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इंफोसिस के बॉस की बंपर सैलरी हाइक से नारायणमूर्ति नाराज

नारायणमूर्ति ने कहा, बॉस और कर्मचारियों की सैलरी में इतने बड़े गैप से बढ़ेगा अविश्वास

FP Staff Updated On: Apr 02, 2017 10:58 PM IST

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इंफोसिस के बॉस की बंपर सैलरी हाइक से नारायणमूर्ति नाराज

इंफोसिस को-फाउंडर नारायणमूर्ति ने कंपनी मैनेजमेंट के फैसलों और मानकों को लेकर ऐतराज जताया है.

उन्होंने फरवरी में बोर्ड द्वारा सीओओ प्रवीन राव की सैलरी में बेतहाशा बढ़ोत्तरी को लेकर असंतुष्टता जताई और कहा कि इससे कर्मचारियों का मैनेजमेंट और बोर्ड के प्रति विश्वास कमजोर होगा.

OMG..इतनी इंक्रीमेंट

उन्होंने कहा कि टॉप लेवल अधिकारी की सैलरी में 60-70% बढ़ोत्तरी सही नहीं है.

जबकि, कंपनी के ज्यादातर कर्मचारियों को को सिर्फ 6-8%  सैलेरी हाइक दिया गया है, जो कि सही नहीं है.

ज्यादातर कर्मचारी कंपनी को बेहतर बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं.

फरवरी में इंफोसिस बोर्ड ने राव की सालाना फिक्स्ड सैलरी बढ़ाकर 4.60 करोड़ की थी.

इसके अलावा टार्गेट बेस्ड अर्निंग 3.87 करोड़ रुपए रखी. इसे 1 नवंबर 2016 से लागू किया गया. वित्तीय वर्ष 2016 के 27,250 रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक यूनिट्स (RSUs) और 43,000 स्टॉक ऑप्शन्स (ESOP)में भी उनकी हिस्सेदारी थी.

क्या है ईमेल में?

नारायणमूर्ति ने ईमेल के शुरुआत में लिखा, 'प्रवीन राव से मुझे बहुत लगाव है...मैंने उन्हें 1985 में रिक्रूट किया था और इंफोसिस में रहने के दौरान उन्हें काम करते देखा. उन्हें कई फैसलों से अलग रखा गया था.'

'2013 में जब मैं वापस आया तो वह एग्जीक्यूटिव काउंसिल के मेंबर भी नहीं थे. क्रिस, शिबू और मैंने उन्हें प्रोत्साहित किया और बोर्ड तक पहुंचाया.'

'विशाल को सीईओ बनाने के दौरान उन्हें सीओओ बनाया गया. इसलिए, इस शिकायत को प्रवीन के खिलाफ न समझा जाए.'

कर्मचारियों की मामूली सैलरी हाइक से नाराज

उन्होंने लिखा, 'मैं सैलरी और हिस्सेदारी में अंतर घटाने और समानता के पक्ष में हूं. आप नहीं जानते होंगे इंफोसिस की स्थापना के दौरान मेरी सैलरी पिछली सैलरी के मुकाबले महज 10% थी.'

'इसलिए, मैंने सुनिश्चित किया कि मुझसे छोटे, सह-संस्थापक कर्मचारियों को उनकी पिछली नौकरियों से 20% ज्यादा हाइक मिले.'

'जबकि, मैं पिछली नौकरी में ही उन सबसे 7 स्तर ऊपर और उम्र में 11 साल बड़ा था. मैंने उन्हें समान तरक्की और हिस्सेदारी दी.'

नारायणमूर्ति ने मेल में लिखा, 'टॉप लेवल अधिकारी को 60-70% इन्क्रीमेंट सही नहीं है, जबकि दूसरे कर्मचारियों को सिर्फ 6-8% ही दिया गया हो. इस तरह के फैसलों से कर्मचारियों में कंपनी के प्रति अविश्वास पैदा होगा.'

न्यूज 18 से साभार

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