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ईवीएम ने पूरा किया 'आप' का असली मकसद!

सवाल यह है कि क्या केजरीवाल ईवीएम की आड़ में रिश्वत के मामले के दबाना चाहते हैं?

Rajeev Ranjan Jha Rajeev Ranjan Jha Updated On: May 10, 2017 05:07 PM IST

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ईवीएम ने पूरा किया 'आप' का असली मकसद!

दिल्ली विधान सभा में आम आदमी पार्टी (आप) विधायक सौरभ भारद्वाज ने जिस मशीन का प्रदर्शन किया, उसके बारे में उन्होंने कहा कि यह हू-ब-हू ईवीएम जैसी है. चुनाव आयोग ने कहा, यह ईवीएम नहीं है.

चुनाव आयोग और सौरभ भारद्वाज आमने-सामने?

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस मशीन में गुप्त कोड से हेराफेरी हो सकती है. चुनाव आयोग ने कहा, हमारे ईवीएम में कोई सीक्रेट कोड होता ही नहीं है.

यानी, सौरभ भारद्वाज ने ईवीएम जैसी दिखने वाली एक मशीन खुद बनायी या कहीं से हासिल की. उसमें खुद ही हेराफेरी वाला सीक्रेट कोड डाला और फिर उस कोड से हेराफेरी का प्रदर्शन कर दिया.

अगर असली ईवीएम में ऐसा कोई गुप्त कोड होता ही नहीं है, तो फिर सौरभ भारद्वाज की सारी कहानी एक नौटंकी से ज्यादा कुछ नहीं है.

कैसे मुमकिन है ऐसी हेराफेरी?

कोई कंपनी या संस्थान ऐसी कोई मशीन बनाते समय उसे सुरक्षित रखने के उपाय करती है, न कि खुद ही उसमें हैकिंग संभव बनाने के लिए कोई कोड डलवाती है. हम एटीएम से पैसे निकालते हैं. पैसे हमारे अपने खाते से कटते हैं.

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कल अगर सौरभ भारद्वाज एक हूबहू एटीएम जैसी मशीन लाएंगे और बताएंगे कि ये देखिए, इस एटीएम में राम का डेबिट कार्ड लगा कर श्याम के खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं. भई, आप अपना डब्बा लाएंगे तो उसमें जैसी चाहेंगे वैसी प्रोग्रामिंग करके रखेंगे.

क्या है सौरभ की दलील?

सौरभ भारद्वाज कहते हैं कि ईवीएम के मदरबोर्ड बदले जा सकते हैं और एक मदरबोर्ड बदलने में उन्हें बस 90 सेकेंड लगते हैं. दिल्ली विधानसभा में सौरभ भारद्वाज ने जो प्रदर्शन किया, अगर उस पर 100% विश्वास कर लिया जाये और मान लिया जाये कि भारत के चुनाव आयोग की ईवीएम भी उसी तरह हैक की जा सकती है, तो फिर...

एमसीडी के करीब 13,000 बूथों में 13,000 मशीनों के मदरबोर्ड कब और कहाँ बदले गये? कितने लोगों ने बदले? वे लोग कहाँ से आये, कहाँ चले गये?

सुबह 10 बजे के बाद ईवीएम में सीक्रेट कोड डालने के लिए हर बूथ में मतदाता के रूप में कोई भाजपा कार्यकर्ता गया होगा. यानी इस काम में 13,000 लोगों को लगाया गया होगा. तीन लोगों के बीच की बातें तो गुप्त रह नहीं पातीं, जिस षडयंत्र में 13,000 लोगों को शामिल किया गया हो, वह कैसे गुप्त रह जायेगा?

'आप' ने एमसीडी से पहले पंजाब में भी ईवीएम की गड़बड़ी के आरोप लगाये थे. मायावती ने उत्तर प्रदेश में ऐसे ही आरोप लगाये. इन बड़े राज्यों में ईवीएम की संख्या लाखों में पहुंचती है.

लाखों मशीनों के मदरबोर्ड बदलने की कवायद तो तभी संभव हुई होगी, जब लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं ने इन लाखों ईवीएम में गुप्त कोड डाले होंगे. लाखों लोग एक हेराफेरी की साजिश में संलिप्त हुए और सब कुछ गुप्त रह गया!

क्या यह मुमकिन है?

सौरभ भारद्वाज के मुताबिक ईवीएम हैक हो सकती हो, फिर भी हैकिंग के लिए जरूरी होगा कि कुछ घंटों के लिए मशीनें हैकरों के हाथ लगें.

क्या आम आदमी पार्टी यह आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग ने दिल्ली में इस्तेमाल हुई वोटिंग मशीनें कुछ घंटों के लिए भाजपा के हैकरों को दे दी?

आम आदमी पार्टी साफ बोले कि एमसीडी चुनाव के मामले में वह आरोप किस पर लगा रही है - भाजपा की केंद्र सरकार पर, खुद अपनी दिल्ली सरकार पर या फिर चुनाव आयोग पर?

क्या है इस यूटर्न की वजह?

एमसीडी के नतीजे सामने आने के तुरंत बाद ही 'आप' ने ईवीएम राग छेड़ा था. लोगों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया. 'आप' ने जब देखा कि इस मुद्दे को उठाने से उल्टे फजीहत हो रही है तो अरविंद केजरीवाल ने गलतियां होने की बात मानी और कहा कि वे गलतियों की समीक्षा करेंगे.

मगर यू-टर्न को अपना ट्रेडमार्क बना चुके अरविंद ने फिर से यू-टर्न लिया और ईवीएम का राग फिर से छेड़ दिया गया. विधान सभा में किया गया प्रदर्शन केवल उसी पुराने आरोप को एक नई नाटकीयता के साथ पेश करता है.

क्या कामयाब रही 'आप' की रणनीति?

तो आखिर सवाल उठता है कि एक नकली ईवीएम का विधानसभा में प्रदर्शन करके 'आप' ने क्या हासिल किया? दरअसल, जिस उद्देश्य से यह प्रदर्शन किया गया, वह काफी हद तक पूरा हुआ. 'आप' की जरूरत बस इतनी थी कि बहस कपिल मिश्रा प्रकरण से हट कर किसी और मुद्दे पर चली जाये. तात्कालिक रूप से ऐसा हो गया, इसलिए 'आप' की रणनीति सफल रही. मगर यह सफलता बहुत अल्पजीवी रहेगी.

New Delhi: Sacked Delhi Water Minister Kapil Mishra addressing a media at Rajghat in New Delhi on Sunday.PTI Photo by Atul Yadav(PTI5_7_2017_000037B)

केवल विरोधियों ने नहीं, आम लोगों ने भी ईवीएम राग छिड़ते ही कह दिया कि यह तो कपिल मिश्रा के आरोपों से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है. इसलिए उन्हें दो करोड़ की रिश्वत के आरोप पर जवाब तो देने ही होंगे.

केजरीवाल को जवाब तो देना होगा?

सत्येंद्र जैन पर हवाला लेन-देन की जो जांच शुरू हुई है, उसकी आंच से ईवीएम नौटंकी बहुत समय तक नहीं बचा सकेगी. केजरीवाल को अपने आवास पर लंच में 13,000 रुपये की थाली पर भी बोलना ही होगा.

सबसे जवाब मांगने वाले केजरीवाल खुद बहुत समय तक जवाब देने से नहीं भाग सकते. और जब वे जवाब देंगे, तो जनता तुरंत यह समझ लेगी कि उनके जवाब भ्रष्टाचारियों के बाकी आरोपियों जैसे ही हैं, या जवाबों में कुछ दम है.

रॉबर्ट वाड्रा ने भी दे दी नसीहत

अब कपिल मिश्रा प्रकरण के बाद अगर रॉबर्ट वाड्रा भी नसीहतें देने लगे हैं कि आरोप लगाने के लिए सबूत होने चाहिए, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं लगती!

खैर, अगर केजरीवाल वाकई मानते हैं कि ईवीएम से हैकिंग हो जाती है, तो उन्हें ईवीएम से जीते हुए अपने सभी विधायकों, पार्षदों से इस्तीफा दिला कर बैलट पेपर से दोबारा चुनाव कराने के लिए रामलीला मैदान में जम जाना चाहिए.

(लेखक आर्थिक पत्रिका 'निवेश मंथन' और समाचार पोर्टल शेयर मंथन (www.sharemanthan.in) के संपादक हैं.)

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