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DUSU का दंगल: पारदर्शिता के लिए DU का बजट होगा ऑनलाइन

डूसू में सबसे ज्यादा खर्च चाय, फोटोस्टेट जैसी अनावश्यक चीजों पर किया गया है. जबकि इसका उपयोग विद्यार्थियों के कल्याण, बहस, प्रतियोगिताओं, नौकरी मेले आदि के आयोजन में किया जाना चाहिए था

Rocky Tuseed, Kunal Sehrawat Updated On: Sep 10, 2017 05:13 PM IST

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DUSU का दंगल: पारदर्शिता के लिए DU का बजट होगा ऑनलाइन

हमारे पास कुछ ऐसी चीजें हैं जो हम महत्वपूर्ण बिंदुओं के रूप में देखते हैं. हमें लगता है यह सब चीजें डीयू से खत्म होनी चाहिए. डूसू बजट में पारदर्शिता, डीयू में पहुंच, डीयू के निजीकरण का विरोध, समान फीस, सुरक्षित कैंपस ऐसे मुद्दे हैं जिसमें हमें लगता है पिछले चार साल में डीयू काफी पिछड़ गया है.

पारदर्शी बजट 

डीयू में पहली और सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बजट में पारदर्शिता है. DUSU में पारदर्शिता की बहुत कमी है. जिसका नतीजा है कि यहां अनावश्यक व्यय बहुत ज्यादा किया जाता है. डूसू में सबसे ज्यादा खर्च चाय, फोटोस्टेट जैसी अनावश्यक चीजों पर किया गया है. जबकि इसका उपयोग विद्यार्थियों के कल्याण, बहस, प्रतियोगिताओं, नौकरी मेले आदि के आयोजन में किया जाना चाहिए था. यह पैसा हर दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र की जेब से आता है, इतने पैसे के दुरुपयोग के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए. NSUI आश्वस्त करती है कि हम दोबारा बजट ऑनलाइन लाएंगे और सभी बिलों को भी प्रकाशित करेंगे. इससे डीयू में पढ़ रहे छात्रों के लिए पता लगाने में आसानी होगी कि उनका पैसा कहां खर्च किया जा रहा है.

डीयू में पहुंच

डूसू का अध्यक्ष बनने के बाद मेरा सबसे महत्वपूर्ण काम होगा कि हर छात्र को डीयू में आसानी से एडमिशन मिले. ज्यादातर छात्र जो डीयू में पढ़ना चाहते हैं, लेकिन नंबर कम होने के चलते उन्हें यहां एडमिशन नहीं मिल पाता. हम इसके लिए प्रयास करेंगे. चाहे उसके लिए हमें सरकार के पास जाकर अन्य कॉलेज खुलवाने की मांग करनी पड़े. छात्र किसी भी समस्या के बिना परिसर में और कॉलेज के भीतर स्थानांतरित करने में सक्षम होना चाहिए.

आगे बात करें तो लगभग 2,000 छात्रों के साथ सभी कॉलेजों के लिए हॉस्टल की अनिवार्य सुविधाएं हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में 95 एकड़ से ज्यादा जमीन ऐसी है जो खाली पड़ी है. उसका उपयोग किसी चीज के लिए नहीं हो रहा है. इसका नतीजा है यूनिवर्सिटी के आसपास निजी PG आ रहे हैं. इन PG में छात्रों से ज्यादा किराया वसूला जाता है, और हॉस्टल सुविधाओं की कमी के कारण छात्रों को भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है.

हम प्राइवेट PG के लिए किराया सीमित करेंगे. छात्रों को आने जाने के लिए ज्यादा किराया चुकाना पड़ता है. इसलिए हम यू-स्पेशल बसों को फिर से शुरू करना चाहते हैं जो अब पूरी तरह से रुकी हुई हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी के सभी छात्रों के लिए हम मेट्रो पास की भी व्यवस्था करेंगे. जिसके तहत छात्रों को कम पैसे में यात्रा करने की सुविधा मिलेगी. इस पास पर छात्रों के लिए विशेष डिस्काउंट भी मिलेगा.

NSUI

डीयू के निजीकरण का विरोध करें

जैसा कि हम देख रहे हैं पिछले कुछ सालों से डीयू के निजीकरण की चर्चा चल रही है. NSUI इसका लंबे समय से विरोध करती आई है. इस बार भी हम इसका विरोध करेंगे. छात्रसंघ में NSUI आने के बाद हम अपना हर वादा पूरा करेंगे. यह वादा भी हमारा है कि डीयू का कोई निजीकरण नहीं कर पाएगा. हम चाहते हैं कि छात्रों को कम फीस में अच्छी शिक्षा मिले. जैसा कि हमें देखने को मिलता है कि छात्रों को अच्छे कॉलेज में पढ़ने के लिए ज्यादा फीस देनी पड़ती है. हमारी कोशिश रहेगी कम पैसों में छात्रों को अच्छे कॉलेज में शिक्षा मिले. इसके साथ-साथ हम चाहते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के तहत मौजूदा कॉलेजों में सीटें बढ़ानी चाहिए और छात्रों के बीच सस्ती कॉलेज की शिक्षा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नए कॉलेज खोलने होंगे.

सभी स्कूलों में फीस समान होनी चाहिए

हर स्कूल की फीस एक जैसी होनी चाहिए. कोर्स के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. डीयू के कई कोर्स ऐसे हैं जहां छात्रों के लिए फीस भरना भी एक चुनौती होती है. जब दिल्ली यूनिवर्सिटी एक है तो इसके सभी छात्रों को पढ़ाई के लिए फीस समान देनी चाहिए. छात्रसंघ चुनाव में NSUI के आने के बाद हम यह नहीं सुनना चाहते कि किसी छात्र को फीस ज्यादा होने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी.

सुरक्षित कैंपस

हम सभी एक समान परिसर में पढ़ाई करना चाहते हैं. जो किसी भी तरह की असामाजिक गतिविधि से मुक्त हो. हम एक ऐसी यूनिवर्सिटी बनानी चाहते हैं. जहां हर महिला, छात्रा सुरक्षित हो. छात्रा या शिक्षक जो भी यूनिवर्सिटी में पहनकर आना चाहते हैं. वह स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर पहनकर आ सकते हैं. हम उनके साथ दृढ़ता से खड़े हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के परिसरों में उनकी स्वतंत्रता है.

भेदभाव मुक्त होगा डीयू

हम दिल्ली यूनिवर्सिटी में अध्ययन करने वाले छात्रों के बीच बहुत भेदभाव देखते हैं. पता नहीं ऐसा क्यों होता है. NSUI की कभी भी यह परंपरा नहीं रही है. हम देश, यूनिवर्सिटी के सभी छात्रों को समान मानते हैं. हम कॉलेजों और परिसरों के बीच विनिमय कार्यक्रमों की शुरुआत करके हम भेदभाव को खत्म करना चाहते हैं. ताकि छात्रों को एक-दूसरे के साथ बातचीत करने और विभिन्न विषयों पर अनुभव और ज्ञान बांटने के लिए खुद को संपन्न कर सकें. हम छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद की सुविधा भी चाहते हैं ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके.

(रॉकी तुसीद NSUI की तरफ से DUSU चुनाव में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं. पुनीत सैनी से बातचीत पर आधारित)

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