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गोरखपुर त्रासदी: मौत के मातम के बीच जन्माष्टमी के जश्न का क्या तुक है

जरा सोचिए उन परिवारों पर क्या बीत रही होगी जिनके घर का चिराग गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में काल के गाल में समा गया

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 14, 2017 04:19 PM IST

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गोरखपुर त्रासदी: मौत के मातम के बीच जन्माष्टमी के जश्न का क्या तुक है

गोरखपुर में मासूमों की मौत के बाद हड़कंप मचा है. लगातार आलोचना के बाद सरकार की नींद खुली. जब डैमेज कंट्रोल की कोशिश हुई तो उस वक्त भी नेताओं के बड़बोले बयानों ने दर्द पर मरहम लगाने के बजाए दर्द को और बढ़ा ही दिया.

एक तो सरकारी महकमे की लापरवाही और दूसरा सरकार के नुमाइंदों की अपनी वाहवाही दोनों ने लोगों के जले पर नमक छिड़कने का ही काम किया है. अब नींद से जागी सरकार इंसाफ दिलाने की बात कर रही है. आगे इस तरह के वाक्ये ना हो इसके लिए इंतजाम करने की बात भी कही जा रही है.

लेकिन, हकीकत यही है कि इस वक्त गोरखपुर ही नहीं पूरा उत्तर प्रदेश गमगीन है. प्रदेश के साथ-साथ पूरा देश भी मासूमों की मौत पर आंसू बहा रहा है.

लेकिन, अपने शहर गोरखपुर पहुंचकर आंसू बहाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए लगता है ये दुख क्षणिक है. पल भर के लिए ही उनके भीतर का कोमल हृदय जाग उठा. वो भावुक भी हो गए. दोषियों के खिलाफ कारवाई की बात भी कह गए.

लेकिन, गोरखपुर से लखनऊ पहुंचते योगी का कोमल हृदय अब इस कदर कठोर हो गया कि उनके भीतर की भावुकता और मासूमों की मौत का दर्द पल भर में ही खत्म होता दिखा.

योगी अब जश्न की तैयारी में दिखने लगे. जी हां जश्न जन्माष्टमी का. योगी सरकार बनने के बाद इस पहली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मुख्यमंत्री अपने सूबे के डीजीपी को बकायदा निर्देश दे गए.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी सुलखान सिंह को निर्दश दिया कि जन्माष्टमी एक बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार है. लिहाजा पुलिस की तरफ से इसका परंपरागत और भव्य तरीके से आयोजन किया जाए.

अपने मुख्यमंत्री की तरफ से इस तरह के निर्देश मिलने के बाद डीजीपी ने भी यूपी के सभी जिलों के पुलिस महकमे के मुखिया को पत्र लिखकर भव्य तरीके से जन्माष्टमी मनाने को कहा है.

मुख्यमंत्री की तरफ से अपने प्रदेश के पुलिस विभाग के मुखिया को इस तरह जन्माष्टमी के भव्य आयोजन के निर्देश देने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब एक तरफ प्रदेश के भीतर 65 बच्चे विगत दिनों अस्पताल की लापरवाही के शिकार होकर मौत के मुंह में समा जाते हैं, तो फिर उनकी मौत की त्रासदी के बीच जन्माष्टमी के जश्न का क्या मतलब. क्या जन्माष्टमी को सीधे साधे तरीके से नहीं मनाया जा सकता.

जरा सोचिए उन परिवारों पर क्या बीत रही होगी जिनके घर का चिराग गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में काल के गाल में समा गया. कृष्ण के जन्म का जश्न भला उस घर में कैसे मन रहा होगा जिनका अपना कृष्ण-कन्हैया मौत की नींद सो गया.

लेकिन, इन सभी बातों से बेखबर योगी जी तो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के जश्न की तैयारी में लगे हैं. ये जश्न उस गोरखपुर में भी होगा, जहां मौत का मातम पसरा हुआ है.

काश वो मासूम जिंदा होते तो इस बार की जन्माष्टमी में कान्हा की भूमिका में होते. उनके घरों में भी जश्न होता. लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा. उनके परिवार वाले बिलख रहे होंगे और यूपी का पुलिस-प्रशासन जन्माष्टमी के जश्न में डूबा होगा. भावुक होते योगी का यह संवेदनहीन फैसला परेशान करने वाला है.

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