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कश्मीर पर फारूक के विवादित बोल - अमेरिका सुलझाए मसला

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने कश्मीर में पत्थर फेंकने वालों का समर्थन किया है.

FP Staff Updated On: Apr 05, 2017 05:45 PM IST

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कश्मीर पर फारूक के विवादित बोल - अमेरिका सुलझाए मसला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है. उन्होंने कश्मीर में पत्थर फेंकने वालों का समर्थन किया है. 9 अप्रैल को श्रीनगर में होने वाले लोकसभा उपचुनावों के लिए अपनी पार्टी का प्रचार करते हुए उन्होंने कहा, मैं पीएम मोदी को बता देना चाहता हूं कि जो लोग पत्थर मारते हैं या फिर जिन लोगों ने हथियार उठाए हैं, उनका पर्यटन से कोई लेना देना नहीं है.

पूर्व सीएम ने कहा, ये लोग अपने देश के लिए लड़ रहे हैं. अगर पाकिस्तान और भारत मुद्दा नहीं सुलझा पा रहे हैं, तो अमेरिका को आगे आना चाहिए और थर्ड पार्टी के रूप में दोनों देशों के बीच के विवाद को सुलझाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये पीडीपी या फिर नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसी पार्टियों के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि ये लड़ाई सांप्रदायिक ताकतों को हराने और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए है.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि निकी हेली ने कहा था कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है और इसलिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया में शामिल होकर इसे सुलझाना चाहते हैं.

ट्रंप प्रशासन में कैबिनेट रैंक रखने वालीं हेली ने कहा था, भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित मौजूदा अमेरिकी प्रशासन इसे कम करने की दिशा में अपनी भूमिका पर विचार कर रहा है. यह भी संभव है कि राष्ट्रपति स्वयं इसमें भागीदार बनें और इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा.

उल्लेखनीय है कि भारत, पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी भी बाहरी पक्ष की भागीदारी का विरोध करता रहा है. इस बार भी भारतीय विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकराते हुए साफ कर दिया है कि भारत सरकार पहले से ही कह चुकी है कि आतंकवाद और हिंसा के माहौल में बातचीत संभव नहीं है, ऐसे माहौल में द्विपक्षीय बातचीत नहीं हो सकती.

ट्रंप ने 2016 में अपने चुनाव प्रचार के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा तभी होगा जब दोनों देश यह चाहेंगे.

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