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ईवीएम विवाद: चुनाव आयोग ने 12 मई को बुलाई सर्वदलीय बैठक

आयोग ने 12 मई के बाद किसी भी चुनाव में वीवीपीएटी युक्त ईवीएम से मतदान कराने की तैयारी कर ली है

Bhasha | Published On: May 04, 2017 10:25 PM IST | Updated On: May 04, 2017 10:25 PM IST

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ईवीएम विवाद: चुनाव आयोग ने 12 मई को बुलाई सर्वदलीय बैठक

चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रिानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता पर विपक्षी दलों की शंकाओं के समाधान के लिए 12 मई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

पंजाब सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद 16 राजनीतिक दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे.

आयोग साबित करेगा ईवीएम की विश्वसनीयता 

आयोग की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक सर्वदलीय बैठक के लिये 7 राष्ट्रीय दलों के अलावा 48 राज्य स्तरीय दलों को बुलाया गया है.

आयोग द्वारा इस बाबत सभी 55 दलों के अध्यक्षों को भेजे पत्र में उनकी पार्टी के दो-दो प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने के लिए नामित करने को कहा गया है.

इस बैठक में ईवीएम और वीवीपीएटी के मुद्दे पर चर्चा होगी. इसमें सभी दलों को यह समझाने की कोशिश की जायेगी कि ईवीएम पूरी तरह विश्वसनीय है और इसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है.

चुनाव में घूस देने पर अब होगी जेल और नहीं लड़ पाएंगे चुनाव 

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ईवीएम और वीवीपीएटी के अलावा बैठक के एजेंडे में चुनाव के दौरान घूस देने को संज्ञेय अपराध घोषित करने, चुनाव में घूसखोरी के मामले में आरोप पत्र दायर होने को चुनाव के लिये अयोग्य घोषित करने और वीवीपीएटी की पर्चियों से दोबारा मतों की गिनती से जुड़े नियमों पर चर्चा को भी शामिल किया गया है.

संज्ञेय अपराध में गिरफ्तारी के लिए पुलिस को किसी वारंट की जरूरत नहीं होती. संज्ञेय अपराध में पुलिस बिना मेजिस्ट्रेट के आदेश के जांच प्रारम्भ कर सकती है.

चुनाव आयोग ने घूसखोरी के मसले को चेन्नई के आरके नगर उपचुनाव के दौरान मतदाताओं को पैसे बांटने और टीटीवी दिनाकरन द्वारा चुनाव आयोग के एक अफसर को एआईडीएमके के 'दो पत्ती' चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए घूस देने के प्रयास के आरोपों के मद्देनजर उठाया है.

अब हर चुनाव होगा वीवीपीएटी युक्त ईवीएम से    

आयोग ने सभी आमंत्रित दलों से इन सभी मुद्दों पर सात मई तक अपना लिखित पक्ष आयोग को मुहैया कराने को कहा है.

मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने 29 अप्रैल को चंडीगढ़ में संवाददाताओं से कहा था, ‘चुनाव आयोग ईवीएम के गड़बड़ी मुक्त और सुरक्षित होने का राजनीतिक दलों को भरोसा दिलाने के लिए जल्द ही उनकी एक बैठक बुलाएगा.'

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इस बीच आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुये आयोग ने 12 मई के बाद किसी भी चुनाव में वीवीपीएटी युक्त ईवीएम से मतदान कराने की तैयारी कर ली है.

इसकी शुरुआत गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से हो जाएगी. अधिकारी ने बताया कि आयोग के पास लगभग 50 हजार वीवीपीएटी युक्त ईवीएम मौजूद है जो कि इन राज्यों में मतदान के लिये पर्याप्त होंगी.

जबकि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी राशि के इस्तेमाल से साल 2019 के लोकसभा चुनाव में वीवीपीएटी से मतदान कराया जाएगा.

क्या है वीवीपीएटी?

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वोटर वेरिफायड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) मतपत्र रहित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए मतदाताओं को फीडबैक देने का एक तरीका है. इसका प्रयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की स्पष्टता के लिए किया जाता है.

इससे मतदाता को यह पता चल सकता है कि वोट उसकी इच्छा से पड़ा है या नहीं. इससे वोट में हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं रहती.

कैसे काम करती है वीवीपीएटी?

वीवीपीएटी के साथ प्रिंटर की तरह का एक उपकरण इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ा होता है. जब वोट डाला जाता है तब इसकी एक रसीद निकलती है. उस पर क्रम संख्या, नाम तथा उम्मीदवार का चुनाव चिह्न दिखता है.

इसमें मतदाता द्वारा उम्मीदवारों के नाम का बटन दबाते ही, उस उम्मीदवार के नाम और पार्टी के चिह्न की पर्ची अगले 10 सेंकेड में मशीन से बाहर निकल जाती है.

इसके बाद यह एक सुरक्षित बक्से में गिर जाती है. यह उपकरण वोट डाले जाने की पुष्टि करता है और इससे मतदाता ब्योरों की पुष्टि कर सकता है. रसीद एक बार दिखने के बाद ईवीएम से जुड़े कंटेनर में चली जाती है.

विवाद की स्थिति में ईवीएम के आंकड़ों का मिलान वीवीपीएटी से किया जा सकता है. इससे ईवीएम की विश्वसनीयता को साबित करना आसान होगा.

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