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दिग्विजय भूल रहे हैं कि जो आज 'मोदी भक्त' हैं वो कभी 'कांग्रेस भक्त' भी हुआ करते थे

दिग्विजय सिंह अपने शब्दों की पैरवी करते हुए उसे 'आर्ट ऑफ फूलिंग' बता रहे हैं

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Sep 08, 2017 09:20 PM IST

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दिग्विजय भूल रहे हैं कि जो आज 'मोदी भक्त' हैं वो कभी 'कांग्रेस भक्त' भी हुआ करते थे

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी की फोटो के साथ अभद्र भाषा लिखकर पोस्ट किया. इस पोस्ट में उन्होंने पीएम मोदी की दो उपलब्धियां बताईं.

लेकिन उपलब्धियों के साथ गाली शब्द पोस्ट कर दिग्विजय सिंह ने ये बता दिया कि कांग्रेस किस संक्रमणकाल से गुजर रही है. दिग्विजय सिंह अपनी पोस्ट के लिए सफाई तो दे रहे हैं लेकिन पीएम मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए शब्द की पैरवी करते हुए उसे 'आर्ट ऑफ फूलिंग' बता रहे हैं.

जाहिर तौर पर पोस्ट की गालियों से बवाल होना ही था. बीजेपी ने इसे एक सौ तीस करोड़ की जनता का अपमान बताया है. बीजेपी ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा है. बीजेपी के पास तर्क है और आधार भी.

देश की जनता ने कांग्रेस को नकारते हुए सर्वसम्मति से नरेंद्र मोदी को पीएम चुना है और बीजेपी की सरकार बनाई है. आम चुनावों के बाद विधानसभा चुनावों में भी मोदी-लहर ने बीजेपी की सरकारें बनवाई हैं तो कांग्रेस का बोरिया-बिस्तर समेटा है. ऐसे में जनता जनार्दन के जनमत पर दिग्विजय सिंह अपनी पोस्ट के जरिये सवाल उठा रहे हैं.

दिग्विजय थ्री इडियट के लाइब्रेरियन दुबे की तरह कर रहे व्यवहार 

modi-tweet

दिग्विजय सिंह की सफाई है कि ये ट्वीट उनका नहीं था. लेकिन वो खुद को इसे पोस्ट करने से नहीं रोक सके. फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में एक सीन था. मंच पर चतुर रामलिंगम कॉलेज फंक्शन के मौके पर भाषण दे रहा था. जबकि दर्शकदीर्घा में बैठे लाइब्रेरियन दुबे जी आत्मप्रशंसा में प्रिंसिपल को भाषण की लाइनें अपनी बता रहे थे. वो कह रहे थे कि ‘बोल किसी के हैं लेकिन शब्द उनके हैं’.

कुछ ऐसा ही यहां राजनीति की रियल लाइफ में देखने को मिला. मामला उल्टा पड़ने पर दिग्विजय सिंह भी कह रहे हैं कि ये पोस्ट उनका नहीं है लेकिन वो उसे आगे बढ़ाने से रोक न सके. दलील भी ऐसी जो न ही दी जाती तो बेहतर होता क्योंकि सोशल मीडिया के वर्चुअल वर्ल्ड में बहुत कुछ ऐसा होता है जिसे देखने के बाद आप चाहकर भी शेयर नहीं कर सकते. कहीं ये किसी की मर्यादा का हनन कर रही होती है तो कहीं ये किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही होती है.

अपनी राजनीति का प्रवाह देखना चाहते हैं दिग्गी राजा 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है दिग्विजय सिंह. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक गुरू भी माने जाते हैं. राज्य सभा सांसद होने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के महासचिव भी हैं. चार दशक की राजनीति का उन्हें लंबा अनुभव है. हर बयान का वो मतलब जानते हैं.

उसी तरह सोशल मीडिया पर हर पोस्ट के मायने भी वो जानते हैं. वो जानते थे कि उनके पोस्ट से हड़कंप मचेगा. सियासी घमासान तेज होगा. सोशल मीडिया पर ट्रोल करने वाले अचानक आक्रोशित हो जाएंगे. जिससे हैशटैग दिग्विजय सिंह भी शुरू हो सकता है.

जैसा कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद निखिल दधीच के ट्वीट से हुआ था. शायद दिग्वजिय सिंह इस ट्रोल में अपनी राजनीति का प्रवाह देखना चाहते हैं जो कि फिलहाल मोदी लहर की वजह से थमा हुआ है.

चूंकि विपक्ष में कांग्रेस के आने के बाद अब किसी भी बड़े मुद्दे पर सबसे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का ही एकाधिकार होता है. मसलन मध्यप्रदेश किसान आंदोलन में दिग्विजय सिंह के लिये राजनीति करने का कोई मौका नहीं था. सारा शो राहुल ही मोटरसाइकिल पर बैठकर चुरा ले गए.

विकल्प का खालीपन बयानों की राजनीति करने पर करता है मजबूर 

New Delhi: Congress Vice-President Rahul Gandhi addresses a day-long convention 'Sajha Virasat Bachao Sammelan' in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI8_17_2017_000027B) *** Local Caption ***

इस वक्त कांग्रेस में राहुल को लेकर ही मंथन का दौर है. उन्हें देश की सियासत में पीएम मोदी से मुकाबले के लिये तैयार किया जा रहा है. राहुल गांधी का मेकओवर चल रहा है और उसके बाद इस अक्टूबर में उनकी अध्यक्ष पद पर ताजपोशी भी होनी है.

ऐसे में व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पुनर्जीवित करने के लिये कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है. विकल्प का यही खालीपन उन्हें बयानों से राजनीति करने के लिये मजबूर करता है. दिग्विजय सिंह भी उसी मजबूरी का शिकार लगते है क्योंकि उनके पोस्ट से ही सवाल उठता है कि आखिर आज ऐसा कौन सा मौजूं है जिसमें दिग्गी राजा को पीएम मोदी के खिलाफ ऐसा कुछ करना पड़ गया.

क्या वाकई दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के पास पीएम मोदी के खिलाफ एक भी मुद्दा नहीं रहा जिस वजह से अब गालियों का सहारा ही बचा है?

मोदी के फॉलोअर्स को पहले भक्त बताना और बाद में गाली देना स्वस्थ राजनीति के सारे मूल्यों और मर्यादाओं का चीरहरण करता है. उनसे पूछा जा सकता है कि जिस दिलेरी के साथ ये ट्वीट जारी किया गया उसे क्या इमरजेंसी के वक्त किया जा सकता था?

क्या कभी केंद्र में कांग्रेस की सरकार के खिलाफ बीजेपी ने तत्कालीन पीएम के लिये ऐसे शब्दों का प्रयोग किया?

यही मोदी भक्त शायद कभी कांग्रेस भक्त भी हुआ करते थे 

दिग्गी राजा को आज जो ‘मोदी भक्त’ नजर आ रहे हैं वही भक्त तीन साल पहले तक कांग्रेस के साथ भी किसी विचारधारा के साथ जुड़े हुए थे.

दिग्वजिय सिंह के इन ट्वीट वाले ‘भक्तों’ ने तो मोदी सरकार के साथ अभी तक सिर्फ तीन साल ही गुजारे हैं. ऐसे में बीजेपी चाहे तो कांग्रेस से सत्तर साल का हिसाब बिना ट्वीटर और किसी लाग लपेट के ले सकती है. जिन भक्तों को आज दिग्विजय सिंह बेवकूफ बता रहे हैं उन्हीं भक्तों ने कांग्रेस की पीढ़ियों की सत्ता भी देखी है और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की भक्ति भी.

संसद में दिग्विजय सिंह हंसते हुए (फोटो: पीटीआई)

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अगर जनता किसी पार्टी को सर्वसम्मति से चुनती है तो क्या उसके वोट करने के अधिकार को बेवकूफी कहा जा सकता है?

क्या अमेरिका में भी डोनाल्ड ट्रंप ने वही काम किया है जो दिग्विजय सिंह की नजर में यहां के भक्तों ने किया?

पंजाब विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी. वहां की जनता ने शिरोमणी अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन को नकार दिया. क्या माना जाए कि पंजाब में कांग्रेस ने अपने भक्तों को  बेवकूफ बना दिया?

बीजेपी को कांग्रेस ने आक्रमक होने का मौका एक ट्वीट के जरिये दे दिया. तभी बीजेपी  दिग्विजय सिंह की पोस्ट को न सिर्फ देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठ व्यक्ति का अपमान बता रही है बल्कि सत्तर साल से चली आ रही चुनावी व्यवस्था पर भरोसा दिखाने वाली जनता के भी आत्मसम्मान से जोड़ कर देख रही है.

दिग्विजय सिंह अपने चुटीले और तीखे प्रहारों के लिये जाने जाते हैं. हालांकि बीच बीच में उनके बयान विवादों का काम करते आए हैं. सियासी गलियारों में कहा जाता है कि दिग्वजिय सिंह के बयान कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करने का काम करते आए हैं और बीजेपी को ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिये दिग्वजिय सिंह के बयानों की जरूरत है.

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