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गुरदासपुर उपचुनाव: कांग्रेस की जीत को बीजेपी की हार मानना भूल होगी

गुरदासपुर के स्थानीय लोगों के मुताबिक अभिनय की दुनिया से राजनीति की दुनिया में आये मजबूत कद-काठी के विनोद खन्ना ने किसी दीवार की मानिन्द खड़े होकर अपने निर्वाचन क्षेत्र को विरोधियों से बचा रखा था

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Oct 16, 2017 10:25 AM IST

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गुरदासपुर उपचुनाव: कांग्रेस की जीत को बीजेपी की हार मानना भूल होगी

बॉलीवुड के माचोमैन और अपने नाजो-अंदाज के लिए मशहूर अभिनेता विनोद खन्ना की मौत इस साल 27 अप्रैल को हुई लेकिन उनके ना रहने का असली नुकसान बीजेपी को बीते रविवार को महसूस हुआ.

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और तीन दफे विधायक रह चुके सुनील जाखड़ ने गुरदासपुर का उपचुनाव 1.93 लाख मतों से जीत लिया. जाखड़ पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह के विश्वस्त सहयोगी माने जाते हैं. गुरदासपुर की सीट बीजेपी के नेता और सांसद विनोद खन्ना की मौत से खाली हुई थी और वहां चुनाव कराना जरूरी था. विनोद खन्ना ने 1998-2009 और फिर 2014-2017 के बीच गुरदासपुर लोकसभा चुनाव-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया.

पार्टी के टिकट से जाखड़ के नामांकन पर अपनी मंजूरी की मुहर लगाने वाले कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ट्वीट किया “गुरदासपुर उपचुनाव भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के फिर से उठ खड़े होने की दिशा में एक बड़ा कदम है. साफ जाहिर है कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी उभार पर है.”

बेशक यह कांग्रेस की बड़ी जीत है लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों के लिहाज से बीजेपी की संभावनाओं को खारिज करना एक जल्दबाजी होगी, जैसा कि विपक्ष सोचता दिख रहा है. याद रहे कि 2014 के चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने 282 सीटें झटकते हुए एक धमाकेदार जीत दर्ज की थी.

आज की जीत पर उछलने वाले विपक्षियों को किसी फैसले पर छलांग मारकर पहुंचने से पहले 2019 तक अपने को लगाम देना होगा. यह बात याद रखनी होगी कि कांग्रेस गुरदासपुर की सीट विनोद खन्ना की मौत के बाद ही जीत पायी. विनोद खन्ना ने 2014 में पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा को हराया था.

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गुरदासपुर में विनोद खन्ना का जादू बोलता था

गुरदासपुर के स्थानीय लोगों के मुताबिक अभिनय की दुनिया से राजनीति की दुनिया में आये मजबूत कद-काठी के विनोद खन्ना ने किसी दीवार की मानिन्द खड़े होकर अपने निर्वाचन क्षेत्र को विरोधियों से बचा रखा था. गुरदासपुर में पठानकोट, दीनानगर, कादियान, बटाला, फतेहगढ़ चूरियां, डेरा बाबा नानक, गुरदासपुर, सुजानपुर और भोवा नाम के नौ विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता था लेकिन विनोद खन्ना ने इसे पहली बार बीजेपी के लिए जीत कर दिखाया.

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शिरोमणि अकाली दल और बादल के खिलाफ तेज लहर होने के बावजूद विनोद खन्ना गुरदासपुर की सीट से जीते थे. उस वक्त कयास लगाये जा रहे थे कि बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस या फिर आम आदमी पार्टी गुरदासपुर की सीट जीत सकती है. आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुच्चा सिंह छोटेपुर को यहां से उम्मीदवार बनाया था और उनकी जीत की संभावनाएं ज्यादा थीं लेकिन विनोद खन्ना की छवि और आकर्षण के जादू के आगे सारी चुनावी भविष्यवाणियां धरी की धरी रह गयीं.

इन पंक्तियों के लेखक को 2014 के लोकसभा चुनावों को कवर करने का मौका मिला था और इसी सिलसिले में वह एक दफे विनोद खन्ना की गुरदासपुर की रैली में पहुंचे थे. अभिनय की बुलंदियों को छूने वाले एक्टर विनोद खन्ना जैसे ही बोलने के लिए उठे, मतदाताओं ने उनसे आग्रह किया कि 1971 की सुपरहिट फिल्म मेरा गांव मेरा देश की दो पंक्तियां सुनाइए - “ जब्बर सिंह ने दो बातें सीखी हैं. एक, मौका फायदा उठाना. दो, दुश्मनों का नाश करना."

खन्ना ने इस बात को चुनावों में विजयी होकर साबित किया. उनका करिश्माई व्यक्तित्व और इलाके में किए गए काम बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुए. व्यास, रावी और ऊझ नदियां गुरदासपुर को शेष पंजाब से जोड़ती हैं और इन नदियों पर छोटे-बड़े एक दर्जन पुल बनवाने में विनोद खन्ना ने अहम भूमिका निभायी. साथ ही, गरीब मरीजों के लिए निशुल्क हार्ट-सर्जरी के मेडिकल कैंप लगवाये.

Sunil Jakhar Amrinder singh

विनोद खन्ना के न रहने से कांग्रेस की जीत आसान

बीजेपी को इस उपचुनाव में अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल की वजह से विशेष घाटा उठाना पड़ा है. प्रकाश सिंह बादल के पिछले शासन के दौरान गुरदासपुर में मादक पदार्थों का धंधा बड़े पैमाने पर फैल गया था, नशे की लत यहां एक सामाजिक समस्या बनकर उभरी और इसने लोगों को कांग्रेस के पक्ष में करने का काम किया जिसकी वजह से कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अगुवाई में पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता में लौटी.

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बादल के खिलाफ लोगों का भारी गुस्सा, नशे की गिरफ्त में आने के कारण शिरोमणि अकाली दल के खिलाफ गुरदासपुर में लोगों का आक्रोश और विनोद खन्ना के करिश्मे की गैरमौजूदगी, उपचुनाव में बीजेपी की हार में इन सारी बातों का योगदान रहा.

“ गुरदासपुर में हमलोग विनोद खन्ना के सिवा और किसी के बारे में सोचते ही नहीं थे. विनोद खन्ना के करिश्मे की बात तो थी ही लेकिन 2014 में उनको यहां लोगों ने इसलिए भी बड़ी संख्या में वोट डाला क्योंकि पीएम मोदी चुनाव की अगुवाई कर रहे थे. हमलोग मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और विनोद खन्ना दोनों ही की जीत देखना चाहते थे और ऐसा हुआ भी. उनके ना रहने से एक बड़ी खला पैदा हुई है और इसी कारण कांग्रेस के लिए गुरदासपुर की सीट जीतना आसान साबित हुआ. इसके अलावे अब सूबे में कांग्रेस की सरकार है और लोगों को कैप्टन अमरिन्दर सिंह से बहुत उम्मीदें भी हैं.” फर्स्टपोस्ट से ये बातें गुरदासपुर के एक कारोबारी तेजिन्दर सिंह खालसा ने बतायीं.

गुरदासपुर के लोग सोचते हैं कि बीजेपी कोई कद्दावर उम्मीदवार खड़ा करेगी, ऐसा उम्मीदवार जो विनोद खन्ना के ना रहने से पैदा हुई खला को आने वाले समय में भर सके. आज दिन तक यहां के लोगों को याद है कि कैसे बॉलीवुड के मंझे हुए अभिनेता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से अपनी सरकारी परियोजनाओं की मंजूरी हासिल की थी और उन्हें कामयाबी से लागू करवाया था.

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