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बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच दिग्विजय की नर्मदा यात्रा

इस पद यात्रा को मध्यप्रदेश में कांग्रेस के चुनावी चेहरे को लेकर चल रही घमासान से जोड़ कर देखा जा रहा है

Dinesh Gupta Updated On: Oct 01, 2017 09:08 AM IST

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बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच दिग्विजय की नर्मदा यात्रा

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शनिवार को नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से नर्मदा नदी की पदयात्रा शुरू कर दी है. पदयात्रा को गैर राजनीतिक बताने के बाद भी दिग्विजय सिंह की इस नर्मदा यात्रा में कांग्रेस के कई नामी चेहरे मौजूद थे.

ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने इस यात्रा से किनारा किया हुआ है, लेकिन इन नेताओं के साथ दिखाई पड़ने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा की मौजूदगी उल्लेखनीय मानी जा रही है.

राज्य भर के समर्थकों का जमावड़ा भी इस यात्रा में देखने को मिला. दिग्विजय सिंह की इस पद यात्रा में उनकी पत्नी अमृता राय भी साथ हैं. इस पद यात्रा को मध्यप्रदेश के चुनावी चेहरे को लेकर चल रही घमासान से जोड़ कर देखा जा रहा है. इस घमासान में दिग्विजय सिंह का मुकाबला कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से है.

अनुमान यह लगाया जा रहा है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस का चुनावी चेहरा अक्टूबर माह में घोषित कर दिया जाएगा? दिग्विजय सिंह की यह नर्मदा यात्रा 3300 किलोमीटर की होगी. कांग्रेस के सत्तर वर्षीय नेता इस यात्रा के लिए पिछले दो माह से पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे. उनकी पहले दिन की यात्रा केवल तीन किलोमीटर की है. वे बरमान घाट के नजदीक ही बरियाघाट गांव में रात्रि विश्राम करेंगे.

अस्सी के दशक में कर चुके हैं बस्तर से मुरैना की पदयात्रा

दिग्विजय सिंह की इस नर्मदा यात्रा को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई नर्मदा यात्रा का जवाब माना जा रहा है. शिवराज सिंह चौहान की यात्रा भी लगभग छह माह चली थी. मुख्यमंत्री चौहान अपनी नर्मदा यात्रा के बीच सरकारी कामकाज भी करते रहते थे. दिग्विजय सिंह ने अपनी यात्रा के लिए कांग्रेस पार्टी से छह माह का अवकाश मंजूर कराया है. कांग्रेस के महासचिव के नाते उनके पास आंध्र प्रदेश का प्रभार है.

दिग्विजय सिंह की यह पहली नर्मदा यात्रा है. इससे पहले उन्होंने अस्सी के दशक में अविभाजित मध्यप्रदेश के बस्तर से पद यात्रा की थी. यह पद यात्रा मुरैना सीमा तक थी. बस्तर से मुरैना तक की पद यात्रा का उनका घोषित उद्देश्य राजनीतिक था. बस्तर से मुरैना की पदयात्रा के कारण ही वर्ष 1993 में वे मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे थे. वे दस साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं.

तस्वीर: दिग्विजय सिंह के फेसबुक से

तस्वीर: दिग्विजय सिंह के फेसबुक से

उनके मुख्यमंत्रित्व काल में बिजली, सड़क और पानी की स्थिति खराब हुई थी. इस कारण ही उन्हें मिस्टर बंटाधार का नाम दिया गया था. चुनाव हारने के बाद दस साल तक कोई पद न लेने की अपनी घोषणा पर वे कुछ साल ही कायम रह पाए थे. मिस्टर बंटाधार की छवि ने उनका अभी तक पीछा नहीं छोड़ा है. उन्हें अल्पसंख्यकों का पैरोकार भी माना जाता है. अपनी इस नर्मदा यात्रा के जरिए वो खोया हुआ जनाधार पाने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी पदयात्रा 120 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी. यात्रा का अंतिम पड़ाव गुजरात होगा.

क्या सिंधिया की राह रोक सकेगी नर्मदा यात्रा

यह तय माना जा रहा है कि राज्य में आने वाले कुछ दिनों में कांग्रेस नेतृत्व में बड़े बदलाव हो सकते हैं. कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम चुनावी चेहरे के तौर पर उभरकर सामने आ रहा है. कमलनाथ के मुकाबले ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा काफी लोकप्रिय माना जाता है. सिंधिया युवा हैं और उनकी छवि पर भी कोई दाग नहीं है.

कमलनाथ पिछले चार दशक से मध्यप्रदेश कांग्रेस की राजनीति चला रहे हैं. उन्होंने हमेशा ही दिल्ली में बैठकर राजनीति की. पहली बार उन्हें मध्यप्रदेश के चुनावी मैदान में सक्रिय रूप में देखा जा रहा है. वे मुख्यमंत्री पर लगातार राजनीतिक हमले कर रहे हैं. कमलनाथ हमेशा से ही अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह के शुभचिंतक माने जाते रहे हैं.

स्वर्गीय माधवराव सिंधिया का विरोध वे इसी कारण करते रहे. राज्य की राजनीति में बड़ा परिवर्तन कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक मंच पर आने के कारण हुआ. हाल ही में कमलनाथ ने सिंधिया का खुला समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान यदि ज्योतिरादित्य को चुनावी चेहरा बनाती है तो उन्हें कोई एतराज नहीं है.

इसके जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा कि चुनावी चेहरा कौन होगा, यह पार्टी हाईकमान तय करेगा. मंदसौर में किसानों पर हुई पुलिस फायरिंग के बाद सिंधिया ने भोपाल में सरकार के खिलाफ धरना देकर पूरी कांग्रेस को अपने पीछे खड़े होने के लिए मजबूर कर दिया था. पार्टी हाईकमान के आदेश पर दिग्विजय सिंह को भी सिंधिया के मंच पर आना पड़ा था. सिंधिया,कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की टीम के सदस्य हैं.

तस्वीर: दिग्विजय सिंह के फेसबुक से

तस्वीर: दिग्विजय सिंह के फेसबुक से

दो तरह की संभावनाएं सिंधिया को लेकर प्रकट की जा रही हैं. पहली संभावना मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपने की है. दूसरी संभावना कमान सौंपे बगैर मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की है. ऐसी स्थिति में कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता है. वर्तमान में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरुण यादव हैं. प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह हैं. अजय सिंह, दिवगंत नेता अर्जुन सिंह के पुत्र हैं.

भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चिंता कमलनाथ और सिंधिया की जोड़ी के कारण ही है. भारतीय जनता पार्टी ने इन दोनों कांग्रेसी नेताओं को घेरने के लिए उत्तरप्रदेश के मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को मध्यप्रदेश भेजा है.

दिग्विजय सिंह की नजर शिवराज विरोधियों पर है

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश कांग्रेस के ऐसे अकेले नेता हैं,जिनके समर्थक गांव-गांव में हैं. पिछले एक दशक से उनके समर्थक हाशिए पर हैं. बरमान घाट पर जबलपुर संभाग के कई पूर्व विधायक यात्रा शुरू होने के दौरान मौजूद थे. दिग्विजय सिंह की यात्रा शुरू हो गई और कांग्रेस में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. दिग्विजय सिंह के समर्थक जगह-जगह सिंधिया की राह में अवरोध पैदा कर रहे हैं.

ग्वालियर-चंबल संभाग में टकराव चरम पर देखने को मिल रहा है. इस पदयात्रा में दिग्विजय सिंह की नजर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोधी माने जाने वाले भाजपा नेताओं पर है. दमोह के सांसद प्रहलाद पटेल ने यात्रा में शामिल होने का दिग्विजय सिंह का न्यौता स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा कि वो नर्मदा भक्त होने के कारण इस यात्रा में शामिल होंगे. यात्रा गांव में आने पर उसका स्वागत भी करेंगे.

प्रह्लाद पटेल, लगातार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमले करते रहते हैं. चौहान के एक अन्य विरोधी बाबूलाल गौर ने अप्रत्यक्ष तौर दिग्विजय सिंह का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि यात्रा के बाद दिग्विजय सिंह को पद के मोह में नहीं पड़ना चाहिए. गौर ने शिवराज सिंह चौहान की यात्रा को शाही यात्रा करार दिया था.

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