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ईवीएम के बहाने असल मुद्दों को 'हैक' किया जा रहा है?

ईवीएम हैकिंग को लेकर सवाल खत्म नहीं हुए हैं

Vivek Anand Vivek Anand | Published On: Jun 04, 2017 03:14 PM IST | Updated On: Jun 04, 2017 03:14 PM IST

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ईवीएम के बहाने असल मुद्दों को 'हैक' किया जा रहा है?

कंप्यूटर क्रांति के उस दौर में भारी बवाल मचा था. पूरी दुनिया में सनसनी फैली थी कि आखिर 31 दिसंबर 1999 के बाद दुनिया कैसे चलेगी. अंदेशा जाहिर किया जा रहा था कि 31 दिसंबर 1999 को घड़ी की सुइयां जैसे ही रात के बारह बजाएंगी, दुनिया के सामने सबसे भयानक संकट पैदा हो जाएगा. 12 बजते ही कंप्यूटर से निर्देशित पूरी व्यवस्था ठप हो जाएगी. बिजली गुल, पानी बंद, एयर ट्रैफिक कंट्रोल ठप, सड़कों का ट्रैफिक बंद...कंप्यूटर के जरिए गाइडेड हर सिस्टम ठप हो जाएगा. इस भीषण समस्या को Y2K का नाम दिया गया था. Y2k यानी year 2000 problem. समस्या इसलिए पैदा हुई थी कि कंप्यूटर क्रांति के दौरान जिस कंप्यूटर के भरोसे पूरी व्यवस्था को छोड़ दिया गया था वो 1999 के बाद साल 2000 को पढ़ ही नहीं सकता था.

पूरी दुनिया की आईटी कंपनियां हैरान परेशान इस मसले का हल ढूंढने में लगी थी. हजारों लाखों करोड़ रुपए खर्च किए गए ताकि इस सबसे भीषण समस्या का हल तलाश लिया जाए. लेकिन इसके बाद क्या हुआ. इसके बाद ये हुआ कि 31 दिसंबर 1999 की रात बारह बजे... घड़ी की सुइयों ने एकाकार होकर नई शताब्दी का स्वागत किया. शताब्दी के पहले दिन की शुरुआत हुई... न पानी बंद हुआ...न बिजली गुल हुई...और न ट्रैफिक कंट्रोल पर कोई असर पड़ा.

कहने का मतलब ये है कि जिस हौव्वे को पूरी दुनिया में खड़ा किया गया था वो एक झटके में हवा हवाई हो गया. वो दिन है और आज का दिन है. उस वक्त y2k था और इस वक्त भारत में ईवीएम हैकिंग है. जितनी कंफ्यूजन y2k को लेकर थी, उतनी ही आज ईवीएम हैकिंग को लेकर है.

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आज का सबसे बड़ा सवाल क्या ईवीएम हैक हो सकता है?

चुनाव आयोग चैलेंज देती है कि ईवीएम को हैक किया ही नहीं जा सकता जो चाहे आजमा के देख ले. लेकिन चुनावों में बीजेपी से भयानक चोटिल हुए ‘जख्मी पार्टियां’ कहती हैं कि नए जमाने की ईवीएम के चलते यहां-वहां हर जगह कमल खिल रहे हैं. आम आदमी पार्टी मानने को तैयार नहीं है, कांग्रेस मानने को तैयार नहीं है, एनसीपी जैसी पार्टियां चुनाव आयोग के चैलेंज वाले हैकॉथन में हिस्सा लेकर भी ये मानने को तैयार नहीं है कि ईवीएम फूलप्रूफ है.

ईवीएम को लेकर जितने मुंह उतनी बाते हैं. चुनाव आयोग ने शनिवार को सभी पार्टियों को वक्त दिया था कि आकर वो ईवीएम हैक करने के चैलेंज को स्वीकार करें. 10 बजे से लेकर 2 बजे तक का वक्त दिया गया था. सिर्फ दो पार्टियां सीपीएम और एनसीपी पहुंची. लेकिन दोनों ही पार्टियों ने चैलेंज में हिस्सा नहीं लिया.

सीपीएम का कहना था कि वो चैलेंज में हिस्सा लेने नहीं बल्कि ईवीएम की प्रक्रिया को समझने आए हैं. एनसीपी ने कहा कि आखिरी वक्त में चुनाव आयोग ने नई शर्तें लगा दी. उन्होंने चुनाव आयोग से ईवीएम का बैटरी और मेमरी नंबर पहले बताने की गुजारिश की थी लेकिन उसकी जानकारी नहीं दी गई. एनसीपी ने आरोप लगाया कि पहले आयोग ने पार्टियों से अपनी मर्जी के ईवीएम चुनने की बात की थी लेकिन चैलेंज देने के वक्त वहां मौजूद 14 ईवीएम में से किसी दो को चुनने को कहा गया.

इन सबके बीच चुनाव आयोग का ईवीएम हैक करने के चैलेंज वाला हैकॉथन संपन्न हुआ. चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोकतंत्र की जीत का एलान किया. मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने ईवीएम को लेकर शंकाओं को दूर करने में सभी राजनीतिक दलों के सकारात्मक सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की गहरी जड़ों को मजबूती मिलेगी.

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ईवीएम हैकिंग को लेकर सवाल खत्म नहीं हुए हैं

चुनाव आयोग के इतने भारीभरकम तामझाम के बाद भी सवाल खत्म नहीं हुए हैं. आम आदमी पार्टी अभी भी इस पर सवाल उठा रही है. पार्टी ने आयोग की चुनौती की शर्तों को पहले ही नहीं मानते हुए खुद को इससे दूर कर लिया था. पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने इसे केवल चुनाव आयोग का छलावा करार दिया है.

अब आदमी पार्टी अपने स्तर पर ईवीएम हैकिंग की चुनौती दे रही है. पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पार्टी ने भारत इलेक्ट्रानिक लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रानिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीआईएल) के विशेषज्ञों को चुनौती में भाग लेने का न्योता दिया है. ये दो कंपनियां ही चुनाव आयोग को ईवीएम मुहैया कराती हैं.

आम आदमी पार्टी ने चुनौती के लिए रजिस्ट्रेशन करना भी शुरू कर दिया है. पार्टी का एलान है कि वो चुनाव आयोग से बड़ी और बेहतर चुनौती वाले हैकॉथन का आयोजन करेगी. यानी सवाल बरकरार है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है या नहीं.

New Delhi:  AAP MLA from Greater Kailash Saurabh Bharadwaj demonstrates how an EVM can be manipulated at the special Delhi Assembly session convened by Chief Minister Arvind Kejriwal, on Tuesday.   PTI Photo  (PTI5_9_2017_000275B)

ईवीएम हैकिंग का हौव्वा कब खत्म होगा?

सवाल ये भी है कि ईवीएम को लेकर संदेह के बादल छंट नहीं रहे या फिर छंटने नहीं दिए जा रहे. आम आदमी पार्टी शुरू से इस मुद्दे को पकड़े है. सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली विधानसभा में ईवीएम हैक का डेमो भी करके दिखाया है. हालांकि चुनाव आयोग ने उसे सिरे से खारिज कर दिया था. आयोग का कहना था कि किसी भी मशीन को उठाकर हैक कर लेने का मतलब ये कतई नहीं कि चुनाव आयोग को ईवीएम भी हैक किया जा सकता है.

लेकिन इन सारी कवायद के बीच दो बातें हैं जो बिल्कुल साफ हैं. पहली- कंप्यूटर और उसपर आधारित सिस्टम को हैक किया जा सकता है. दूसरी- हैकिंग के अंदेशे के बावजूद पूरी दुनिया कंप्यूटर के भरोसे ही चल रही है और तमाम आशंकाओं के बावजूद अब तक ये सिस्टम ठप नहीं हुआ है.

आम आदमी के लिए हैकिंग एक बड़ा ही रहस्यमय सा शब्द है. हैकिंग मतलब किसी भी कंप्यूटर सिस्टम को हैक करके उससे अपनी मनमर्जी मुताबिक काम लेना. वैसे ही जैसे रजनीकांत की फिल्म रोबोट में मशीनी रोबोट की प्रोग्रामिंग में गड़बड़ी पैदा करके उसे विनाशकारी बना दिया जाता है. लेकिन ऐसी भयानक कल्पना की एकाध हकीकत भी देखने को नहीं मिलती.

ये सच है कि कंप्यूटर हैकिंग से दुनियाभर में कई गड़बड़ियां पैदा करने की कोशिशें हुई हैं. हर दिन कंप्यूटर वायरस और मालवेयर के खतरनाक साइबर अटैक की खबरें आती हैं. लेकिन इन अटैक से घबराकर कंप्यूटर पर निर्भरता खत्म नहीं की जा सकती. उसके उपाय किए जा सकते हैं.

चुनाव आयोग ने वीवीपैट के जरिए ईवीएम को लेकर चल रहे अंदेशों को खत्म करने का वैसा ही उपाय किया है. लेकिन फिर भी कुछ राजनीतिक पार्टियां इसे छोड़ने को तैयार नहीं है. ईवीएम हैकिंग एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है और जब मुद्दा राजनीतिक बन जाए तो उसका खत्म होना मुश्किल हो जाता है. वो एक डायलॉग है, ना राजनीति में मुर्दे गाड़े नहीं जाते... वही हाल है ईवीएम का भी.

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