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GST पर भी विपक्षी एकता तार-तार, नीतीश एनडीए के साथ!

कांग्रेस ने जीएसटी कार्यक्रम का बहिष्कार करने से पहले विपक्षी दलों को भरोसे में ही नहीं लिया

Amitesh Amitesh Updated On: Jun 30, 2017 02:47 PM IST

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GST पर भी विपक्षी एकता तार-तार, नीतीश एनडीए के साथ!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जीएसटी के कार्यक्रम में खुद तो शिरकत नहीं करेंगे लेकिन, उनके प्रतिनिधि के तौर पर वाणिज्य कर मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव संसद के भीतर होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करेंगे.

जेडीयू की तरफ से जीएसटी पर संसद में होने वाले विशेष समारोह में शामिल होने के एलान ने विपक्षी एकता को तार-तार कर दिया है. खासतौर से बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के साथ सरकार चला रही जेडीयू ने एक बार फिर से इन दोनों के रुख से अपने-आप को अलग कर लिया है.

जेडीयू के इस कदम को एक बार फिर से महागठबंधन में दरार के तौर पर देखा जा रहा है. जेडीयू प्रवक्ता नीरज शेखर ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत में बताया कि ‘बिहार एक कंज्युमर स्टेट है लिहाजा पार्टी मानती है कि जीएसटी लागू होने के बाद से बिहार को फायदा मिलेगा.’ उनके मुताबिक, ‘हम भले ही बिहार में साथ सरकार चला रहे हैं लेकिन, राष्ट्र हित से जुड़े मुद्दों पर हमारा अलग स्टैंड रहा है.’

जेडीयू के रुख से साफ है कि उसे अपने सहयोगी दलों की नाराजगी की परवाह नहीं है. हालांकि आरजेडी फिलहाल इस मुद्दे पर संभलकर प्रतिक्रिया दे रही है. आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा का कहना है कि ‘गठबंधन एक है लेकिन, दल अलग-अलग हैं. ऐसे में सभी दलों को इतनी स्वायत्तता तो होनी ही चाहिए कि वो कई मुद्दों पर अलग रुख अपना सके.’

Lalu Prasad Yadav Nitish Kumar (1)

नीतीश का एक बार फिर अलग स्टैंड

कांग्रेस ने पहले ही साफ कर दिया है कि उसका कोई भी प्रतिनिधि जीएसटी पर संसद के सेंट्रल हॉल में होने वाले प्रोग्राम में शिरकत नहीं करेगा.

नीतीश कुमार की तरफ से एक बार फिर से अपना अलग स्टैंड लेना साफ दिखाता है कि वो किसी दबाव में नहीं दिख रहे हैं. पहले डिमोनिटाइजेशन पर सरकार के कदम के साथ खड़े होने के बाद उन्होंने तो एक कदम और आगे बढ़कर  बेनामी संपत्ति को लेकर भी सख्ती दिखा दी थी.

उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर जब कांग्रेस के नेता सैन्य कारवाई के सबूत मांग रहे थे तो उस वक्त भी नीतीश कुमार ने अपने सहयोगी दलों की परवाह किए बगैर पूरी मुश्तैदी के साथ मोदी सरकार के कदम के साथ खड़े दिखे.

इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव के वक्त विपक्ष के साझा उम्मीदवार को समर्थन पर ना और एनडीए उम्मीदवार को हां कहकर उनकी तरफ से एक ऐसी सियासी चाल चली गई जिसमें बिहार के महागठबंधन के संभावित बिखराव की एक धुंधली तस्वीर दिखने लगी.

ModiNItish2

 कई पार्टियों ने जीएसटी समरोह का किया बहिष्कार

इसके बाद आरजेडी-कांग्रेस के साथ जेडीयू की बयानबाजी ने इस खाई को और चौड़ा कर दिया. लेकिन, अब जीएसटी सत्र में आरजेडी-कांग्रेस से अलग रुख अख्तियार कर नीतीश कुमार ने एक बार फिर से उन अटकलों को हवा दे दी है, जिससे लालू भी परेशान हैं और कांग्रेस भी.

कांग्रेस के अलावा लेफ्ट पार्टियां, टीएमसी और डीएमके ने भी जीएसटी के समारोह का बहिष्कार करने का फैसला किया है.

कांग्रेस इस प्रोग्राम को मोदी सरकार का पब्लिसिटी स्टंट बता रही है. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इसके पहले केवल आजादी के वक्त 1947 में और फिर आजादी के सिल्वर जुबली और गोल्डेन जुबली के मौके पर ही संसद में रात 12 बजे इस तरह का प्रोग्राम हुआ था.

उनका आरोप है कि बीजेपी आजादी में कोई योगदान नहीं रहा. लिहाजा अब इस तरह के कार्यक्रम कर रही है.

दरअसल, कांग्रेस को लगता है कि जीएटी को लाने की कोशिश उसके ही शासन काल में हुई थी लेकिन, उस वक्त इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था.

अब मोदी सरकार इसका श्रेय लेने की पुरजोर कोशिश कर रही है. टैक्स सुधार से लेकर आर्थिक आजादी कहा जा रहा है. यही वजह है कि इस आर्थिक आजादी का ढिंढोरा पीटने के लिए आधी रात संसद में भव्य कार्यक्रम हो रहा है.

इसीलिए कांग्रेस इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर रही है. लेकिन, लगता है कि कांग्रेस ने जीएसटी के मुद्दे पर भी ठीक से होम वर्क नहीं किया. वरना इस तरह से विपक्ष बिखरा-बिखरा सा नजर नहीं आता.

Sonia Gandhi

जीएसटी का बहिष्कार करना कांग्रेस का एकतरफा फैसला

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने जीएसटी कार्यक्रम का बहिष्कार करने से पहले विपक्षी दलों को भरोसे में ही नहीं लिया. कांग्रेस का ये फैसला एकतरफा है जिसके बाद जेडीयू के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता.

कांग्रेस को भले ही कुछ विपक्षी दलों का साथ मिल रहा है लेकिन, इस कार्यक्रम में जेडीएस के सभी सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा शिरकत करेंगे जबकि एनसीपी भी इसमें शामिल होगी. अब तो एसपी ने भी यू-टर्न लेते हुए कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है. एसपी अब जीएसटी पर संसद के भीतर समारोह का हिस्सा बनेेगी. हालांकि वो जीएसटी का विरोध जारी रखेगी.

फिलहाल विपक्षी एकता की एक और बड़ी परीक्षा जल्द होगी जब उपराष्ट्रपति पद के लिए 5 अगस्त को चुनाव होगा. यहां भी नजरें नीतीश कुमार पर ही टिकी रहेंगी.

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