विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

भारत को वियतनाम न समझे चीन : 1962 की जंग याद है तो वियतनाम से हार भी न भूले

कंबोडिया से वियतनाम की सेना को चीन हटा नहीं सका और उसे बैरंग वापस लौटना पड़ा था

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Aug 05, 2017 10:32 AM IST

0
भारत को वियतनाम न समझे चीन : 1962 की जंग याद है तो वियतनाम से हार भी न भूले

चीन के साथ बढ़ते तनाव पर भारत की विदेश नीति पर संसद में सवाल उठाने वालों से सवाल है कि आज अगर डोकलाम से भारत पीछे हटता है तो फिर कल अरुणाचल प्रदेश के हिस्से पर चीन के दावे का क्या जवाब होगा?

संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि ‘सेना की तैयारी हमेशा होती है क्योंकि सेना युद्ध लड़ने के लिए होती है, लेकिन युद्ध से समस्याओं का हल नहीं निकाला जा सकता है. इसलिए इस मसले को कूटनीतिक रूप से हल किया जाना चाहिए.’

भारत धैर्य के साथ ही डोकलाम विवाद पर भूटान के साथ मिलकर चीन से बातचीत करना चाहता है. ये संदेश न सिर्फ देश के व्याकुल होते विपक्ष के लिए है बल्कि चीन के लिये भी. लेकिन देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को चीन की चिंता ने इस कदर सताया कि उसने बिना देश के नेतृत्व को भरोसे में लिए चीन के राजदूत से डोकलाम पर ड्रैगन का हालचाल पूछना बेहतर समझा. शायद देश की यही राजनीति ही चीन का हौसला बढ़ाने का भी काम कर ही है. यही वजह है कि बार-बार धमकी देने वाले चीन की ताजा धमकी फिर सामने आई है. चीन की ताजा धमकी है कि भारत उसके धैर्य की परीक्षा न ले. चीनी सेना ने कहा है कि संयम की सीमा खत्म हो रही है और भारत को फौरन अपनी सेना हटा लेना चाहिए.

China

चीन ने भारत का मनोबल तोड़ने के लिए दावा किया कि अब डोकलाम में केवल 48 भारतीय सैनिक ही मौजूद हैं जबकि उनके पीछे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के भारी तादाद में सैनिक मौजूद हैं. इससे पहले चीन ने आरोप लगाया था कि भारत के 270 सैनिक डोकलाम में घुसे थे. चीन यह जताने की कोशिश कर रहा है कि ड्रैगन के डर से भारतीय सैनिक वापस बुला लिए गए हैं.

डोकलाम को लेकर चीन दोहरी चाल चल रहा है. एक तरफ वो ये देखना चाहता है कि भारत कितना दबाव झेल सकता है. क्योंकि बाद में भारत के दूसरे हिस्सों को हड़पने में चीन के लिये नई चालें चलने का मौका होगा. दूसरी तरफ वो भूटान और भारत की दोस्ती को तोड़ना चाहता है. चीन को ये उम्मीद है कि उसके दबाव के चलते भूटान भारत से छिटक कर अलग खड़ा हो सकता है.

सामरिक लिहाज से भारत के लिये ये बड़ा खतरा होगा. क्योंकि जिस तिब्बत-भूटान-के ट्राई जंक्शन पर चीन सड़क बनाना चाहता है वो भारत की सीमा से सटा हुआ इलाका है. डोकलाम में सड़क बनने से चीन को पूर्वोत्तर राज्यों से भारत के अंदर पहुंचने का रास्ता साफ हो जाएगा. चीन भी उस जगह के सामरिक महत्व को जानता है और तभी किसी भी दबाव में डोकलाम को छोड़ना नहीं चाहता है. वहीं दूसरी तरफ उसने इस इलाके को चीन की सीमा बता कर खुला ऐलान भी कर दिया है.

china military

चीन की धमकियों को देखते हुए सवाल ये है कि ऐसे हालात में बातचीत कैसे हो सकेगी? चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता और पीएलए के कर्नल रेन गुओकियांग के बयान में कहा गया है कि ‘भारत इस भ्रम में है कि देर करने से डोकलाम विवाद का हल निकल जाएगा, जो कि बड़ी गलतफहमी है. चीन की जमीन कोई देश नहीं ले सकता.’

इससे साफ है कि चीन साल 2012 के भारत-भूटान-तिब्बत के समझौते की यथास्थिति को बरकरार रखने के लिये तैयार नहीं है. जबकि भारत का रूख साफ है कि किसी भी तरह की बातचीत के लिए दोनों पक्षों को अपनी सेनाओं को वापस बुलाना चाहिए.

चीन की आक्रमणकारी और विस्तावादी नीति का इतिहास रहा है. सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद चीन लगातार ही अपनी ताकत की धौंस देकर दूसरे देशों की सीमाओं पर अपना हक जताता रहा है. इसी वजह से उसके लगभग 20 देशों के साथ सीमा विवाद रहे हैं. लेकिन 1979 में वियतनाम से युद्ध करने की कीमत भी चीन ने चुकाई है. पूरी दुनिया ने देखा कि कंबोडिया से वियतनाम की सेना को चीन हटा नहीं सका और उसे बैरंग वापस लौटना पड़ा था.

फिलहाल चीन भारत के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध तो छेड़ ही चुका है. हालांकि भारत कभी युद्ध उन्माद में बहने वाला देश नहीं है. लेकिन थोपे गए युद्ध का जवाब देने के लिये भारत तैयार भी है. भारत के सेनाध्यक्ष ने हाल ही में कहा था कि भारत ढाई मोर्चे पर जंग के लिए तैयार है. चीन को समझना होगा कि परमाणु संपन्न देश का असली इशारा क्या था.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi