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3 साल बाद गृहमंत्री को अफसरशाही की लेटलतीफी समझ में आ ही गई

राजनाथ सिंह तय समय से पहले 9.40 बजे ही वहां पहुंच गए. लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी

Sanjay Singh Updated On: Apr 21, 2017 12:39 PM IST

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3 साल बाद गृहमंत्री को अफसरशाही की लेटलतीफी समझ में आ ही गई

गृहमंत्री राजनाथ सिंह आमतौर पर नाराज नहीं होते. ठोस कारण होने पर ही वह भड़कते हैं और सार्वजनिक रूप से अपने गुस्से का इजहार करते हैं.

गुरुवार को देश के शीर्ष नौकरशाहों को यह बात समझ में आ गयी होगी कि गवर्नेंस के सामान्य नियमों के पालन की बात हो तो हीला-हवाली नहीं चलेगी.

दिल्ली के विज्ञान भवन में 11वें सिविल सर्विसेज-डे दो दिवसीय समारोह का सुबह 9.45 बजे उद्घाटन होना था. राजनाथ सिंह तय समय से पहले 9.40 बजे ही वहां पहुंच गए. लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी.

सरकारी बाबू समय पर कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी नहीं कर सके थे. इन्हीं बाबुओं पर निर्धारित समय सीमा में लोगों को सेवाएं मुहैया कराने और सरकारी नीतियों को लागू करने कराने की जिम्मेदारी है.

गृहमंत्री की नाराजगी के बाद आईएएस अफसरों का कार्यक्रम करीब 12 मिनट की देरी से 9.57 पर शुरू हुआ. अपने उद्घाटन भाषण में राजनाथ सिंह ने बाबुओं की जमकर क्लास लगाई. उन्होंने चेताया कि उनकी सरकार के कुछ नियम हैं. इन नियमों में समय से कार्यक्रम संचालित करना भी शामिल है.

इस वाकये से एक बात साफ तौर पर समझी जा सकती है कि केंद्र सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले गृहमंत्री की मौजूदगी में अधिकारियों का ऐसा रवैया है तो सरकारी दफ्तरों में अपना काम कराने आने वाले आम नागरिकों के साथ उनका बर्ताव कैसा होता होगा.

स्वाभाविक है कि राजनाथ सिंह कोई बहानेबाजी सुनने के मूड में नहीं थे. उन्होंने कहा, ‘मैं 9.40 पर आ गया था. लेटलतीफी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.’

2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार नई कार्य संस्कृति-समय की पाबंदी, स्वच्छता और पारदर्शिता– पर जोर दे रही है. सरकार ने तेजी से सेवाएं मुहैया कराने और तय समय में नीतियों को लागू करने के लिए कई कदम उठाए हैं.

यह महज संयोग नहीं है कि एक दिन पहले ही सरकार ने दशकों से वीआईपी कल्चर की प्रतीक बनी लाल बत्ती पर रोक लगाई और एक दिन बाद ही बाबुओं ने अपनी असल संस्कृति का परिचय दे दिया.

ये भी पढ़ें: मैं वक्त पर पहुंचा, कार्यक्रम 12 मिनट देर क्यों शुरू हुआ

गृह मंत्री को समझ में आ गया होगा कि वीआईपी कल्चर एक मनस्थिति है जो लाल बत्ती के अलावा तमाम अन्य रूपों में सामने आती है. पहले से तय कार्यक्रम की शुरूआत के लिए गृहमंत्री को इंतजार करना पड़े, यह बिगड़ैल बाबुओं की उसी संस्कृति का नमूना है.

गृह मंत्री की इस बात के लिए सराहना की जानी चाहिए कि फटकार लगाने के बाद उन्होंने अधिकारियों के मनोबल को भी बढ़ाया. उन्होंने बताया कि वे किस तरह निष्पक्ष रह सकते हैं और उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.

गृहमंत्री के ट्विटर हैंडल पर अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी आए. गृहमंत्री ने ट्वीट किया कि, ‘अगर आप से कोई गलत काम करने को कहा जाता है तो विनम्रता से मना कर दीजिए और बता दीजिए के यह काम कानून सम्मत नहीं है.’

 

राजनाथ सिंह ने नये अधिकारियों से कहा कि उन्हें किसी सियासतदान से डरने की जरूर नहीं है.देश और जनता के हित में फैसले लिए जाने चाहिए. आप को खुले दिमाग से नियम कायदों की व्याख्या और उसे लागू करना चाहिए.

 

पहले दो दिशा निर्देश अधिकारियों को बेहद अच्छे लगे होंगे. राजनाथ सिंह ने इस मौके पर देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के बयान का भी जिक्र किया. पटेल ने नौकरशाही को भारतीय लोकतंत्र के लिए इस्पात का ढांचा बताया था. ‘सरकारें तो आती जाती रहती हैं, लेकिन नौकरशाही बदस्तूर जारी रहती है.’

 

गृहमंत्री ने नवनियुक्त अधिकारियों से कहा कि उन्हें इतनी कम उम्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है. उनके पास रुतबे के साथ सभी सुविधाएं भी है. लिहाजा उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे आम जनता के हित में प्रभावशाली तरीके से काम करें.

गृहमंत्री ने कहा, ‘विकास और गुड गवर्नेंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है. तकनीकी की मदद से अधिकारी लोगों को तीव्र गति से सेवाएं मुहैया करा सकते हैं.’

 

गृहमंत्री ने अधिकारियों को आगाह किया कि वे रूतबे और ताकत वाले पदों पर आसीन हैं. ताकत के साथ उन्हें अपनी जिम्मेदारी का भी अहसास होना चाहिए और जवाबदेही को नहीं भूलना चाहिए.

‘अधिकारियों को समस्या का नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनना चाहिए.’

 

राजनाथ सिंह अपने अनुभवों के आधार पर बोल रहे थे. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, वाजपेयी सरकार में मंत्री और मोदी सरकार में गृहमंत्री रहते ये अनुभव संचित किये हैं.

नौकरशाही राजनाथ सिंह के दिशा निर्देशों को किस तरह लागू करती है और नई कार्य संस्कृति को अपनाती है या नहीं, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. लेकिन इतना तो तय है कि वे समय के प्रति पाबंद न होने पर गृह मंत्री की खरी-खोटी को नहीं भूल पाएंगे.

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