S M L

गोवा में बीजेपी के लिए चला कैथोलिक कार्ड

गोवा में बीजेपी के लिए 8 कैथोलिक उम्मीदवार उतारना सही साबित हुआ

David Devadas Updated On: Mar 13, 2017 09:33 AM IST

0
गोवा में बीजेपी के लिए चला कैथोलिक कार्ड

बीजेपी को भले ही एक हिंदू पार्टी के तौर पर जाना जाता हो, लेकिन गोवा में इसके विधायक दल के करीब आधे सदस्य कैथोलिक ईसाई हैं.

गोवा में बीजेपी के 8 कैथोलिक उम्मीदवारों को उतारना सही साबित हुआ है.

हालांकि, पार्टी 40 विधानसभा सदस्यों वाले गोवा में केवल 13 सीटें हासिल करने में ही सफल रही है, लेकिन इसके ज्यादातर कैथोलिक उम्मीदवार अपनी सीटें जीतने में कामयाब रहे हैं. इसके अलावा एक कैंडिडेट आर्थर डीसिल्वा कुर्टोलिम विधानसभा सीट पर दूसरे नंबर पर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारने को लेकर बीजेपी की कड़ी आलोचना हुई है. हालांकि, पार्टी ने अल्पसंख्यकों के संबंध में गोवा में एक अलग रणनीति अपनाई.

गोवा में बीजेपी के उम्मीदवारों में कैथोलिक उम्मीदवारों की संख्या राज्य में कैथोलिक ईसाइयों की तकरीबन 25 फीसदी आबादी के अनुपात में रही है. पार्टी ने हर सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे.

हालांकि, आबादी का यह अनुपात पिछली एक शताब्दी में लगातार गिरा है. इस दौरान यह घटकर आधे से चौथाई पर आ गया है. इसके बावजूद कैथोलिक ईसाई अभी भी एक मुखर और सामाजिक रूप से प्रभावशाली समुदाय के तौर पर जाने जाते हैं.

राज्य के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में हिंदुओं की आबादी काफी ज्यादा है. 40 सीटों वाली गोवा विधानसभा में केवल एक सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है.

हालांकि पार्टी ने किसी कैथोलिक को नेता सदन नहीं चुना है.

अगर ऐसा होता तो मापुसा सीट से जीतने वाले फ्रांसिस डिसूजा इस रेस में सबसे आगे थे. डिसूजा मनोहर पर्रिकर और लक्ष्मीकांत पारसेकर दोनों की कैबिनेट में पिछले पांच साल से डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहे.

मौजूदा एमएलए के तौर पर डिसूजा को 10,957 मिले, जबकि उनके नजदीकी प्रतिस्पर्धी प्रो-हिंदू महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के उम्मीदवार को 4,129 वोट मिले. उन्हें अपनी ज्यादातर शहरी विधानसभा सीट पर किसी खास सत्ता विरोधी लहर का सामना नहीं करना पड़ा.

2014 के आखिर में जब तब के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को दिल्ली में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई, उस वक्त पारसेकर को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पार्टी के फैसले का डिसूजा ने जमकर विरोध किया था. डिसूजा उस वक्त विदेश में थे.

पिछले कुछ सालों से मुख्यमंत्री पारसेकर की नॉर्थ गोवा से मैंड्रेम सीट से हार हो गई है. चार बार से इस सीट पर जीत रहे पारसेकर के लिए यह बेहद निराश करने वाली बात है क्योंकि वह निवर्तमान मुख्यमंत्री हैं.

अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान ऐलान किया था कि पर्रिकर राज्य में चुनाव के बाद पार्टी की राज्य इकाई की अगुवाई करेंगे-भले ही उन्हें यह काम नई दिल्ली से करना पड़े या राज्य की राजधानी पणजी से करना पड़े.

आखिरकार पर्रिकर को ही पार्टी ने वापस गोवा में सीएम के तौर पर भेजा है. उनके नेतृत्व में फिलहाल तो बीजेपी छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों को अपने साथ जोड़ कर सरकार बनाने में सफल दिख रही है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi