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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने ममता पर किया पलटवार, राजनाथ ने किया हस्तक्षेप

केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा है कि मुख्यमंत्री के आरोप राज्यपाल और उनके पद का अपमान करने के बराबर हैं

Bhasha | Published On: Jul 05, 2017 10:39 PM IST | Updated On: Jul 05, 2017 10:47 PM IST

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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने ममता पर किया पलटवार, राजनाथ ने किया हस्तक्षेप

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पलटवार किया. ममता के आरोपों को खारिज करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि उनके आरोप बेबुनियाद हैं और उनका मकसद राज्य के लोगों को भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल करना है.

इससे पहले ममता ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि राज्यपाल ने बातचीत के दौरान उन्हें अपमानित किया. इस बीच, केंद्र ने विवाद शांत करने के लिए दखल दिया है.

राजनाथ ने कहा दोस्ताना तरीके से करें विवाद का हल 

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने त्रिपाठी और ममता से अलग-अलग बात की है. समझा जाता है कि राजनाथ ने दोनों से कहा है कि वे अपने मतभेद दोस्ताना तरीके से हल करें.

नार्थ 24 परगना जिले में एक आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के बाद कायम हुए सांप्रदायिक तनाव को लेकर हुई इस कहासुनी के बीच तृणमूल कांग्रेस ने त्रिपाठी को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से वापस बुलाने की मांग की और उन पर संवैधानिक शुचिता से समझौता करने का आरोप लगाया.

सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने त्रिपाठी पर ताजा हमला बोलते हुए उन पर सभी संवैधानिक सीमा 'लांघने' का आरोप लगाया और उन्हें याद दिलाया कि राजभवन 'बीजेपी का पार्टी दफ्तर नहीं हो सकता.' केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सांप्रदायिक हिंसा पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद राजनाथ ने त्रिपाठी और ममता से फोन पर अलग-अलग बात की और हालात का जायजा लिया.

नयी दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राजनाथ ने संभवत: त्रिपाठी और ममता से कहा कि वे दोस्ताना तरीके से अपने मतभेद सुलझाएं. दो दिन में राजभवन की ओर से जारी दूसरे बयान में त्रिपाठी ने ममता के इस आरोप को बेबुनियाद करार दिया कि राज्यपाल ने  नार्थ 24 परगना जिले के बदुरिया में हुई हिंसा के मुद्दे पर हालात की जानकारी लेने के दौरान मुख्यमंत्री को फोन पर 'अपमानित' किया और 'धमकी' दी.

बयान के मुताबिक, 'राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों एवं सीमाओं को अच्छी तरह जानते हैं और उन्हें इस बाबत किसी से कोई सबक नहीं लेना.'

त्रिपाठी ने कहा असल मुद्दे से लोगों को भटका रही हैं ममता 

त्रिपाठी ने बयान में कहा, 'मेरे खिलाफ आरोप लगाने की बजाय बेहतर होगा कि मुख्यमंत्री और उनके सहकर्मी जाति, मजहब या समुदाय के आधार पर भेदभाव किए बिना राज्य में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर अपना ध्यान केंद्रित करें.'

राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'राज्यपाल का मानना है कि राजभवन राज्य सरकार का कोई विभाग नहीं है और यह हर नागरिक के लिए खुला है ताकि वह अपनी शिकायत के निदान के लिए संपर्क करे.'

उन्होंने कहा, 'यह कहना गलत है कि राजभवन बीजेपी या आरएसएस का दफ्तर बन गया है.' त्रिपाठी ने कहा, 'उनका (ममता बनर्जी का) आरोप बेबुनियाद है और इसका मकसद पश्चिम बंगाल के लोगों को भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल करना है.' राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि 'राजभवन से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि यदि कोई व्यक्ति राज्यपाल या राज्यपाल कार्यालय को कोई ज्ञापन दे तो उसे फाड़ दिया जाए या कचरे के डिब्बे में फेंक दिया जाए. जब भी किसी व्यक्ति ने ऐसा कोई ज्ञापन दिया, तो उसे उचित कार्रवाई के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया.'

ममता का बयान राज्यपाल का अपमान है

तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि यह राज्य सरकार की खामियों को ढकने और असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है. चटर्जी ने कहा था कि राज्यपाल अपनी संवैधानिक सीमाएं लांघ रहे हैं.

बयान के मुताबिक, 'राज्यपाल को माननीय शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के बयान से अवगत कराया गया है और उन्हें खेद के साथ यह कहना पड़ रहा है कि यह राज्य सरकार की खामियों को ढकने और असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है.'

राज्यपाल होने के बाद भी राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने को लेकर ममता की ओर से की गई टिप्पणी की आलोचना करते हुए त्रिपाठी ने कहा, 'यह सच है कि मुख्यमंत्री को लोगों ने लोकतांत्रिक तौर पर चुना है, लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि लोकतांत्रिक तौर पर ही चुनी गई केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने राज्यपाल की नियुक्ति की है.' उन्होंने कहा, 'असल में मुख्यमंत्री के आरोप राज्यपाल और उनके पद का अपमान करने के बराबर हैं.'

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