. शिकायत करने वाले भी यही थे और नतीजा सबके सामने हैं. जाहिर हैं बिना मजबूत पक्ष के बीजेपी सरकार में आज़म खान जैसे अनुभवी राजनीतिक ने किसी मदरसे की बिल्डिंग में स्कूल तो खोल दिया नहीं होगा. अभी भी आम आदमी आज़म की बुराई नहीं करता.

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रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार की तस्वीर (तस्वीर-ऑफिशियल वेब पेज)

रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार की तस्वीर (तस्वीर-ऑफिशियल वेब पेज)

आसान नहीं है कार्रवाई

अगर आज़म के इस काम में कोई कमी होती तो रामपुर में बीजेपी के नेताओं की कमी नहीं हैं- प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख, केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी, सांसद नेपाल सिंह- सब बीजेपी के हैं. बयान ही जारी हुए कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी और स्कूल चल भी रहा हैं.

एक स्थानीय एसपी नेता की माने तो इतना आसान भी नहीं कार्रवाई करना सब नेताओं ने कहीं न कहीं कुछ कब्जा किया ही है. एसपी सरकार में नकवी की रामपुर वाली कोठी के खिलाफ अवैध कब्जे को लेकर प्रदर्शन भी हो चुका है. एसपी नेता मंत्री ओलख पर भी ऐसा ही आरोप लगा देते हैं.

खुल कर सामने आने वालो में सिर्फ दो लोग हैं- रामपुर के नवाब के वंशज नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां और कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ट के प्रादेशिक वाईस चेयरमैन फैसल खान लाला.

नवेद मियां ने जहां जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया और आज़म पर गंभीर आरोप लगाए वही लाला ने राजभवन में अपनी शिकायत दर्ज कराई जो मुख्यमंत्री को भेज दी गई है.

बात मदरसे की जिससे बवाल शुरू हुआ. ये मदरसा रामपुर में स्थित हैं. स्थानीय लोगों की माने तो इस मदरसे की बुनियाद नवाब फैज़ुल्लाह खान ने 1774 में रखी थी.

फिर 19 जुलाई 1949 को जब रामपुर रियासत का विलय भारत में हुआ तब ये तय हुआ था कि मदरसे का नाम बदल कर ओरिएंटल कॉलेज कर दिया जायेगा और ये चलता रहेगा.

अभी इसमें 1 टीचर, 25 छात्र और 5 कर्मचारी हैं. अब 30 अप्रैल को आज़म खान ने इसमें रामपुर पब्लिक स्कूल (किड्स) खोल दिया. इस स्कूल का संचालन जौहर ट्रस्ट करेगा.

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पत्र

गवर्नर राम नाइक को भेजी गई चिट्ठी की कॉपी

नवाबों के वंशज 

नवाबों के वंशज और पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां जिलाधिकारी से मिले और ज्ञापन दिया. नवेद मियां का आरोप हैं- दिन दहाड़े डकैती डालने जैसा काम हुआ हैं. इस नए स्कूल को सील करना चाहिए. कार्रवाई होनी चाहिए ताकि जनता में संदेश जाए की सरकारी संपत्ति पर कब्जा नहीं किया जा सकता.

नवेद मियां के अनुसार, 'आज़म खान ने कब्जे की नीयत से राजकीय ओरिएंटल कॉलेज को एसपी सरकार रहते हुए ही रजा कॉलेज में शिफ्ट कर दिया था.अब इसमें ये स्कूल खोल दिया. ये सरासर कब्जा किया गया है. इसपर कार्यवाही हो और कब्जा खाली करवाया जाये,' नवेद मियां ने एक लिखित बयान में बताया.

बताते हैं कि जब ये मदरसा अपनी बिल्डिंग से रज़ा कॉलेज शिफ्ट हुआ तब की जिला विद्यालय निरीक्षक माया देवी इस समय एसपी की महिला सभा की जिलाध्यक्ष हैं.

नवाब खानदान और आज़म का हमेशा राजनीतिक विरोध रहा हैं. नवेद मियां के पिता मिक्की मियां और बेगम नूर बानो दोनों कांग्रेस से सांसद रहे हैं. आज़म खान के राजनीतिक रूप से मज़बूत होने से उनकी ज़मीन कमजोर हो गयी है.

रामपुर के नवाब नवेद मियां और उनके बेटे अब्दुल्ला नवेद

रामपुर के नवाब नवेद मियां (दाएं) और आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला ख़ान

पिछली सरकार में आज़म खान पर आरोप लगा कि उन्होंने नवाबी काल की कई इमारतें व गेट रामपुर में ध्वस्त करवा दिए थे. ये बात अलग हैं की रिपोर्ट में ये गेट खतरनाक बताये गए थे.

कई अन्य प्रॉपर्टी जो वक्फ के अधीन थी और नवेद मियां जिसके मुतवल्ली थे वो वक्फ बोर्ड ने कब्जा वापस ले लिया था और नवेद मियां हटा दिए गए थे.

शिकायतें तब भी हुईं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. आज़म हमेशा से ये मानते रहे और जनता में कहते भी रहे- नवाबों की मंशा पूरी नहीं होगी अब रामपुर में शिक्षा के केंद्र खुलेंगे. इसी क्रम में उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी बनवाईं, मेडिकल कॉलेज बनाया और स्कूल खोले.

उनपर आरोप लगे कि उसमे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ लेकिन वो पैसा बाकायदा बजट के प्रावधान में शामिल था. अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री बलदेव सिंह ओलख चूंकि रामपुर के ही हैं तो उन्होंने कह दिया की अब वो जौहर यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में ही जनता दरबार लगाएंगे.

हालांकि, अभी कोई तारीख तय नहीं है. पिछले तीन दिन से बीजेपी नेता के सिर्फ बयान छपवा रहे हैं कि जौहर यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में जनता दरबार लगेगा. ये गेस्ट हाउस पीडब्लूडी बनवा रहा है और राज्य सरकार द्वारा पैसा दिया गया है.

आज़म ने जौहर यूनिवर्सिटी में मुलायम का जन्मदिन मनाया तब भी आरोप लगे. यूनिवर्सिटी में तमाम दर्शनीय चीजें जैसे स्टेचू, पुरानी कार, एक आश्रम, गेस्ट हाउस और तमाम सहूलियत मौजूद हैं. मौजूद वक्त में यूनिवर्सिटी चल रही है और बच्चे वहां पढ़ रहे हैं.

उधर कांग्रेस के अप्ल्संख्यक प्रकोष्ठ के वाईस चेयरमैन फैसल खान लाला ने राजभवन में शिकायत दर्ज करायी. उन्होंने सरकारी धन का दुरूपयोग, गरीबों का घर उजाड़ने, जौहर यूनिवर्सिटी में सरकारी पैसे से काम करवाने का आरोप लगाया.

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Tazeen fatma

आज़म खान की पत्नी तजीन फातमा जौहर यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर हैं  (तस्वीर-ऑफिशियल वेब पेज)

राज्यपाल को शिकायत

राज्यपाल ने उनकी शिकायत अपने पत्र के साथ मुख्यमंत्री को भेज दी. जिसमें उन्होंने 'समुचित कार्यवाही' हेतु लिखा हैं. लाला हमेशा से आज़म को अपना विरोधी मानते रहे हैं.

एसपी सरकार में भी उन्होंने राजभवन में शिकायतें की थीं. बात न बनते देखकर एक बार लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान रो भी पड़े थे. लाला का मानना है की वो एक व्यापारी हैं और उनकी प्लाईवुड की फैक्ट्री हैं और उस पर भी आज़म ने कार्रवाई करवाई थी.

इस बीच सेंट्रल वक्फ कौंसिल के सदस्य सय्यद एजाज़ अब्बास ने रामपुर के डी एम और एसपी को पत्र लिख कर आज़म खान, उनकी पत्नी तजीन फातिमा और वक्फ के अधिकारियो के खिलाफ कार्यवाही करने को कहा.

आरोपों के बीच आज़म खान ने स्थानीय मीडिया को बताया की अगर स्कूल पर आंच आई तो वो बच्चों को लेकर सड़क पर बैठ करके उनको पढ़ाएंगे. उन्होंने दावा किया की हर हाल में बच्चों को शिक्षा दी जाएगी.

इस वक़्त आज़म के बेटे अब्दुल्लाह आज़म भी विधायक हैं उन्होंने नवेद मियां को हराया है. आज़म की पत्नी तजीन फातिमा राज्यसभा सांसद हैं. आज़म समर्थको का निशाना सीधे नवाब परिवार पर हैं. आरोप हैं की वो बच्चों को पढ़ते हुए नहीं देख सकते.

इतना सब होने के बाद भी अभी जिला प्रशासन तय नहीं कर पा रहा है कि क्या कार्यवाही करें. एक अधिकारी ने बताया कि सारी फाइल और शिकायत लखनऊ शासन को भेजी जाएगी जैसा आदेश आएगा वैसा किया जायेगा.

मतलब साफ हैं स्थानीय नेता चाहे मंत्री क्यों न हो, आज़म खान पर किसी भी तरह की कार्रवाई का फैसला लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री के दफ्तर के कहने पर ही होगी.

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